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खुलासा : पादरी ने 150 परिवारों का कराया धर्मांतरण
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गाजियाबाद। नंदग्राम के सेवानगर में मंगलवार की शाम एक परिवार का धर्मांतरण कराते हुए पकड़े गए पादरी जेराल्ड उर्फ गैराल्ड मैथ्यूज मैशी और उसके चार साथियों को पुलिस ने बुधवार को कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट से पांचों को जेल भेज दिया गया। पादरी के मोबाइल फोन की जांच पड़ताल करने पर पता चला कि वह अब तक गाजियाबाद, मोदीनगर, बागपत और हापुड़ के 150 लोगों का धर्मांतरण करा चुका था।
उसने कई व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। जो लोग झांसे में आकर धर्म बदल लेते थे, उन्हें ग्रुप में जोड़ लेता था। पादरी के पकड़े जाने पर कई ने ग्रुप छोड़ दिया है। उनके मोबाइल नंबर से पुलिस उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप की इस जानकारी को इस केस में साक्ष्य के रूप में कोर्ट के सामने रखेगी।
एसीपी नंदग्राम पूनम मिश्रा ने बताया कि डासना के चर्च के पादरी गैराल्ड मैथ्यूज मैशी, सेवानगर के रवि, मोदीनगर के दीपक और रोहन व राजनगर के आशीष के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया।
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प्रारंभिक जांच पड़ताल में सामने आया है कि धर्मांतरण के लिए कई चरणों में काम किया जाता था। पहले पादरी के साथ जुड़े लोग बाहरी बस्तियों में जाकर ऐसे परिवारों को चिन्हित करते थे जो बीमारी या गरीबी से तंग आ चुके हैं। दूसरे चरण में पादरी के सहयोगी किसी बहाने से ऐसे लोगों से मिलने जाते थे।
उनके सामने झूठ बोलते थे कि पादरी ने उनके कष्ट दूर कर दिए गए। वे लोग जब उपाय पूछते तो उनके घर पादरी अपने सहयोगियों के साथ पहुंच जाता। तीसरे चरण में कष्ट दूर करने के नाम पर ईसाई धर्म के धार्मिक अनुष्ठान कराए जाते। अनुष्ठान के बाद वापस जाते हुए पादरी के सहयोगी प्रति व्यक्ति 300 से 3500 रुपये तक देते थे। तीन-चार बार अनुष्ठान किया जाता था। इसके बाद धर्मांतरण के लिए राजी किया जाता था। जो लोग धर्मांतरण कर लेते, उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया जाता। इस ग्रुप में ईसाई धर्म से जुड़ी सामग्री भेजी जाती थी।
पहले बहन फिर भाई को फंसाया जाल में
सेवानगर में ये लोग रवि के घर से पकड़े गए। पुलिस की जांच में पता चला कि रवि के परिवार में सबसे पहले उसकी बहन पादरी के संपर्क में आई थी। पादरी ने कष्ट दूर करने का दावा कर उसे धर्मांतरण के लिए राजी किया। बहन से जानकारी मिलने पर रवि भी संपर्क में आ गया और धर्मांतरण के लिए राजी हो गया। रवि के कहने पर पादरी पूरी टीम को लेकर धार्मिक अनुष्ठान कर धर्मांतरण के लिए पहुंचा था। रवि के भाई और अन्य परिजनों ने विरोध कर दिया। आसपास के लोग भी पादरी के विरोध में खुलकर आ गए। इसके बाद पुलिस पादरी और उसके सहगियों को थाने ले गई।
बड़े आयोजन की चल रही थी तैयारी
पुलिस को पादरी के मोबाइल पर चल रहे व्हाट्सएप ग्रुप से ही पता चला है कि उसने इसी महीने के आखिर में बड़े आयोजन की तैयारी कर रखी थी। इसमें बाहर से लोग आने थे। आशंका है कि इसमें कई लोगों का धर्मांतरण कराया जाता। एक व्हाट्सएप ग्रुप में मुंबई के लोग भी जुड़े मिले हैं। पुलिस यह भी मालूम करने का प्रयास कर रही है कि लोगों को जो धन दिया जा रहा था, वह पादरी को कहां से मिल रहा था। पुलिस ने बताया कि जब रवि के घर से पादरी और उसके साथियों को पकड़ा गया तो उसने झूठ बोला कि वे यहां जन्मदिन समारोह में शामिल होने आए हैं। पादरी का मोबाइल फोन चेक करते ही झूठ से पर्दा उठ गया।
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उसने कई व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। जो लोग झांसे में आकर धर्म बदल लेते थे, उन्हें ग्रुप में जोड़ लेता था। पादरी के पकड़े जाने पर कई ने ग्रुप छोड़ दिया है। उनके मोबाइल नंबर से पुलिस उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप की इस जानकारी को इस केस में साक्ष्य के रूप में कोर्ट के सामने रखेगी।
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एसीपी नंदग्राम पूनम मिश्रा ने बताया कि डासना के चर्च के पादरी गैराल्ड मैथ्यूज मैशी, सेवानगर के रवि, मोदीनगर के दीपक और रोहन व राजनगर के आशीष के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया।
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प्रारंभिक जांच पड़ताल में सामने आया है कि धर्मांतरण के लिए कई चरणों में काम किया जाता था। पहले पादरी के साथ जुड़े लोग बाहरी बस्तियों में जाकर ऐसे परिवारों को चिन्हित करते थे जो बीमारी या गरीबी से तंग आ चुके हैं। दूसरे चरण में पादरी के सहयोगी किसी बहाने से ऐसे लोगों से मिलने जाते थे।
उनके सामने झूठ बोलते थे कि पादरी ने उनके कष्ट दूर कर दिए गए। वे लोग जब उपाय पूछते तो उनके घर पादरी अपने सहयोगियों के साथ पहुंच जाता। तीसरे चरण में कष्ट दूर करने के नाम पर ईसाई धर्म के धार्मिक अनुष्ठान कराए जाते। अनुष्ठान के बाद वापस जाते हुए पादरी के सहयोगी प्रति व्यक्ति 300 से 3500 रुपये तक देते थे। तीन-चार बार अनुष्ठान किया जाता था। इसके बाद धर्मांतरण के लिए राजी किया जाता था। जो लोग धर्मांतरण कर लेते, उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया जाता। इस ग्रुप में ईसाई धर्म से जुड़ी सामग्री भेजी जाती थी।
पहले बहन फिर भाई को फंसाया जाल में
सेवानगर में ये लोग रवि के घर से पकड़े गए। पुलिस की जांच में पता चला कि रवि के परिवार में सबसे पहले उसकी बहन पादरी के संपर्क में आई थी। पादरी ने कष्ट दूर करने का दावा कर उसे धर्मांतरण के लिए राजी किया। बहन से जानकारी मिलने पर रवि भी संपर्क में आ गया और धर्मांतरण के लिए राजी हो गया। रवि के कहने पर पादरी पूरी टीम को लेकर धार्मिक अनुष्ठान कर धर्मांतरण के लिए पहुंचा था। रवि के भाई और अन्य परिजनों ने विरोध कर दिया। आसपास के लोग भी पादरी के विरोध में खुलकर आ गए। इसके बाद पुलिस पादरी और उसके सहगियों को थाने ले गई।
बड़े आयोजन की चल रही थी तैयारी
पुलिस को पादरी के मोबाइल पर चल रहे व्हाट्सएप ग्रुप से ही पता चला है कि उसने इसी महीने के आखिर में बड़े आयोजन की तैयारी कर रखी थी। इसमें बाहर से लोग आने थे। आशंका है कि इसमें कई लोगों का धर्मांतरण कराया जाता। एक व्हाट्सएप ग्रुप में मुंबई के लोग भी जुड़े मिले हैं। पुलिस यह भी मालूम करने का प्रयास कर रही है कि लोगों को जो धन दिया जा रहा था, वह पादरी को कहां से मिल रहा था। पुलिस ने बताया कि जब रवि के घर से पादरी और उसके साथियों को पकड़ा गया तो उसने झूठ बोला कि वे यहां जन्मदिन समारोह में शामिल होने आए हैं। पादरी का मोबाइल फोन चेक करते ही झूठ से पर्दा उठ गया।