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फिंगर प्रिंट बताएगा कौन चला रहा था ऑडी
ब्यूरो, अमर उजाला /साहिबाबाद
Updated Fri, 10 Feb 2017 01:14 AM IST
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फिंगर प्रिंट्स
- फोटो : अमर उजाला
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इंदिरापुरम में ऑडी की टक्कर से ऑटो सवार चार लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की मदद ली है। पुलिस ने ऑडी कार के स्टेयरिंग पर मिले फिंगर प्रिंट और डा. मनीष रावत के फिंगर प्रिंट को जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि ऑडी को डा. मनीष चला रहे थे या नहीं।
27 जनवरी को हुए ऑडी-ऑटो टक्कर मामले में पुलिस अब तक यह नहीं पता लगा पाई है कि हादसे के वक्त कार कौन चला रहा था। डा. मनीष रावत ने बयान दिया था कि कार उनका ड्राइवर इशहाक चला रहा था। जिस ड्राइवर ने अपना लाइसेंस जमा कराकर जमानत ली थी वह लाइसेंस फर्जी था।
इसके बाद से ड्राइवर फरार हो गया। अब पुलिस ने फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की मदद ली है। पुलिस ने घटनास्थल पर मिली ऑडी कार के स्टेयरिंग से मिले फिंगर प्रिंट और मनीष रावत के फिंगर प्रिंट को लखनऊ लैब में भेजा है।
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चौकी इंचार्ज सनत मिश्रा ने बताया कि लैब से रिपोर्ट आने में करीब छह महीने का समय लग सकता है। प्रदेश में एक ही लैब होने की वजह से समय लगेगा। बता दें कि 27 जनवरी को इंदिरापुरम में नहर रोड पर देर रात ऑडी की टक्कर से ऑटो सवार एक महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई थी।
डाक्टर-ड्राइवर के मोबाइल का सीडीआर तक नहीं निकाला
पुलिस ने अभी तक डा. मनीष रावत और ड्राइवर के मोबाइल का सीडीआर तक नहीं निकाला है। पुलिस अगर सीडीआर निकाल लेती तो पता चल जाता कि हादसे के बाद डा. मनीष ने किन लोगों से बात की थी। इससे पुलिस को जांच को भी मदद मिलती।
झूठे निकले डा. मनीष के बयान
डा. मनीष रावत ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि उनका ड्राइवर मोबाइल नहीं रखता है, जबकि पुलिस की जांच में सामने आया है कि ड्राइवर सैय्यद इम्तियाज के पास मोबाइल है। उसने बरेली से नंबर भी ले रखा है। अब यह मोबाइल बंद आ रहा है। उसकी लोकेशन का पता नहीं चल पा रहा है।
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27 जनवरी को हुए ऑडी-ऑटो टक्कर मामले में पुलिस अब तक यह नहीं पता लगा पाई है कि हादसे के वक्त कार कौन चला रहा था। डा. मनीष रावत ने बयान दिया था कि कार उनका ड्राइवर इशहाक चला रहा था। जिस ड्राइवर ने अपना लाइसेंस जमा कराकर जमानत ली थी वह लाइसेंस फर्जी था।
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इसके बाद से ड्राइवर फरार हो गया। अब पुलिस ने फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की मदद ली है। पुलिस ने घटनास्थल पर मिली ऑडी कार के स्टेयरिंग से मिले फिंगर प्रिंट और मनीष रावत के फिंगर प्रिंट को लखनऊ लैब में भेजा है।
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चौकी इंचार्ज सनत मिश्रा ने बताया कि लैब से रिपोर्ट आने में करीब छह महीने का समय लग सकता है। प्रदेश में एक ही लैब होने की वजह से समय लगेगा। बता दें कि 27 जनवरी को इंदिरापुरम में नहर रोड पर देर रात ऑडी की टक्कर से ऑटो सवार एक महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई थी।
डाक्टर-ड्राइवर के मोबाइल का सीडीआर तक नहीं निकाला
पुलिस ने अभी तक डा. मनीष रावत और ड्राइवर के मोबाइल का सीडीआर तक नहीं निकाला है। पुलिस अगर सीडीआर निकाल लेती तो पता चल जाता कि हादसे के बाद डा. मनीष ने किन लोगों से बात की थी। इससे पुलिस को जांच को भी मदद मिलती।
झूठे निकले डा. मनीष के बयान
डा. मनीष रावत ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि उनका ड्राइवर मोबाइल नहीं रखता है, जबकि पुलिस की जांच में सामने आया है कि ड्राइवर सैय्यद इम्तियाज के पास मोबाइल है। उसने बरेली से नंबर भी ले रखा है। अब यह मोबाइल बंद आ रहा है। उसकी लोकेशन का पता नहीं चल पा रहा है।