अशोक राणा के संघर्ष की कहानी: बेटे पर लूटा दिया सबकुछ, इच्छामृत्यु की मंजूरी मिली तो क्या बोले पड़ोसी?
सोसायटी निवासी अनिल चौहान कहते हैं कि अशोक राणा और उनका परिवार हौसले की मिसाल है। वह अक्सर उनसे मिलते हैं और हरीश के बारे में बात करते हुए भी उनकी हिम्मत दिखाई देती है।
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सुप्रीम कोर्ट से गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसायटी में रहने वाले हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी मिलने के बाद सोसायटी के लोग भावुक और निशब्द हैं। उनका कहना है कि जब इस बारे में सोशल मीडिया और फिर सोसायटी के ग्रुप के जरिये जानकारी मिली तो समझ ही नहीं आया कि क्या प्रतिक्रिया दें। लोगों का कहना है कि माता-पिता ने अपने बेटे के लिए जिस तरह वर्षों तक संघर्ष किया, वह असाधारण है। यह फैसला कितना कठिन रहा होगा, इसका दर्द वही समझ सकते हैं। इस विकट परिस्थिति में सोसायटी के लोग हरीश के पिता अशोक राणा और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।
मदद लेने से भी किया इनकार
सोसायटी निवासी तेजश चतुर्वेदी बताते हैं कि उनका अशोक राणा और उनके परिवार से करीब चार साल पुराना परिचय है। अशोक राणा जब भी मिलते हैं, हमेशा गर्मजोशी से बात करते हैं। उन्होंने कभी अपने चेहरे पर संघर्ष का दर्द जाहिर नहीं होने दिया। बेटे हरीश के लिए जो किया, वह हर किसी के बस की बात नहीं है। सोसायटी के लोगों ने उनकी मदद के लिए आगे आने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से किसी की आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया। तेजश कहते हैं कि उनके हौसले को देखकर हम सभी हैरान रह जाते हैं।
सैंडविच देकर कहते, बिटिया को दे देना
सोसायटी निवासी अनिल चौहान कहते हैं कि अशोक राणा और उनका परिवार हौसले की मिसाल है। वह अक्सर उनसे मिलते हैं और हरीश के बारे में बात करते हुए भी उनकी हिम्मत दिखाई देती है। अनिल बताते हैं कि अशोक राणा बहुत अच्छा खाना बनाते हैं। कई बार मिलते समय वह सैंडविच देकर कहते हैं कि इसे बिटिया को दे देना। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद पूरी सोसायटी उनके साथ खड़ी है और हर कदम पर उनका साथ देगी।