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फ्रंटियर मेल ट्रेन में बम विस्फोट : 26 साल में 19 फीसदी की हुई गवाही

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jan 2024 12:48 AM IST
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Bomb blast in Frontier Mail train: 19 percent testified in 26 years
गाजियाबाद। फ्रंटियर मेल (गोल्डन टेंपल) ट्रेन में बम विस्फोट की घटना के 26 साल बाद भी सिर्फ 19 फीसदी गवाहों के बयान अदालत में दर्ज हो पाए हैं। 59 गवाहों में से सिर्फ 11 की गवाही पूरी हुई है, 12वें गवाह के बयान आठ जनवरी से शुरू होंगे। केस से जुड़े अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिकांश गवाह पंजाब प्रांत के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी गवाह अदालत में पेश नहीं होते हैं। मौजूदा समय में मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चार की अदालत में चल रहा है।
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मौजूदा समय में यह भी जानकारी नहीं है कि कितने गवाह अभी जीवित हैं और कितने मर चुके हैं। ट्रेन में बम विस्फोट का आरोप आतंकी अब्दुल करीम टुंडा पर है। वह भी मौजूदा समय में अजमेर की सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। अदालत में अगली सुनवाई आठ जनवरी को होनी है। इसमें अमित गोयल नामक यात्री के बयान दर्ज होने हैं, वह भी पंजाब क्षेत्र के रहने वाले हैं।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता श्याम सिंह नागर ने बताया कि वर्ष 1997 में दिल्ली से मुंबई से अमृतसर की तरफ जा रही फ्रंटियर मेल ट्रेन में साहिबाबाद स्टेशन के पास पहुंचने पर सामान्य कोच में बम विस्फोट हुआ था। इसमें एक सिपाही समेत 12 लोग घायल हो गए, जबकि एक की मौत हो गई थी। घटना का मुकदमा जीआरपी ने दर्ज करते हुए मामले की जांच की। जांच में पता चला कि बम विस्फोट की घटना को पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने अंजाम दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। मगर लंबे समय तक टुंडा को जीआरपी और पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। 16 अगस्त 2014 को दिल्ली पुलिस ने उसे भारत नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था।
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लंबे समय से नहीं पेश हो रहे गवाह
बचाव पक्ष की अधिवक्ता धर्मशिला ने बताया कि अधिकांश गवाह पुलिस ने पंजाब के यात्रियों को बनाया था। कई बार नोटिस भेजने के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होते हैं। एक गवाह को अदालत में तलब करने में ही पांच से छह महीने गुजर जाते हैं लेकिन गवाह नहीं आते हैं। इस कारण से मामले की सुनवाई भी लंबित चल रही है।
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