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Ghaziabad News: बोगस फर्म से खरीद कर क्लेम की 1.86 करोड़ की आईटीसी
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हापुड़। धौलाना क्षेत्र के गांव देहरा में स्क्रैप का कारोबार करने वाले फर्म संचालक ने बोगस फर्म से खरीद दर्शाकर फर्जी तरीके से 1.86 करोड़ रुपये की आईटीसी क्लेम कर ली।
फर्म पर जांच करने पहुंची जीएसटी एसआईबी टीम की जांच में खुलासा हुआ तो टीम ने विभाग के खाते में 20 लाख रुपये जमा कराकर खाता ब्लॉक कर दिया है। शेष राशि भी जमा कराने की तैयारी है।
गांव देहरा में शाहनवाज मेटल फर्म प्लास्टिक और लैड स्क्रैप का कारोबार करती है। फर्म केंद्रीय क्षेत्राधिकार में अगस्त 2025 को पंजीकृत हुई है। इसके बाद फर्म ने दिल्ली की एटीआर टेड्रर्स फर्म प्राइवेट लिमिटेड से केवल खरीद की और बिना बिक्री किए फर्जी तरीके से आईटीसी क्लेम कर ली।
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विभाग के डाटा विश्लेषण के दौरान मामला पकड़ में आया। जीएसटी एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में उपायुक्त विमल कुमार दुबे और सीटीओ सतीश तिवारी फर्म का भौतिक सत्यापन और जांच करने पहुंचे।
जांच के दौरान पता लगा कि दिल्ली की जिस फर्म से खरीद की गई है उस फर्म का पंजीयन पूर्व में ही निरस्त हो चुका है। इसके बाद फर्म संचालक ने विभाग को चूना लगाने के लिए 1.86 करोड़ रुपये की आईटीसी क्लेम कर ली।
जांच के बाद टीम के अधिकारियों ने फर्म संचालक से 20 लाख रुपये मौके पर ही विभाग के खाते में जमा कराए।
जीएसटी एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह का कहना है कि फर्म से 20 लाख रुपये मौके पर ही जमा करा लिए गए हैं। जल्द ही शेष धनराशि भी जमा कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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फर्म पर जांच करने पहुंची जीएसटी एसआईबी टीम की जांच में खुलासा हुआ तो टीम ने विभाग के खाते में 20 लाख रुपये जमा कराकर खाता ब्लॉक कर दिया है। शेष राशि भी जमा कराने की तैयारी है।
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गांव देहरा में शाहनवाज मेटल फर्म प्लास्टिक और लैड स्क्रैप का कारोबार करती है। फर्म केंद्रीय क्षेत्राधिकार में अगस्त 2025 को पंजीकृत हुई है। इसके बाद फर्म ने दिल्ली की एटीआर टेड्रर्स फर्म प्राइवेट लिमिटेड से केवल खरीद की और बिना बिक्री किए फर्जी तरीके से आईटीसी क्लेम कर ली।
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विभाग के डाटा विश्लेषण के दौरान मामला पकड़ में आया। जीएसटी एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में उपायुक्त विमल कुमार दुबे और सीटीओ सतीश तिवारी फर्म का भौतिक सत्यापन और जांच करने पहुंचे।
जांच के दौरान पता लगा कि दिल्ली की जिस फर्म से खरीद की गई है उस फर्म का पंजीयन पूर्व में ही निरस्त हो चुका है। इसके बाद फर्म संचालक ने विभाग को चूना लगाने के लिए 1.86 करोड़ रुपये की आईटीसी क्लेम कर ली।
जांच के बाद टीम के अधिकारियों ने फर्म संचालक से 20 लाख रुपये मौके पर ही विभाग के खाते में जमा कराए।
जीएसटी एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह का कहना है कि फर्म से 20 लाख रुपये मौके पर ही जमा करा लिए गए हैं। जल्द ही शेष धनराशि भी जमा कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।