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प्रयोग से बची भाजपा, पांचों विधायकों को टिकट
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प्रयोग से बची भाजपा, पांचों विधायकों को टिकट
गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी की पांचों विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायक इस बार फिर चुनावी मैदान में होंगे। सभी विधानसभा सीटों पर जातिगत आंकड़ों के साथ प्रदेश स्तर पर हुए विरोध की संभावनाओं के चलते भाजपा ने इस बार नए प्रयोग से किनारा किया। वहीं, केंद्रीय चुनाव समिति की घोषणा के बाद कई दिनों से सीटों पर लग रहे कयासों पर विराम लग गया है। पांचों सीट पर 61 दावेदारों को निराशा हाथ लगी है। सभी सीटों पर प्रत्याशियों की स्थिति साफ होने के बाद रविवार से चुनावी चहल-पहल और तेज हो जाएगी।
गाजियाबाद : सात दावेदारों पर भारी पड़े अतुल गर्ग
शहर सीट से सात दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए अतुल गर्ग ने तीसरी बार टिकट हासिल किया है। पूर्व महापौर स्वर्गीय दिनेश चंद्र गर्ग के बड़े बेटे अतुल गर्ग ने भाजपा के विभिन्न संगठनों में दायित्वों को निभाया। शुरूआत से वह आरएसएस से जुड़े रहे। 2017 में जीत के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में जगह बनाने वाले गाजियाबाद के इकलौते विधायक बने। उन्हें पहली बार खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रसाधन का राज्यमंत्री बनाया गया। फिर उन्हें मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया। इस बार उन्हें बसपा, कांग्रेस प्रत्याशियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। उन्होंने एमएमएच कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की है।
साहिबाबाद : सुनील शर्मा चौथी बार मिला टिकट
साहिबाबाद में टिकट की दौड़ में 12 लोगों को पछाड़ते हुए भाजपा नेता सुनील शर्मा ने चौथी बार टिकट हासिल किया है। साहिबाबाद में 2.50 लाख से अधिक ब्राह्मण वोट और डेढ़ लाख से अधिक पूर्वांचल वोट के समीकरण को देखते हुए पार्टी ने फिर भरोसा जताया। सुनील शर्मा बीए एलएलबी पास हैं। पूर्व में युवा मोर्चा और महानगर अध्यक्ष रहें। वह गाजियाबाद सीट से 2007 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। 2012 में साहिबाबाद सीट पर अमरपाल शर्मा ने उन्हें हराया। चुनावी हार का बदला लेते हुए उन्होंने 2017 में जीत हासिल की।
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मुरादनगर : अजीतपाल को अनुभव का मिला लाभ
मुरादनगर सीट पर इस बार सबसे ज्यादा कयास लगे, लेकिन लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते पार्टी ने फिर टिकट देकर भरोसा जताया है। वह पूर्व मंत्री और छह बार विधायक रहे राजपाल त्यागी के बेटे हैं। 2017 में चुनाव से ठीक पहले उनके साथ पिता ने भाजपा का दामन थामा। और जीत भी हासिल की। मामा नरेशपाल त्यागी की हत्या के आरोप में उनके बड़े भाई गिरीश जेल में हैं। इस विवाद के बावजूद राजनीतिक रूप से कोई विवाद नहीं झेलना पड़ा। सीट पर इस बार अन्य दलों के प्रत्याशियों से कड़ा मुकाबला मिल सकता है।
लोनी : विवादों में घिरे पर टिकट बचाने में कामयाब रहे नंदकिशोर
विधानसभा में अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने के साथ कई विवादों में नाम आने के बावजूद 17 दावेदारों को पीछे छोड़कर लोनी में मौजूदा विधायक नंद किशोर गुर्जर सीट बचाने में कामयाब रहे। परास्नातक की डिग्री हासिल करने के दौरान वह छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। संगठन में कई पदों पर दायित्व का निर्वाहन करते हुए उन्हें 2017 में टिकट मिला। बीते चुनाव में भी उन पर कयास लगाए गए थे, जिसे झूठा साबित करते हुए उन्होंने जीत हासिल की। पिछली बार कई नेताओं की जमानत जब्त करने वाले नंदकिशोर गुर्जर को इस बार बाकी प्रत्याशियों से कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है।
मोदीनगर : डॉ. मंजू को बेदाग छवि का मिला लाभ
मोदीनगर से मौजूदा विधायक डॉ. मंजू सिवाच की बेदाग छवि, क्षेत्र में सक्रियता और एकलौती महिला दावेदार होने का लाभ मिला। गैर राजनैतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली डॉ. मंजू सिवाच और उनके पति दोनों डॉक्टर हैं। मोदीनगर में उनका अस्पताल भी है। समाजसेवा से लंबे समय से जुड़े रहने के बाद उन्हें 2017 में पहली बार मोदीनगर से टिकट मिला। मोदीनगर से जीत दर्ज करने और संभावनाओं के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।
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गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी की पांचों विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायक इस बार फिर चुनावी मैदान में होंगे। सभी विधानसभा सीटों पर जातिगत आंकड़ों के साथ प्रदेश स्तर पर हुए विरोध की संभावनाओं के चलते भाजपा ने इस बार नए प्रयोग से किनारा किया। वहीं, केंद्रीय चुनाव समिति की घोषणा के बाद कई दिनों से सीटों पर लग रहे कयासों पर विराम लग गया है। पांचों सीट पर 61 दावेदारों को निराशा हाथ लगी है। सभी सीटों पर प्रत्याशियों की स्थिति साफ होने के बाद रविवार से चुनावी चहल-पहल और तेज हो जाएगी।
गाजियाबाद : सात दावेदारों पर भारी पड़े अतुल गर्ग
शहर सीट से सात दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए अतुल गर्ग ने तीसरी बार टिकट हासिल किया है। पूर्व महापौर स्वर्गीय दिनेश चंद्र गर्ग के बड़े बेटे अतुल गर्ग ने भाजपा के विभिन्न संगठनों में दायित्वों को निभाया। शुरूआत से वह आरएसएस से जुड़े रहे। 2017 में जीत के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में जगह बनाने वाले गाजियाबाद के इकलौते विधायक बने। उन्हें पहली बार खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रसाधन का राज्यमंत्री बनाया गया। फिर उन्हें मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया। इस बार उन्हें बसपा, कांग्रेस प्रत्याशियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। उन्होंने एमएमएच कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की है।
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साहिबाबाद : सुनील शर्मा चौथी बार मिला टिकट
साहिबाबाद में टिकट की दौड़ में 12 लोगों को पछाड़ते हुए भाजपा नेता सुनील शर्मा ने चौथी बार टिकट हासिल किया है। साहिबाबाद में 2.50 लाख से अधिक ब्राह्मण वोट और डेढ़ लाख से अधिक पूर्वांचल वोट के समीकरण को देखते हुए पार्टी ने फिर भरोसा जताया। सुनील शर्मा बीए एलएलबी पास हैं। पूर्व में युवा मोर्चा और महानगर अध्यक्ष रहें। वह गाजियाबाद सीट से 2007 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। 2012 में साहिबाबाद सीट पर अमरपाल शर्मा ने उन्हें हराया। चुनावी हार का बदला लेते हुए उन्होंने 2017 में जीत हासिल की।
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मुरादनगर : अजीतपाल को अनुभव का मिला लाभ
मुरादनगर सीट पर इस बार सबसे ज्यादा कयास लगे, लेकिन लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते पार्टी ने फिर टिकट देकर भरोसा जताया है। वह पूर्व मंत्री और छह बार विधायक रहे राजपाल त्यागी के बेटे हैं। 2017 में चुनाव से ठीक पहले उनके साथ पिता ने भाजपा का दामन थामा। और जीत भी हासिल की। मामा नरेशपाल त्यागी की हत्या के आरोप में उनके बड़े भाई गिरीश जेल में हैं। इस विवाद के बावजूद राजनीतिक रूप से कोई विवाद नहीं झेलना पड़ा। सीट पर इस बार अन्य दलों के प्रत्याशियों से कड़ा मुकाबला मिल सकता है।
लोनी : विवादों में घिरे पर टिकट बचाने में कामयाब रहे नंदकिशोर
विधानसभा में अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने के साथ कई विवादों में नाम आने के बावजूद 17 दावेदारों को पीछे छोड़कर लोनी में मौजूदा विधायक नंद किशोर गुर्जर सीट बचाने में कामयाब रहे। परास्नातक की डिग्री हासिल करने के दौरान वह छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। संगठन में कई पदों पर दायित्व का निर्वाहन करते हुए उन्हें 2017 में टिकट मिला। बीते चुनाव में भी उन पर कयास लगाए गए थे, जिसे झूठा साबित करते हुए उन्होंने जीत हासिल की। पिछली बार कई नेताओं की जमानत जब्त करने वाले नंदकिशोर गुर्जर को इस बार बाकी प्रत्याशियों से कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है।
मोदीनगर : डॉ. मंजू को बेदाग छवि का मिला लाभ
मोदीनगर से मौजूदा विधायक डॉ. मंजू सिवाच की बेदाग छवि, क्षेत्र में सक्रियता और एकलौती महिला दावेदार होने का लाभ मिला। गैर राजनैतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली डॉ. मंजू सिवाच और उनके पति दोनों डॉक्टर हैं। मोदीनगर में उनका अस्पताल भी है। समाजसेवा से लंबे समय से जुड़े रहने के बाद उन्हें 2017 में पहली बार मोदीनगर से टिकट मिला। मोदीनगर से जीत दर्ज करने और संभावनाओं के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।