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Ghaziabad News: बच्चों की कॉटन कैंडी में खतरनाक रंग, हो सकता है कैंसर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 30 Nov 2025 12:29 AM IST
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Children's cotton candy contains dangerous dyes that can cause cancer
रश्मि ओझा
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गाजियाबाद। बच्चों की पसंदीदा कॉटन कैंडी यानी बुड्ढी के बाल में खतरनाक केमिकल युक्त रंग पाए गए हैं। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हैं। इनसे कैंसर तक हो सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए सैंपल की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इसके अलावा लाल मिर्च पाउडर, चाऊमीन और समोसा-कचौरी के साथ खाई जाने वाली लाल चटनी भी असुरक्षित है। इनमें भी खतरनाक रंग पाए गए, जो कैंसरकारक हो सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने महीने भर पहले साहिबाबाद क्षेत्र से कॉटन कैंडी का सैंपल लिया था। इसे जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट दो दिन पहले आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कैंडी में जिन रंगों का इस्तेमाल किया गया, वह मानव सेवन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। सहायक आयुक्त खाद्य प्रभारी आशुतोष राय ने बताया कि इसमें सिंथेटिक रंग का इस्तेमाल किया गया था, जो मानकों के अनुरूप नहीं था। यह सेहत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है। इन दिनों शादी-पार्टी में भी कॉटन कैंडी के स्टाल लगाए जा रहे हैं। स्थानीय विक्रेता भी मानकों का पालन नहीं करते।
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उन्होंने बताया कि इसके अलावा वैशाली के चाप जंक्शन से लाल मिर्च पाउडर का सैंपल लिया गया था। इसमें प्रतिबंधित फूड कलर मिला, जिसमें सूडान-2 का इस्तेमाल होता है। इसे खाने से कैंसर तक हो सकता है। इसी क्षेत्र से लिए गए चाऊमीन के सैंपल में सिंथेटिक मेटेलिक यलो रंग पाया गया। इसके भी इस्तेमाल की अनुमति नहीं है।
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विजयनगर से लिए गए लाल चटनी के सैंपल में भी सिंथेटिक रंग पाया गया। इसका इस्तेमाल मानक से अधिक किया गया था। इसके अलावा अरहर व चने की दाल के सैंपल लिए गए थे, जिसमें कीड़े पाए गए हैं।
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यह है खतरा
सिंथेटिक रंग व सूडान-2 जैसे केमिकल शरीर में धीरे-धीरे एकत्र होते हैं और कुछ वर्षों बाद कैंसर का कारक बनते हैं। इनका अधिक मात्रा में इस्तेमाल किडनी व लीवर को खराब कर सकता है। कॉटन कैंडी में सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल अधिक होने के कारण तमिलनाडु सरकार इसकी बिक्री पर रोक लगा चुकी है।

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किसमें क्या मिला
कॉटन कैंडी- सिंथेटिक रंग मानक से अधिक
लाल चटनी- सिंथेटिक रंग मानक से अधिक
लाल मिर्च पाउडर- सिंथेटिक रंग, सूडान-2
चाऊमीन- सिंथेटिक मेटलिक यलो रंग
चना दाल- कीड़े
अरहर दाल- कीड़े
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ये हैं मानक
फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर प्रेमचंद ने बताया कि खाने-पीने की वस्तुओं में रंग का इस्तेमाल करने के कई नियम हैं। सिंथेटिक या मेटेलिक रंग तो कतई इस्तेमाल नहीं कर सकते। जिन रंगों का इस्तेमाल करना भी होता है, उनका मानक यह है कि प्रति मिलियन 100 पीडीए का इस्तेमाल कर सकते हैं। मतलब 10 हजार का 100वां भाग इस्तेमाल हो सकता है। मानकों के अनुसार टोमैटो केचअप में रंग का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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