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Ghaziabad News: एमएमजी अस्पताल में फिर खराब हुई डिजिटल एक्स-रे मशीन
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गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में खून की जांच से लेकर अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन तक की मशीनें बार-बार खराब हो रही हैं। इससे मरीजों को निजी केंद्रों पर जाकर जांच करानी पड़ रही है। ताजा परेशानी एमएमजी अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन के खराब हो जाने से आई है। यह दो दिन पहले ही ठीक कराई गई थी। मंगलवार को फिर से खराब हो गई।इसके खराब हुए पुर्जे की मरम्मत के लिए लखनऊ भेजा गया है। जाहिर है, मरीजों को कई दिन परेशानी झेलनी होगी, क्योंकि दिक्कत सिर्फ एक अस्पताल में एक मशीन के खराब हो जाने की नहीं है। संयुक्त अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। इसके अलावा संयुक्त और जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच भी बंद है। इस कारण से एमएमजी में अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को 10 से 15 बाद का समय दिया जा रहा है। एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन 170 से 180 डिजिटिल एक्स-रे होते थे। मशीन खराब होने से पुरानी मशीन पर सिर्फ मेडिकोलीगल और इमरजेंसी वाले 15 से 20 एक्स-रे किए जा रहे हैं।
जल्द शुरु होगी जांच
सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि जल्द ही मशीन का पुर्जा ठीक होकर आ जाएगा। इसके बाद जांच शुरू कर दी जाएगी।
दो बजे के बाद बाहर कराओ जांच
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी मशीन पिछले डेढ़ साल से खराब पड़ी है। सेंटर पर कार्यरत एक्स-रे टेक्नीशियन भी मातृत्व अवकाश पर हैं। अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन से आठ बजे से दो बजे तक ही जांच होती है। दो बजे के बाद जरूरत पड़ने पर मरीजों को बाहर से जांच करानी होती है।
कहीं रेडियोलाॅजिस्ट अवकाश पर तो कहीं प्रशिक्षण पर
संयुक्त अस्पताल में डेढ़ वर्ष पूर्व रेडियोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र सिंह का तबादला होने के बाद अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। छह महीने के प्रशिक्षण के बाद डॉ. प्रदीप यादव की ज्वाइनिंग हुई है, लेकिन अभी वह प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके बाद लखनऊ के केजीएमसी में परीक्षा देंगे। उसमें पास होने पर ही जांच कर सकेंगे। यही स्थिति महिला अस्पताल की है। सेवानिवृत्त के बाद दोबारा ज्वाइन करने वाले डॉ. विनेश डेढ़ महीने से अवकाश पर हैं, जबकि प्रशिक्षण लेकर नोएडा से आए डॉक्टर अभी परीक्षा देने के बाद ही जांच कर पाएंगे। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 60 गर्भवती को अल्ट्रासाउंड जांच कराने की जरूरत होती है, अस्पताल में जांच बंद होने से गर्भवती को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है।
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जल्द शुरु होगी जांच
सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि जल्द ही मशीन का पुर्जा ठीक होकर आ जाएगा। इसके बाद जांच शुरू कर दी जाएगी।
दो बजे के बाद बाहर कराओ जांच
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी मशीन पिछले डेढ़ साल से खराब पड़ी है। सेंटर पर कार्यरत एक्स-रे टेक्नीशियन भी मातृत्व अवकाश पर हैं। अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन से आठ बजे से दो बजे तक ही जांच होती है। दो बजे के बाद जरूरत पड़ने पर मरीजों को बाहर से जांच करानी होती है।
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कहीं रेडियोलाॅजिस्ट अवकाश पर तो कहीं प्रशिक्षण पर
संयुक्त अस्पताल में डेढ़ वर्ष पूर्व रेडियोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र सिंह का तबादला होने के बाद अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। छह महीने के प्रशिक्षण के बाद डॉ. प्रदीप यादव की ज्वाइनिंग हुई है, लेकिन अभी वह प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके बाद लखनऊ के केजीएमसी में परीक्षा देंगे। उसमें पास होने पर ही जांच कर सकेंगे। यही स्थिति महिला अस्पताल की है। सेवानिवृत्त के बाद दोबारा ज्वाइन करने वाले डॉ. विनेश डेढ़ महीने से अवकाश पर हैं, जबकि प्रशिक्षण लेकर नोएडा से आए डॉक्टर अभी परीक्षा देने के बाद ही जांच कर पाएंगे। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 60 गर्भवती को अल्ट्रासाउंड जांच कराने की जरूरत होती है, अस्पताल में जांच बंद होने से गर्भवती को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है।
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