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Ghaziabad News: एसी चलाकर कार में सोए चालक की दम घुटने से मौत
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इंदिरापुरम। गर्मी से बचने के लिए रविवार की रात एसी चलाकर अपनी सीट पर सोए चालक कल्लू दुबे (36) का सोमवार की सुबह कार में ही शव मिला। शव को शीशा तोड़कर निकाला गया। पुलिस का कहना है कि पेट्रोल खत्म होने से थोड़ी देर बाद ही एसी बंद हो गया था। इस तथ्य के आधार पर दम घुटने से मौत होने की आशंका जताई गई है।
जिला एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन चिकित्सक का कहना है कार के अंदर ऑक्सीजन की कमी होने पर कार्बन डाई ऑक्साइड गैस कार्बन मोनोऑक्साइड में बदल जाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड जहरीली और जानलेवा है। इसके प्रभाव से इंसान पहले बेहोशी की हालत में पहुंचता है और फिर उसकी सांस टूट जाती है।
माना जा रहा है कि मूलरूप से हमीरपुर के रूरी गांव के निवासी कैब चालक कल्लू के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह डेढ़ महीने से कृष्णा विहार निवासी अमलेश कुमार पांडेय की कैब (वैगनआर्कार) पर चालक थे। अमलेश ने बताया कि साहिबाबाद में किराए पर रहने वाले कल्लू रविवार की रात करीब दस बजे प्रह्लादगढ़ी रेड लाइट के पास गाड़ी को सड़क किनारे लगाकर उसी में सो गए थे। उन्होंने उन्हें 11 बजे काॅल की, लेकिन यह रिसीव नहीं हुई।
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उन्होंने बताया कि सुबह आठ बजे फिर से काॅल की। इस बार भी फोन नहीं उठा तो वह जीपीएस की मदद से लोकेशन ट्रेस करते हुए गाड़ी तक पहुंच गए। वहां आवाज लगाने पर भी कल्लू नहीं उठे तो लोगों की मदद से शीशा तोड़कर उन्हें निकाला गया। पास के अस्पताल ले जाने पर चिकित्सक ने बताया कि उनकी मौत हो चुकी है। डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि इस मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है।
छह साल से चला रहे थे गाड़ी
कल्लू के लोनी में रहने वाले भाई मुकेश ने बताया कि सुबह पुलिस से हादसे की सूचना मिली। कल्लू छह साल से गाड़ी चलाने का काम कर रहे थे। डेढ़ साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो चुकी है। उनका बेटा महोबा में बहन के पास रहता है। कुछ दिन पहले कल्लू की सास की मौत हो गई थी। वहां से लौटकर उन्होंने अमलेश पांडेय की गाड़ी चलाना शुरू किया था।
बिजली जाने पर कार
में सो जाते हैं लोग
कार में एसी चलाकर सो जाना खतरनाक है, यह उन लोगों के लिए जान लेना जरूरी है, जो अक्सर ऐसी जानलेवा लापरवाही करते हैं। दरअसल, पिछले दिनों देखा गया है कि लंबे समय के लिए बिजली चले जाने पर जब इन्वर्टर भी बंद हो जाते हैं, तो लोग गर्मी से बचने के लिए कार में एसी चलाकर बैठ जाते हैं। कुछ लोग कार में ही सो भी जाते हैं।
ऑक्सीजन की कमी से होती है मौत
कार में जब लंबे समय तक बाहर से ताजा ऑक्सीजन नहीं जाती है तो ऐसी घटना होने का खतरा रहता है। ऑक्सीजन की कमी से कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस बनती है।
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस धुएं के साथ कार से निकलने वाली गैस का मुख्य घटक है। जब सिर्फ एसी चल रहा होता है तो इसकी वजह से भी यह कार में ही जमा हो जाती है।
यह गैस जहरीली है लेकिन गंधहीन भी है, इसलिए, जब यह सांस के साथ अंदर जाती है तो इंसान को इससे कोई परेशानी नहीं होती है।
जहरीली गैस अंदर जाने का अहसास नहीं होने की वजह से इसकी मात्रा बढ़ती जाती है और इंसान बेहोशी की स्थिति में पहुंचता जाता है।
शरीर में पहुंचने पर यह गैस खूब की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देती है। ऑक्सीजन की कमी हो जाने पर ही दम घुटता है और मृत्यु हो जाती है।
(जैसा जिला एमएमजी अस्पताल से फिजिशियन डाॅ. संतराम ने बताया)
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जिला एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन चिकित्सक का कहना है कार के अंदर ऑक्सीजन की कमी होने पर कार्बन डाई ऑक्साइड गैस कार्बन मोनोऑक्साइड में बदल जाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड जहरीली और जानलेवा है। इसके प्रभाव से इंसान पहले बेहोशी की हालत में पहुंचता है और फिर उसकी सांस टूट जाती है।
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माना जा रहा है कि मूलरूप से हमीरपुर के रूरी गांव के निवासी कैब चालक कल्लू के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह डेढ़ महीने से कृष्णा विहार निवासी अमलेश कुमार पांडेय की कैब (वैगनआर्कार) पर चालक थे। अमलेश ने बताया कि साहिबाबाद में किराए पर रहने वाले कल्लू रविवार की रात करीब दस बजे प्रह्लादगढ़ी रेड लाइट के पास गाड़ी को सड़क किनारे लगाकर उसी में सो गए थे। उन्होंने उन्हें 11 बजे काॅल की, लेकिन यह रिसीव नहीं हुई।
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उन्होंने बताया कि सुबह आठ बजे फिर से काॅल की। इस बार भी फोन नहीं उठा तो वह जीपीएस की मदद से लोकेशन ट्रेस करते हुए गाड़ी तक पहुंच गए। वहां आवाज लगाने पर भी कल्लू नहीं उठे तो लोगों की मदद से शीशा तोड़कर उन्हें निकाला गया। पास के अस्पताल ले जाने पर चिकित्सक ने बताया कि उनकी मौत हो चुकी है। डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि इस मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है।
छह साल से चला रहे थे गाड़ी
कल्लू के लोनी में रहने वाले भाई मुकेश ने बताया कि सुबह पुलिस से हादसे की सूचना मिली। कल्लू छह साल से गाड़ी चलाने का काम कर रहे थे। डेढ़ साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो चुकी है। उनका बेटा महोबा में बहन के पास रहता है। कुछ दिन पहले कल्लू की सास की मौत हो गई थी। वहां से लौटकर उन्होंने अमलेश पांडेय की गाड़ी चलाना शुरू किया था।
बिजली जाने पर कार
में सो जाते हैं लोग
कार में एसी चलाकर सो जाना खतरनाक है, यह उन लोगों के लिए जान लेना जरूरी है, जो अक्सर ऐसी जानलेवा लापरवाही करते हैं। दरअसल, पिछले दिनों देखा गया है कि लंबे समय के लिए बिजली चले जाने पर जब इन्वर्टर भी बंद हो जाते हैं, तो लोग गर्मी से बचने के लिए कार में एसी चलाकर बैठ जाते हैं। कुछ लोग कार में ही सो भी जाते हैं।
ऑक्सीजन की कमी से होती है मौत
कार में जब लंबे समय तक बाहर से ताजा ऑक्सीजन नहीं जाती है तो ऐसी घटना होने का खतरा रहता है। ऑक्सीजन की कमी से कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस बनती है।
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस धुएं के साथ कार से निकलने वाली गैस का मुख्य घटक है। जब सिर्फ एसी चल रहा होता है तो इसकी वजह से भी यह कार में ही जमा हो जाती है।
यह गैस जहरीली है लेकिन गंधहीन भी है, इसलिए, जब यह सांस के साथ अंदर जाती है तो इंसान को इससे कोई परेशानी नहीं होती है।
जहरीली गैस अंदर जाने का अहसास नहीं होने की वजह से इसकी मात्रा बढ़ती जाती है और इंसान बेहोशी की स्थिति में पहुंचता जाता है।
शरीर में पहुंचने पर यह गैस खूब की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देती है। ऑक्सीजन की कमी हो जाने पर ही दम घुटता है और मृत्यु हो जाती है।
(जैसा जिला एमएमजी अस्पताल से फिजिशियन डाॅ. संतराम ने बताया)