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जीडीए में एक सप्ताह में शुरू हो जाएगा सीएजी ऑडिट, आदेश जारी
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 09 Apr 2017 11:05 PM IST
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जीडीए
- फोटो : अमर उजाला
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अफसरों के दो बार इनकार करने के बाद अब उन्हें जीडीए में सीएजी ऑडिट कराना ही होगा। शनिवार को प्रमुख सचिव आवास सदाकांत मिश्र ने गाजियाबाद समेत तीन विकास प्राधिकरणों में सीएजी ऑडिट कराए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश की कापी जीडीए में भी पहुंच गई है।
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माना जा रहा है कि अगले सप्ताह में जीडीए में सीएजी ऑडिट शुरू हो जाएगा।सपा के शासनकाल में राज्यपाल रामनाइक ने जीडीए में सीएजी ऑडिट कराए जाने की सिफारिश की थी। दो बार सीएजी की टीम जीडीए में पहुंची भी थी, प्रदेश सरकार के आदेश न होने का कारण बताकर ऑडिट टीम को दोनों बार बैरंग लौटा दिया गया था।
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शुक्रवार को फिर से सीएजी ऑडिट टीम जीडीए पहुंची और प्रभारी वीसी रवींद्र गोडबोले से मिली, लेकिन फिर से शासनादेश न होने का हवाला देकर लौटा दिया गया। उनका तर्क था कि शासन से आदेश जारी होने पर वह ऑडिट के लिए तैयार हैं। ऐसे में शनिवार को ही लखनऊ से सीएजी ऑडिट के आदेश जारी हो गए।
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जीडीए अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। जीडीए के अलावा कानपुर और लखनऊ प्राधिकरण में भी सीएजी की टीम ऑडिट करेंगी। माना जा रहा है कि अब जीडीए के कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जीडीए ने बीते एक दशक में कई ऐसी योजनाओं पर करोड़ों रुपया बहा दिया जो वर्तमान में काम भी नहीं आ रही हैं। ऐसे में सीएजी ऑडिट में यह मामले पकड़ में आ सकते हैं। जीडीए ने मोहन नगर चौराहे को सिग्नल फ्री बनाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन चौराहा सिग्नल फ्री नहीं हो पाया।
इसी योजना पर करीब 4.5 करोड़ रुपया नगर निगम भी खर्च कर चुका है। जीडीए के कामकाज को आनलाइन किए जाने पर भी करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए। जीडीए सूत्रों के मुताबिक कई विकास कार्यों की जगह भी परिवर्तन किया गया है।
यानी विकास कार्य दूसरी कालोनी के लिए पास किए गए और निर्माण कहीं और करा दिया गया। बीते एक दशक में जीडीए ने बिल्डरों के लिए प्रापर्टी डीलर की भूमिका निभाई है। किसानों से सस्ते दामों पर जमीन लेकर बिल्डरों को दिला दी गई।
यही नहीं नगर निगम की जमीनों का पुनर्ग्रहण कर बिल्डरों को सौंपने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। जीडीए में वर्ष 2012 में कमीशन के चक्कर में 90 करोड़ का बिजली का सामान खरीदवा दिया गया। अनियमितताओं के चक्कर में तत्कालीन फाइनेंस कंट्रोलर सस्पेंड भी किए गए थे।
इंदिरापुरम में अंडरग्राउंड बिजली केबल डालने के मामले में भी धांधली के आरोप लगे थे।पीएम मोदी ने किया था कैग ऑडिट कराने का वादाविधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीडीए को जमीनों के घोटाले की संज्ञा दी थी।
यही नहीं प्रदेश में सरकार बनने पर जीडीए समेत सभी प्राधिकरणों में सीएजी ऑडिट कराने का जनता से वादा भी किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि पहली कैबिनेट बैठक में किसानों का कर्जमाफी का वादा पूरा करने के बाद अब प्राधिकरणों में कैग ऑडिट का फैसला बड़ा है।