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आगरा के पूर्व सीएमओ की मृत्यु, खत्म हुआ मुकदमा

Thu, 02 Mar 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Thu, 02 Mar 2017 12:18 AM IST
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The death of former CMO of Agra, the lawsuit is over
court shimla
 एनआरएचएम घोटाले में फंसे आगरा के पूर्व सीएमओ (परिवार कल्याण) विजय कुमार श्रीवास्तव की मृत्यु हो जाने के चलते कोर्ट ने उनका मामला बंद कर दिया है। इस केस में अब बाकी बचे दो अन्य आरोपियों तत्कालीन डिप्टी सीएमओ संजय काशीवाले और दवा कारोबारी संजय अवस्थी के खिलाफ ही कोर्ट में केस चलेगा। एक अर्जी पर सुनवाई के बाद सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने दोनों आरोपियों की फाइल को अलग करने का आदेश जारी किया है।
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आगरा में हुए एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीएमओ विजय कुमार श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ संजय काशीवाले और दवा कारोबारी संजय अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। इनमें से आरोपी विजय कुमार श्रीवास्तव की 31 जनवरी 2017 को मृत्यु हो चुकी है।
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आरोपी के अधिवक्ता ने इसकी सूचना कोर्ट को दी थी। कोर्ट के आदेश पर मामले के जांच अधिकारी सीबीआई दरोगा पीयूष वर्मा और कांस्टेबल कृष्णानंद यादव ने विजय कुमार श्रीवास्तव के घर पर जाकर जाकर जांच की थी।
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बुधवार को जांच अधिकारी ने कोर्ट में पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि आरोपी विजय कुमार श्रीवास्तव के लखनऊ में सहारा सिटी स्थित आवास पर जाकर उन्होंने जांच पूरी कर ली है।

उनकी पत्नी ने आरोपी के डेथ सर्टिफिकेट की जो छाया प्रति उपलब्ध कराई थी, उसका सत्यापन भी करा लिया गया है। यह डेथ सर्टिफिकेट रजिस्ट्रार के यहां से 4 फरवरी 2017 को जारी किया गया था। इसके साथ ही जांच अधिकारी ने कोर्ट में अपना शपथपत्र भी पेश कर दिया।

विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने अर्जी का निस्तारण करते हुए इस मुकदमे से विजय कुमार श्रीवास्तव का नाम निकालकर फाइल को अलग कर दिया है। इसके साथ ही न्यायाधीश ने आरोपी के सभी बंधपत्र निरस्त करने के साथ ही उसके जमानतदारों को उनके दायित्व से उन्मोचित कर दिया है।

कोर्ट की टिप्पणी:
‘क्षीर विवेचना के आधार पर न्यायहित की चिंतन की स्याही तथा चेतना की लेखनी का निष्कर्ष स्पष्ट है कि आरोपी विजय कुमार श्रीवास्तव की मृत्यु की स्थिति में उसके खिलाफ वाद की कार्यवाही विधि अनुसार अग्रसरित नहीं की जा सकती।


अत: विजय कुमार श्रीवास्तव के विरुद्ध वाद की कार्यवाही उपशमित किया जाना मामले के तथ्य एवं परिस्थितियों में उचित, युक्तियुक्त, प्रासंगिक, विधि तथा न्यायहित में इष्टकर होगा।’
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