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Ghaziabad News: पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कोर्स में होगा बदलाव, औद्योगिक जरूरतों पर फोकस
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गाजियाबाद। पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों में संचालित डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में बदलाव की तैयारी है ताकि तकनीकी शिक्षा को औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। जिन पाठ्यक्रमों की उद्योगों में मांग घट रही है, उन्हें बंद किया जा सकता है, जबकि उपयोगी पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसी नई तकनीकें शामिल की जाएंगी।
इस बदलाव के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग ने एक नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। एचबीटीयू के कुलपति प्रो. समशेर इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। समिति में शोध विकास व प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक, एआईटीडी की निदेशक समेत कई को शामिल किया गया है। यह समिति तकनीकी संस्थानों और पॉलिटेक्निक में संचालित डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की समीक्षा करेगी। समीक्षा में पाया गया है कि इनमें से करीब आधे पाठ्यक्रमों की औद्योगिक मांग लगातार घट रही है। समिति को अपनी रिपोर्ट तीन महीने में देनी है। पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य विवेक कुमार ने बताया कि तकनीकी शिक्षा को वर्तमान औद्योगिक आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। पुराने और कम मांग वाले पाठ्यक्रमों को बंद करने का प्रस्ताव है। इसके स्थान पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों को पाठ्यक्रमों में जोड़ा जाएगा। यह पहल छात्रों को भविष्य के उद्योगों के लिए तैयार करने में मदद करेगी।
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इस बदलाव के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग ने एक नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। एचबीटीयू के कुलपति प्रो. समशेर इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। समिति में शोध विकास व प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक, एआईटीडी की निदेशक समेत कई को शामिल किया गया है। यह समिति तकनीकी संस्थानों और पॉलिटेक्निक में संचालित डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की समीक्षा करेगी। समीक्षा में पाया गया है कि इनमें से करीब आधे पाठ्यक्रमों की औद्योगिक मांग लगातार घट रही है। समिति को अपनी रिपोर्ट तीन महीने में देनी है। पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य विवेक कुमार ने बताया कि तकनीकी शिक्षा को वर्तमान औद्योगिक आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। पुराने और कम मांग वाले पाठ्यक्रमों को बंद करने का प्रस्ताव है। इसके स्थान पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों को पाठ्यक्रमों में जोड़ा जाएगा। यह पहल छात्रों को भविष्य के उद्योगों के लिए तैयार करने में मदद करेगी।
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