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फर्जी इंजीनियर बन जियो टावरों से चुराते थे बैटरी, चार गिरफ्तार-Ghaziabad city

Mon, 02 Jul 2018 05:36 PM IST
Updated Mon, 02 Jul 2018 05:36 PM IST
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फर्जी इंजीनियर बन जियो टावरों से चुराते थे बैटरी, चार गिरफ्तार-Ghaziabad city
फर्जी इंजीनियर बनकर जियो टावरों से चुराते थे बैटरी, चार गिरफ्तार
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गाजियाबाद। फर्जी इंजीनियर बनकर जियो मोबाइल टावरों से बैटरी चुराने वाले गिरोह का लोनी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गैंग के चार चोरों को गिरफ्तार कर करीब एक करोड़ कीमत की बैटरी, ई-रिक्शा और अन्य सामान बरामद किया है। इस गैंग ने गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर समेत यूपी के करीब 10 जिलों के अलावा अहमदाबाद और चंडीगढ़ से भी 20 करोड़ से ज्यादा कीमत की बैटरियां चुराई थीं। एसएसपी ने गिरोह को पकड़ने वाली टीम को 10 हजार रुपये का पुरस्कार दिया है।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि पकड़े गए गैंग को नई बस्ती लोनी का महराज ऑपरेट करता है। पेशे से ई-रिक्शा मैकेनिक महराज ई-रिक्शा और जियो मोबाइल टावर से बैटरी चोरी कराता है। चुराई गई ई-रिक्शा में नई बैटरी लगाकर किराए पर दे देते थे। महराज के साथ उसके तीन साथी शेरखान, अरशद निवासी नई बस्ती लोनी और दिलशाद निवासी घाट पांचली, मेरठ को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 102 ई-रिक्शा साबुत और पार्ट्स के रूप में मिले हैं। 39 बैटरी भी बरामद की गई हैं।
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ऐसे करते थे वारदात
एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए चोर फर्जी इंजीनियर बनकर जियो के मोबाइल टावर पर जाते थे। घरों और घेर में लगे टावरों की निगरानी खुद मकान मालिक करते हैं। वह उन्हें फोन करते थे और कहते थे कि हम यहां बैटरी ठीक करने पहुंच गए हैं, लेकिन आप अभी तक नहीं आए। अब हम बैटरी रिपेयरिंग के लिए ले जा रहे हैं। कल या शाम को वापस रख जाएंगे। वह खुद को कंपनी की ओर से भेजे गए इंजीनियर बताते थे और बैटरी ले जाते थे। एक बैटरी की कीमत करीब पौने दो लाख रुपये होती है। यह चोर हर महीने करीब दो करोड़ रुपये की बैटरी चुरा लेते थे।
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ई-रिक्शा चोरी कर बदल देते थे हुलिया
एसएचओ लोनी उमेश कुमार पांडेय ने बताया कि पकड़े गए चोर ई-रिक्शा भी चोरी करते थे और गोदाम में ले जाकर उसे काट देते थे। कई ई-रिक्शा के पार्ट्स को जोड़कर नया ई-रिक्शा बना देते थे और उसे किराए पर दे देते थे। ई-रिक्शा में जियो मोबाइल से चुराई गई बैटरी लगा दी जाती थी। दरअसल, दो साल पहले तक जो ई-रिक्शा बाजार में आती थी, उन पर इंजन और चेसिस नंबर नहीं होते थे। ऐसे में चोरी के बाद इन ई-रिक्शा की रिकवरी करना मुश्किल होता था। इसी का यह फायदा उठाते हैं। दो साल से अब इंजन और चेसिस नंबर आने लगे हैं।


यहां से चोरी कर चुके हैं मोबाइल टावर की बैटरी
मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, बड़ौत, सहारनपुर, अहमदाबाद, चंडीगढ़, आगरा, बरेली, मुरादाबाद।

कंपनी अधिकारी बोले
वर्ष 2016 से ही जियो के मोबाइल टावरों से बैटरियां चोरी होने की घटनाएं हो रही हैं। वेस्ट यूपी में ही करीब तीन हजार बैटरियां चोरी हो चुकी हैं। बीती 27 जून को लोनी में बैटरी चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने अच्छी कार्रवाई कर खुलासा किया है।
- विनोद कुमार, सिक्योरिटी हेड, वेस्ट यूपी जियो
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