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जहरीली हुई काली नदी, फसलों में हो रहा असर
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जहरीली हुई काली नदी, फसलों में हो रहा असर
पहासू (खुर्जा)। कभी शुद्ध और निर्मल जल के लिए विख्यात काली नदी अब जहरीली हो गई हैं। नगर के उद्योगों से निकलने वाला गंदा और केमिकलयुक्त पानी नदी को प्रभावित कर चुका है। नदी किनारे उगने वाली फसलों और सब्जियों पर इस पानी का असर हो रहा है। क्षेत्र में जहरीले पानी से उगाई जा रही सब्जी और फसल का सेवन करने से पिछले चार सालों में करीब कई लोग कैंसर रोग से पीड़ित हो चुके हैं। उनमें से कई की मौत तक हो चुकी है। इसके अलावा किडनी में संक्रमण समेत अन्य गंभीर बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं। नदियों को स्वच्छ बनाने की योजना यहां फ्लाप हो गई है।
उद्योगों के कचरे और शहर के नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। गुलावठी, अगौता, बुलंदशहर, शिकारपुर, पहासू और दानपुर आदि क्षेत्र से गुजर रही काली नदी के दोनों तरफ सब्जियों की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। इसके अलावा गन्ना, धान, गेहूं आदि की खेती भी क्षेत्र के लोग करते हैं। ऐसे में सिंचाई के लिए साफ पानी का बंदोबस्त नहीं होने से किसान पंपिंग सेट को काली नदी के किनारे स्थापित कर फसलों की सिंचाई करते हैं।
ये लोग हो चुके हैं बीमार
काली नदी के जहरीले पानी से उगाई गई फसलों, सब्जियों और फसलों का सेवन करने से अजीजाबाद निवासी छत्रपाल, श्रीपाल, राकेश, सोमदत्त, नवाब, सुशीला, सुरेश, सुरजावली गांव निवासी सत्यवती, बांकेलाल, छीतर, हरेन्द्र, भगवानी, गांव अमरपुर निवासी वीर सिंह, मुख्तयारी, हरिओम, रविन्द्र, विजयपाल, प्रेमपाल, नगला सारंगपुर निवासी सूरजपाल, बदरखा निवासी रनवीर समेत करीब एक दर्जन से ज्यादा लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। वहीं नगला बिकूपर निवासी राजपाल कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उधर पहासू कस्बा निवासी कमलेश समेत कई समेत काफी संख्या में लोग किडनी इंफेक्शन, पथरी, आंतों में संक्रमण समेत गंभीर बीमारियों ग्रसित हैं।
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काली नदी के जहरीले पानी से फसलों और सब्जियों की सिंचाई होने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में संबधित विभाग के अधिकारियों से जांच करवाई जाएगी। दूषित पानी को शुद्ध करने के लिए प्रयास किया जाएगा।
- पदम सिंह, एसडीएम शिकारपुर
दूषित पानी में आर्सेनिक और क्लोरीन, लेड की मात्रा ज्यादा होने से उससे उगाई गई फसल अथवा सब्जियों का सेवन करना खतरनाक है। इससे लीवर, किडनी, आंतों में संक्रमण, हेपटाइटस बी, हेपटाइटस सी और गुर्दा जनित बीमारियां हो जाती हैं। दूषित पानी से लीवर कैंसर, आंतों के कैंसर, स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं।
- डॉ दिनेश पाल सिंह, चिकित्सक
नदियों का पानी साफ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। 2020-21 तक काली नदी का पानी साफ कर दिया जाएगा। काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
- द्रोण कुमार, एक्सईएन सिंचाई विभाग, मेरठ मंडल
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पहासू (खुर्जा)। कभी शुद्ध और निर्मल जल के लिए विख्यात काली नदी अब जहरीली हो गई हैं। नगर के उद्योगों से निकलने वाला गंदा और केमिकलयुक्त पानी नदी को प्रभावित कर चुका है। नदी किनारे उगने वाली फसलों और सब्जियों पर इस पानी का असर हो रहा है। क्षेत्र में जहरीले पानी से उगाई जा रही सब्जी और फसल का सेवन करने से पिछले चार सालों में करीब कई लोग कैंसर रोग से पीड़ित हो चुके हैं। उनमें से कई की मौत तक हो चुकी है। इसके अलावा किडनी में संक्रमण समेत अन्य गंभीर बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं। नदियों को स्वच्छ बनाने की योजना यहां फ्लाप हो गई है।
उद्योगों के कचरे और शहर के नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। गुलावठी, अगौता, बुलंदशहर, शिकारपुर, पहासू और दानपुर आदि क्षेत्र से गुजर रही काली नदी के दोनों तरफ सब्जियों की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। इसके अलावा गन्ना, धान, गेहूं आदि की खेती भी क्षेत्र के लोग करते हैं। ऐसे में सिंचाई के लिए साफ पानी का बंदोबस्त नहीं होने से किसान पंपिंग सेट को काली नदी के किनारे स्थापित कर फसलों की सिंचाई करते हैं।
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ये लोग हो चुके हैं बीमार
काली नदी के जहरीले पानी से उगाई गई फसलों, सब्जियों और फसलों का सेवन करने से अजीजाबाद निवासी छत्रपाल, श्रीपाल, राकेश, सोमदत्त, नवाब, सुशीला, सुरेश, सुरजावली गांव निवासी सत्यवती, बांकेलाल, छीतर, हरेन्द्र, भगवानी, गांव अमरपुर निवासी वीर सिंह, मुख्तयारी, हरिओम, रविन्द्र, विजयपाल, प्रेमपाल, नगला सारंगपुर निवासी सूरजपाल, बदरखा निवासी रनवीर समेत करीब एक दर्जन से ज्यादा लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। वहीं नगला बिकूपर निवासी राजपाल कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उधर पहासू कस्बा निवासी कमलेश समेत कई समेत काफी संख्या में लोग किडनी इंफेक्शन, पथरी, आंतों में संक्रमण समेत गंभीर बीमारियों ग्रसित हैं।
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काली नदी के जहरीले पानी से फसलों और सब्जियों की सिंचाई होने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में संबधित विभाग के अधिकारियों से जांच करवाई जाएगी। दूषित पानी को शुद्ध करने के लिए प्रयास किया जाएगा।
- पदम सिंह, एसडीएम शिकारपुर
दूषित पानी में आर्सेनिक और क्लोरीन, लेड की मात्रा ज्यादा होने से उससे उगाई गई फसल अथवा सब्जियों का सेवन करना खतरनाक है। इससे लीवर, किडनी, आंतों में संक्रमण, हेपटाइटस बी, हेपटाइटस सी और गुर्दा जनित बीमारियां हो जाती हैं। दूषित पानी से लीवर कैंसर, आंतों के कैंसर, स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं।
- डॉ दिनेश पाल सिंह, चिकित्सक
नदियों का पानी साफ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। 2020-21 तक काली नदी का पानी साफ कर दिया जाएगा। काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
- द्रोण कुमार, एक्सईएन सिंचाई विभाग, मेरठ मंडल