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Ghaziabad News: सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा 35 लाख के गहने चोरी का मामला
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मोदीनगर। राज चौपला स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के लॉकर से 40 तोले साेना और 60 तोले चांदी के गहने चोरी के मामले में पुलिस और बैंक जोनल बैंक सुरक्षा टीम ने जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को एसीपी एसएचओ मोदीनगर से क्राइम ब्रांच की टीम के साथ बैंक पहुंच और बैंककर्मियों व परिवार से पूछताछ की।
इसके अलावा पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और लॉकर रिकॉर्ड रजिस्टर खंगाला। वहीं बैंक की जोनल सुरक्षा टीम ने भी ब्रांच पहुंचकर निरीक्षण कर छानबीन की। एसीपी ज्ञानप्रकाश राय ने बताया कि 173 (3 ) के तहत मामले की जांच की जा रही है। बैंककर्मियों और परिवार से पूछताछ की गई है। इसके अलावा बैंक की दो महीने की सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व लॉकर रिकॉर्ड रजिस्टर की जांच जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अंतिम बार लॉकर आपरेट के बाद लॉकर ठीक तरीके से बंद नहीं हो पाया । टीमें अन्य कई बिन्दुओं पर भी जांच कर रही है। जांच के बाद ही घटना की रिपोर्ट दर्ज होगी।
वहीं दिल्ली से बैंक ऑफ बडौदा की पांच सदस्यीय जोनल सुरक्षा टीम ने भी शाखा पहुंचकर अपने स्तर से जांच शुरू की। उन्होने लॉकर आपरेट कराने वाले अधिकारियों से क्रमवार जानकारी जुटाई। टीम अपनी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजगी।
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प्रबंधक को नहीं थी लॉकर खुला होने की जानकारी
अंकुश गोयल ने बताया कि सोमवार सुबह करीब सवा दस बजे बैंककर्मी ने उन्हें फोनकर लॉकर खुला होने की सूचना दी थी। बैंक पहुंच कर लॉकर चेक किया तो उसमें रखे करीब 35 लाख रूपये के सोने चांदी के गहने गायब थे। वह इसके बाद बैंक प्रबंधक के पास गए तो उन्हें लॉकर खुला होने की जानकारी ही नहीं थी। अंकुश ने उन्हें घटना से अगवत कराया। अंकुश का आरोप है कि बैंक में कार्यरत अस्थाई कर्मचारी लॉकर ऑपरेट करता था। इसके अलावा लॉकर ऑपरेट रिकॉर्ड रजिस्टर में भी पूरी एंट्री नहीं है। अंकुश ने बताया कि लॉकर को हमेशा उनके पिता जयकिशन गोयल ही ऑपरेट करते थे। बताया कि अंतिम बार भी पिता ने ही लॉकर ऑपरेट किया था,इसलिए जो नियमित लॉकर का इस्तेमाल करता हो वह कैसे लापरवाही कर सकता है। अंकुश ने बताया कि लॉकर में उनकी तीन पीढि़यों की जमा पूंजी थी। गहने चोरी होने से वह बरबाद हो गए है।
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लॉकर ऑपरेट करने के यह हैं प्रमुख नियम
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक शाखा और ग्राहक दोनों के लिए कई नियम तय किए है हुए है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी पवन बंसल ने बताया कि लॉकर की दो चाबी होती है। एक बैंक के पास रहती है और दूसरी ग्राहक के। बैंक की चाबी से लॉकर अनलॉक होता है और ग्राहक की चाबी से खुलता व बंद होता है। स्केल वन या उससे उच्चाधिकारी की लॉकर आपॅरेट कराने की जिम्मेदारी होती है। लॉकर को अनलॉक करने के बाद गोयनीयता के कारण अधिकारी लॉकर रूम से बाहर आ जाते है। इसके बाद ग्राहक ही लॉकर अपनी चाबी से बंद करते है। ग्राहक की चाबी से ही लॉकर बंद होता है। गोपनीयता के कारण लॉकर रूम में सीसीटीवी कैमरे नहीं होते। शाम को बैंक बंद होने से पहले जिम्मेदार अधिकारी लॉकर चेक करते है।
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प्रतिदिन बैंक बंद होने से पूर्व लॉकर चेक करने का नियम तो फिर भी दो महीने तक नहीं लगी लॉकर खुला होने की जानकारी
नियमों के अनुसार स्केल वन अधिकारी या उससे उच्चाधिकारी की लॉकर ऑपरेट कराने की जिम्मेदारी होती है। जानकारों के अनुसार जिम्मेदार अधिकारी बैंक बंद होने से पूर्व लॉकर को चेक करते है। जयकिशन गोयल ने अंतिम बार 28 अगस्त को लॉकर आपॅरेट किया था। बैंककर्मी ने उन्हें लॉकर खुला होने की जानकारी 21 अक्टूबर को दी। करीब दो महीने तक बैंक को लॉकर खुला होने की भनक ही नहीं लगी।
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यह था मामला
आदर्शनगर कालोनी निवासी ईशा गोयल का राज चौपला स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में लगभग 20 वर्ष लॉकर है। लॉकर को उनके पति अंकुश गोयल और ससुर जयकिशन गोयल ऑपरेट करते है। बीती 28 अगस्त को उनके ससुर जयकिशन ने लॉकर चेक किया था,तब लॉकर में रखा सभी सामान सुरक्षित था। सोमवार सुबह करीब सवा दस बजे उन्हें बैंक कर्मी ने लॉकर खुला होने की सूचना दी थी। परिवार ने बैंक पहुंचकर लॉकर चेक किया तो लॉकर में रखे 40 तोले सोने और करीब 50 ये 60 तोले चांदी के गहने गायब थे। गहनों की कीमत करीब 35 लाख रुपये है।
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इसके अलावा पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और लॉकर रिकॉर्ड रजिस्टर खंगाला। वहीं बैंक की जोनल सुरक्षा टीम ने भी ब्रांच पहुंचकर निरीक्षण कर छानबीन की। एसीपी ज्ञानप्रकाश राय ने बताया कि 173 (3 ) के तहत मामले की जांच की जा रही है। बैंककर्मियों और परिवार से पूछताछ की गई है। इसके अलावा बैंक की दो महीने की सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व लॉकर रिकॉर्ड रजिस्टर की जांच जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अंतिम बार लॉकर आपरेट के बाद लॉकर ठीक तरीके से बंद नहीं हो पाया । टीमें अन्य कई बिन्दुओं पर भी जांच कर रही है। जांच के बाद ही घटना की रिपोर्ट दर्ज होगी।
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वहीं दिल्ली से बैंक ऑफ बडौदा की पांच सदस्यीय जोनल सुरक्षा टीम ने भी शाखा पहुंचकर अपने स्तर से जांच शुरू की। उन्होने लॉकर आपरेट कराने वाले अधिकारियों से क्रमवार जानकारी जुटाई। टीम अपनी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजगी।
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प्रबंधक को नहीं थी लॉकर खुला होने की जानकारी
अंकुश गोयल ने बताया कि सोमवार सुबह करीब सवा दस बजे बैंककर्मी ने उन्हें फोनकर लॉकर खुला होने की सूचना दी थी। बैंक पहुंच कर लॉकर चेक किया तो उसमें रखे करीब 35 लाख रूपये के सोने चांदी के गहने गायब थे। वह इसके बाद बैंक प्रबंधक के पास गए तो उन्हें लॉकर खुला होने की जानकारी ही नहीं थी। अंकुश ने उन्हें घटना से अगवत कराया। अंकुश का आरोप है कि बैंक में कार्यरत अस्थाई कर्मचारी लॉकर ऑपरेट करता था। इसके अलावा लॉकर ऑपरेट रिकॉर्ड रजिस्टर में भी पूरी एंट्री नहीं है। अंकुश ने बताया कि लॉकर को हमेशा उनके पिता जयकिशन गोयल ही ऑपरेट करते थे। बताया कि अंतिम बार भी पिता ने ही लॉकर ऑपरेट किया था,इसलिए जो नियमित लॉकर का इस्तेमाल करता हो वह कैसे लापरवाही कर सकता है। अंकुश ने बताया कि लॉकर में उनकी तीन पीढि़यों की जमा पूंजी थी। गहने चोरी होने से वह बरबाद हो गए है।
लॉकर ऑपरेट करने के यह हैं प्रमुख नियम
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक शाखा और ग्राहक दोनों के लिए कई नियम तय किए है हुए है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी पवन बंसल ने बताया कि लॉकर की दो चाबी होती है। एक बैंक के पास रहती है और दूसरी ग्राहक के। बैंक की चाबी से लॉकर अनलॉक होता है और ग्राहक की चाबी से खुलता व बंद होता है। स्केल वन या उससे उच्चाधिकारी की लॉकर आपॅरेट कराने की जिम्मेदारी होती है। लॉकर को अनलॉक करने के बाद गोयनीयता के कारण अधिकारी लॉकर रूम से बाहर आ जाते है। इसके बाद ग्राहक ही लॉकर अपनी चाबी से बंद करते है। ग्राहक की चाबी से ही लॉकर बंद होता है। गोपनीयता के कारण लॉकर रूम में सीसीटीवी कैमरे नहीं होते। शाम को बैंक बंद होने से पहले जिम्मेदार अधिकारी लॉकर चेक करते है।
प्रतिदिन बैंक बंद होने से पूर्व लॉकर चेक करने का नियम तो फिर भी दो महीने तक नहीं लगी लॉकर खुला होने की जानकारी
नियमों के अनुसार स्केल वन अधिकारी या उससे उच्चाधिकारी की लॉकर ऑपरेट कराने की जिम्मेदारी होती है। जानकारों के अनुसार जिम्मेदार अधिकारी बैंक बंद होने से पूर्व लॉकर को चेक करते है। जयकिशन गोयल ने अंतिम बार 28 अगस्त को लॉकर आपॅरेट किया था। बैंककर्मी ने उन्हें लॉकर खुला होने की जानकारी 21 अक्टूबर को दी। करीब दो महीने तक बैंक को लॉकर खुला होने की भनक ही नहीं लगी।
यह था मामला
आदर्शनगर कालोनी निवासी ईशा गोयल का राज चौपला स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में लगभग 20 वर्ष लॉकर है। लॉकर को उनके पति अंकुश गोयल और ससुर जयकिशन गोयल ऑपरेट करते है। बीती 28 अगस्त को उनके ससुर जयकिशन ने लॉकर चेक किया था,तब लॉकर में रखा सभी सामान सुरक्षित था। सोमवार सुबह करीब सवा दस बजे उन्हें बैंक कर्मी ने लॉकर खुला होने की सूचना दी थी। परिवार ने बैंक पहुंचकर लॉकर चेक किया तो लॉकर में रखे 40 तोले सोने और करीब 50 ये 60 तोले चांदी के गहने गायब थे। गहनों की कीमत करीब 35 लाख रुपये है।