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गाजियाबाद में धमाका: ब्लास्ट से उठा धुएं का गुबार, मलबे में दबे थे बच्चे और महिलाएं, भयावह मंजर देख सहम गए लोग
Sun, 24 Sep 2023 01:13 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 24 Sep 2023 01:13 PM IST
सार
गाजियाबाद में पटाखा फैक्टरी में धमाका हुआ तो धुएं का गुबार उठ गया। धमाके की गूंज 200 मीटर तक सुनाई दी। इससे दो मकानों में दरार आ गई। भयावह मंजर देखकर लोग सहम गए। लबे के अंदर से मदद करो, बचाओ की पुकार सुनाई दे रही थी।
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पटाखा फैक्टरी में धमाका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गाजियाबाद के लोनी के रूपनगर की पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके की गूंज 200 मीटर तक सुनाई दी। आसपास के मकान हिल गए। दो में दरार आ गई। धमाके के साथ ही फैक्टरी के ऊपर धुएं का गुबार बन गया। डर के मारे लोग घरों के बाहर निकले तो पहले यह गुबार ही नजर आया। इसके हटते ही भयावह मंजर दिखा जिससे लोग सहम गए।
फैक्टरी मलबे में तब्दील हो चुकी थी। मलबे के अंदर से मदद करो, बचाओ की पुकार सुनाई दे रही थी। फैक्टरी में काम कर रहे बच्चे, महिला और युवक मलबे में दब गए थे। धमाके की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाले उदित, सुरेंद्र, शिवा, संदीप समेत और कुछ लोग बाहर आए। फैक्टरी के दोनों ओर खाली प्लॉट हैं। इनमें भी मलबा भर गया था।
मलबे में दबे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे। स्थानीय लोगों ने लोगों को निकालना शुरू कर दिया। इस दौरान मेबिश, शाहिस्ता के परिजन और आसपास के लोग भी आ गए।सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। वह भी लोगों को मलबे से निकालने में जुट गई। एक के बाद एक मलबे में दबे सात बच्चों, महिलाओं और युवकों को बाहर निकाला।
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दो घंटे बाद निकाला गया इमरान, नहीं बची जान
लोगों का कहना था कि अभी और भी लोग मलबे में दबे हैं। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड, नगर पालिका की टीम को बुलाया गया। करीब दो घंटे बाद मलबे में दबे इमरान को बाहर निकाला गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कुछ देर बाद उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। कुछ घायलों को लोग अपने ऑटो में डालकर अस्पताल ले गए।
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फैक्टरी मलबे में तब्दील हो चुकी थी। मलबे के अंदर से मदद करो, बचाओ की पुकार सुनाई दे रही थी। फैक्टरी में काम कर रहे बच्चे, महिला और युवक मलबे में दब गए थे। धमाके की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाले उदित, सुरेंद्र, शिवा, संदीप समेत और कुछ लोग बाहर आए। फैक्टरी के दोनों ओर खाली प्लॉट हैं। इनमें भी मलबा भर गया था।
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मलबे में दबे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे। स्थानीय लोगों ने लोगों को निकालना शुरू कर दिया। इस दौरान मेबिश, शाहिस्ता के परिजन और आसपास के लोग भी आ गए।सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। वह भी लोगों को मलबे से निकालने में जुट गई। एक के बाद एक मलबे में दबे सात बच्चों, महिलाओं और युवकों को बाहर निकाला।
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दो घंटे बाद निकाला गया इमरान, नहीं बची जान
लोगों का कहना था कि अभी और भी लोग मलबे में दबे हैं। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड, नगर पालिका की टीम को बुलाया गया। करीब दो घंटे बाद मलबे में दबे इमरान को बाहर निकाला गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कुछ देर बाद उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। कुछ घायलों को लोग अपने ऑटो में डालकर अस्पताल ले गए।
बारिश में एक घंटे रुका बचाव कार्य
बचाव कार्य के दौरान करीब एक बजे तेज बारिश के बीच इस कार्य को रोक दिया गया। बारिश के दौरान राहत कार्य थमा रहा इसके बाद बारिश बंद होने पर करीब सवा दो बजे दोबारा रेस्क्यू शुरू किया गया। इस बीच एनडीआरएफ और डॉग स्क्वाड की टीम को बुलाया गया। उन्होंने सर्च अभियान चलाया लेकिन कोई नहीं मिला।
फटा हुआ सिलिंडर और पटाखों के खोखे मिले
सभी घायलों को मलबे से निकालने के बाद पुलिस ने सर्च अभियान चलाया। पुलिस को मौके से एक फटा हुआ छोटा सिलिंडर मिला है। गनीमत रही कि यहां रखा बड़ा सिलिंडर नहीं फटा वरना हादसा और भी दर्दनाक हो सकता था। मौके से पुलिस टीम को पटाखों के खाली खोखे भी मौके से मिले हैं। पटाखों की गंध भी आ रही थी। आसपास के लोग भी यहां पटाखे बनाने की बात कह रहे थे।
सभी घायलों को मलबे से निकालने के बाद पुलिस ने सर्च अभियान चलाया। पुलिस को मौके से एक फटा हुआ छोटा सिलिंडर मिला है। गनीमत रही कि यहां रखा बड़ा सिलिंडर नहीं फटा वरना हादसा और भी दर्दनाक हो सकता था। मौके से पुलिस टीम को पटाखों के खाली खोखे भी मौके से मिले हैं। पटाखों की गंध भी आ रही थी। आसपास के लोग भी यहां पटाखे बनाने की बात कह रहे थे।
ठेकेदार की तलाश
एसीपी रजनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि मौके से एक फटा हुआ सिलिंडर मिला है। कुछ पटाखों के खोल भी मिले हैं। जांच की जा रही है, कि घटना कैसे हुई। आसपास के लोग भी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। ठेकेदार सारिक मौके से फरार हो गया है। पुलिस उसे तलाश रही हैं। सारिक के आने के बाद सही जानकारी मिलेगी।
लोनी के आसपास ठेके पर बन रहे पटाखे
फर्रुखनगर में रोक के बाद पटाखे बनाने का कारोबार लोनी और आसपास के इलाकों में चोरी छिपे चल रहा है। टीलामोड़ निवासी राजू ने बताया कि पटाखे निर्माण और बिक्री पर एनजीटी की रोक से पहले कई दशकों तक फर्रुखनगर इलाके में पटाखे बनाने का काम होता था।
फर्रुखनगर में रोक के बाद पटाखे बनाने का कारोबार लोनी और आसपास के इलाकों में चोरी छिपे चल रहा है। टीलामोड़ निवासी राजू ने बताया कि पटाखे निर्माण और बिक्री पर एनजीटी की रोक से पहले कई दशकों तक फर्रुखनगर इलाके में पटाखे बनाने का काम होता था।
पटाखे बनाने के काम की बारीकी जानने वालों का रोजगार प्रभावित हुआ। इस कारण कारीगर लोनी और आसपास के इलाकों में धीरे-धीरे पलायन कर गए। यह काम रूपनगर, गढ़ी, अशोक विहार, पसौंडा जैसी कच्ची कॉलोनियों में हो रहा है। यहां पर किराये के मकानों में ठेकेदार से जुड़कर चोरी छिपे काम किया जा रहा है।