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Ghaziabad News: 10 साल बाद भी मधुबन-बापूधाम योजना नहीं भर सकी रफ्तार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 06 May 2025 01:12 AM IST
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Even after 10 years, Madhuban-Bapudham scheme could not gain momentum
गाजियाबाद। मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना 10 साल बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। 2011 से 2016 के बीच आबाद हुई इस योजना में 20 फीसदी से अधिक संपत्तियां खाली पड़ी हैं। जीडीए को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हालात यह है कि जो ईब्ल्यूएएस और एलआईजी मकान बने हैं वह भी अब जर्जर होने लगे हैं। वहीं, 2016 में समाजवादी आवासीय योजना में बने 296 भवनों में 60 फीसदी से ज्यादा भवन नहीं बिक सके हैं।
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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने 2004 में करीब 1234 एकड़ जमीन पर मधुबन-बापूधाम योजना शुरू की थी। करीब 10 साल तक इस योजना पर काम चलता रहा। 2012-13 में बसावट शुरू हुई। यहां 7311 ईडब्ल्यूएस और 1072 एलआईजी भवन बनाए गए। वहीं, एमआईजी, मिनी एमआईजी, 16 मंजिला 1122 टू-बीएचके, थ्री बीएचके और थ्री प्लस स्टडी मकान बनाए गए। 10 सालों में पांच से 10 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। जो फ्लैट 2011-12 में नौ लाख का था उसकी कीमत मौजूदा समय में 15 लाख तक पहुंच गई है।
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आठ साल में 296 में बिके केवल 50 मकान

मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में 2016 में 296 समाजवादी आवास बनाए गए। बहुमंजिला इमारतों में बने इन भवनों की शुरुआती कीमत 26 लाख 70 हजार रखी गई थी। आठ साल बाद मौजूदा समय में इन फ्लैटों की कीमत 33 लाख 79 हजार पहुंच चुकी है। आठ सालों में 50 ही फ्लैट बिक सके हैं। जीडीए हर बार रिक्त संपत्तियों की बिक्री के लिए नीलामी शिविर लगाता है लेकिन इस योजना में मकान के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि 119 लोगों ने आवेदन किया था। आवंटन भी हो गया था लेकिन नोटबंदी के बाद इन लोगों ने आवंटन निरस्त करा लिया था। कोरोना काल में भी इस योजना के मकानों की बिक्री की रफ्तार धीमी रही।
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मधुबन-बापूधाम योजना पर एक नजर
-2004 में 1234 एकड़ जमीन का अर्जन शुरू हुआ।
-पहले चरण में 800 एकड़ जमीन फिर 153 एकड़ जमीन किसानों से लेकर अधिग्रहण किया गया।
-उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद 201 एकड़ जमीन का फिर अधिग्रहण किया गया।
-योजना को ए, बी, सी, डी, ई, एफ पॉकेट में विभाजित कर निर्माण कराया गया।
-साल 2013-14 से बसावट शुरू हुई

जीडीए ने माना योजना के नियोजन में रह गईं कुछ खामियां
इस योजना के भवनों की बिक्री अपेक्षा से कम होने पर जीडीए के उच्चाधिकारियों ने मंथन किया। योजना का टोटल स्टेशन सर्वे कराया गया और नए सिरे से मैंपिंग की। सर्वे के बाद सामने आया कि इस योजना के नियोजन में कुछ कमियां रह गईं हैं जिससे बिक्री पर असर पड़ा है। अब नए सिरे से इस योजना के लेआउट में परिवर्तन करने की तैयारी शुरू हो गई। योजना की तरफ संपत्ति खरीदारों को आकर्षित करने के लिए यहां कई योजनाएं लाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।



जीडीए वीसी अतुल वत्स का कहना है कि लेआउट परिवर्तन का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में ले जाया जा रहा है। इस योजना में नागरिक सुविधाओं को और बढ़ाया जाएगा। हर पॉकेट में स्कूल, पार्क और मल्टी कॉम्प्लेक्स व्यावसायिक भवन के साथ ही अन्य सुविधाओं के लिए काम किया जाएगा।
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