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सपने तार-तार: चार साल से ब्राजील में फंसे सिकंदराबाद के प्रो. महेश, यूनिवर्सिटी पर शोषण का आरोप, PMO से मांगी
Tue, 07 Mar 2023 03:21 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 07 Mar 2023 03:21 PM IST
सार
वेतन दिए जाने के लिए बार-बार यूनिवर्सिटी प्रशासन और उक्त प्रोफेसर से संपर्क करने पर उन्हें जून 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि आपको विज्ञापन के अनुसार 5780 का वेतन दिया जाएगा। तभी से वह कम वेतन पर काम कर रहे हैं।
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प्रोफेसर महेश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिकंदराबाद से बेहतर भविष्य का सपना लेकर ब्राजील में शिक्षा के क्षेत्र में नौकरी करने के लिए गए कोतवाली क्षेत्र के गांव नगलाकाला निवासी डॉ. महेश ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर शोषण किए जाने का आरोप लगाया है। पिछले चार सालों से वह न्याय के लिए ब्राजील में संघर्ष कर रहे हैं। अब डॉ. महेश ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। वहीं पत्नी व परिजन पिछले चार वर्ष से डॉ. महेश के घर वापस लौटने की बाट जोह रहे हैं।
क्षेत्र के गांव नगलाकाला निवासी डॉ. महेशचंद पुत्र ओमप्रकाश ने फोन पर बताया कि नई दिल्ली राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की है। पीएचडी करने के दौरान ब्राजिला फेडरेशन विश्वविद्यालय से विजिट पर आए प्रोफेसर से उनकी मुलाकात हुई।
प्रोफेसर ने उन्हें आकर्षक वेतन पर अपनी यूनिवर्सिटी में नौकरी के लिए ऑफर दिया। अप्रैल 2019 में वह यूनिवर्सिटी ऑफ ब्राजिलिया चले गए। 11 अप्रैल 2019 को उन्होंने यूनिवर्सिटी के साथ 16,199 ब्राजिलियन रियाल के वेतन के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। पांच माह तक उन्हें वेतन नहीं दिया गया।
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वेतन दिए जाने के लिए बार-बार यूनिवर्सिटी प्रशासन और उक्त प्रोफेसर से संपर्क करने पर उन्हें जून 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि आपको विज्ञापन के अनुसार 5780 ब्राजीलियन रियाल का वेतन दिया जाएगा। तभी से वह कम वेतन पर काम कर रहे हैं।
अनुबंध के अनुसार वेतन दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने भारतीय दूतावास में भी संपर्क किया। लेकिन उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में इस संबंध में अर्जी लगाई। महेशचंद ने बताया कि उन्होंने पीएमओ कार्यालय को ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई है।
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क्षेत्र के गांव नगलाकाला निवासी डॉ. महेशचंद पुत्र ओमप्रकाश ने फोन पर बताया कि नई दिल्ली राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की है। पीएचडी करने के दौरान ब्राजिला फेडरेशन विश्वविद्यालय से विजिट पर आए प्रोफेसर से उनकी मुलाकात हुई।
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प्रोफेसर ने उन्हें आकर्षक वेतन पर अपनी यूनिवर्सिटी में नौकरी के लिए ऑफर दिया। अप्रैल 2019 में वह यूनिवर्सिटी ऑफ ब्राजिलिया चले गए। 11 अप्रैल 2019 को उन्होंने यूनिवर्सिटी के साथ 16,199 ब्राजिलियन रियाल के वेतन के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। पांच माह तक उन्हें वेतन नहीं दिया गया।
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वेतन दिए जाने के लिए बार-बार यूनिवर्सिटी प्रशासन और उक्त प्रोफेसर से संपर्क करने पर उन्हें जून 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि आपको विज्ञापन के अनुसार 5780 ब्राजीलियन रियाल का वेतन दिया जाएगा। तभी से वह कम वेतन पर काम कर रहे हैं।
अनुबंध के अनुसार वेतन दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने भारतीय दूतावास में भी संपर्क किया। लेकिन उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में इस संबंध में अर्जी लगाई। महेशचंद ने बताया कि उन्होंने पीएमओ कार्यालय को ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई है।