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Ghaziabad News: मोती रेजीडेंसी में हो रही दूषित जल आपूर्ति, चार नमूने फेल
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- पानी में मिल रही गंदगी से हो सकती हैं कई गंभीर बीमारियां
फोटो....
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मोरटा क्षेत्र स्थित मोती रेजीडेंसी में पानी के चार नमूने फेल पाए गए हैं। पानी के टैंक में गंदगी और काई मिली है। इससे पानी में खतरनाक बैक्टीरिया भी होने की आंशका जताई गई है। जांच में सामने आया है कि सोसायटी में पानी की आपूर्ति के लिए चार ओवरहेड टैंक हैं। उनकी सफाई का कोई रिकॉर्ड मेंटेनेंस विभाग द्वारा नहीं रखा गया है। साथ ही, टैंकों की क्लोरीनेशन और वाटर फिल्ट्रेशन जैसी जरूरी प्रक्रियाएं भी नहीं की गई हैं, जिससे दूषित जल की परेशानी बढ़ी है।
जिला सर्विलांस अधिकारी व नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि दूषित पेयजल की आपूर्ति को लेकर स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए 28 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोसायटी के अलग-अलग जल स्रोतों से पानी के चार नमूने एकत्र किए थे। रिपोर्ट में सभी नमूने असंतोषजनक पाए गए हैं। इसके बाद एक अगस्त को सोसायटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर टैंकों की साफ-सफाई और अन्य सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से लोगों को डायरिया, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, पेट दर्द, उल्टी, बुखार और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि खासतौर पर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग इस स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। डॉ. रंजन ने कहा कि अगर किसी को पेट में मरोड़, लगातार दस्त, उल्टी या बुखार जैसी शिकायत हो तो इसे हल्के में न लें। यह दूषित पानी का संकेत हो सकता है, और इलाज में देर करना जानलेवा भी हो सकता है। सोसायटी प्रबंधन को चाहिए कि जल्द से जल्द टैंकों की सफाई और उचित जल शुद्धिकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
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दूषित पानी से बचाव के लिए यह करें
पानी को उबालकर पिएं।
आरओ या वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
पानी की बोतल या फिल्टर की सफाई समय-समय पर करते रहें।
यदि संभव हो तो घर में क्लोरीन टैबलेट्स का उपयोग करें।
लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मोरटा क्षेत्र स्थित मोती रेजीडेंसी में पानी के चार नमूने फेल पाए गए हैं। पानी के टैंक में गंदगी और काई मिली है। इससे पानी में खतरनाक बैक्टीरिया भी होने की आंशका जताई गई है। जांच में सामने आया है कि सोसायटी में पानी की आपूर्ति के लिए चार ओवरहेड टैंक हैं। उनकी सफाई का कोई रिकॉर्ड मेंटेनेंस विभाग द्वारा नहीं रखा गया है। साथ ही, टैंकों की क्लोरीनेशन और वाटर फिल्ट्रेशन जैसी जरूरी प्रक्रियाएं भी नहीं की गई हैं, जिससे दूषित जल की परेशानी बढ़ी है।
जिला सर्विलांस अधिकारी व नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि दूषित पेयजल की आपूर्ति को लेकर स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए 28 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोसायटी के अलग-अलग जल स्रोतों से पानी के चार नमूने एकत्र किए थे। रिपोर्ट में सभी नमूने असंतोषजनक पाए गए हैं। इसके बाद एक अगस्त को सोसायटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर टैंकों की साफ-सफाई और अन्य सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से लोगों को डायरिया, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, पेट दर्द, उल्टी, बुखार और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि खासतौर पर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग इस स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। डॉ. रंजन ने कहा कि अगर किसी को पेट में मरोड़, लगातार दस्त, उल्टी या बुखार जैसी शिकायत हो तो इसे हल्के में न लें। यह दूषित पानी का संकेत हो सकता है, और इलाज में देर करना जानलेवा भी हो सकता है। सोसायटी प्रबंधन को चाहिए कि जल्द से जल्द टैंकों की सफाई और उचित जल शुद्धिकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
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दूषित पानी से बचाव के लिए यह करें
पानी को उबालकर पिएं।
आरओ या वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
पानी की बोतल या फिल्टर की सफाई समय-समय पर करते रहें।
यदि संभव हो तो घर में क्लोरीन टैबलेट्स का उपयोग करें।
लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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