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Ghaziabad News: बिल्डरों से कर दिया था सेना की 23 करोड़ की जमीन का सौदा
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गाजियाबाद। विजयनगर के मिर्जापुर इलाके में जालसाजी से सेना की 23 करोड़ की जमीन बेच दिए जाने के मामले में सिहानी गेट थाना पुलिस ने मंगलवार को एक और आरोपी परवीन खान को गिरफ्तार कर लिया। उसके खाते में 47 लाख रुपये का लेनदेन मिला है। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि जमीन का सौदा बिल्डरों से किया जा चुका था। अगर ऐन वक्त पर पोल नहीं खुलती तो अब तक जमीन पर बिल्डर कब्जा ले चुके होते।
डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल का कहना है कि फिरदौस बिल्डिंग रमते राम रोड की निवासी परवीन खान ने बताया है कि जालसाजी का मास्टरमाइंड अजयवीर है। उसने मजीद के साथ संयुक्त खाता खुलवाया। अर्थला, मोहननगर निवासी मजीद ने 17 अगस्त 2022 को सेना की रायफल रेंज की 18,710 वर्ग गज जमीन का जस्सीपुरा निवासी समीर मलिक के नाम 10.50 करोड़ रुपये में बैनामा किया। रकम का लेनदेन सिर्फ कागजों में हुआ।
इसके बाद बैनामा दिखाकर कई बिल्डरों से जमीन का सौदा किया। उनसे मिले 4.35 करोड़ संयुक्त खाते में जमा हुए। इस रकम में से 47 लाख उसके खाते में ट्रांसफर किए गए। यह उसका हिस्सा था, क्योंकि इस जालसाजी में उसकी भी भूमिका है। पुलिस पूछताछ में परवीन ने खुद को मुगल वंश के शासन के दौरान सेनापति रहे गाजीउद्दीन का वंशज बताते हुए कहा कि इस जमीन का पट्टा उनके पूर्वजों ने ही जारी किया था। उसने 2016 और 2019 में उप जिलाधिकारी के दफ्तर में प्रार्थना पत्र देकर पट्टे की जमीन को उसके नाम करने की गुहार लगाई थी। जमीन उसके नाम नहीं हो सकी तो उसने अजयवीर के साथ मिलकर इसे बिल्डरों को बेचने की साजिश रची। अजयवीर की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जमीन का बैनामा निरस्त किया जा चुका है।
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28 जून को हुआ था खुलासा
प्रशासन को इस जालसाजी का पता 28 जून को तब लगा जब प्रॉपर्टी डीलर जमीन के दस्तावेज की जांच करने सदर तहसील पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को बताया कि जमीन को बिल्डर खरीदना चाहते हैं, सौदा हो चुका है। इस पर कागजात देखे गए तो पता चला कि जमीन सेना की है। इसके बाद तहसील प्रशासन ने जांच कराकर मजीद खान, समीर मलिक और बैनामे में गवाह ओमपाल और नीरज गर्ग के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। 12 जुलाई को मजीद की गिरफ्तारी होने पर पता चला कि यह खेल वकील अजयवीर ने रचा है। अजयवीर के खातों की जांच से परवीन खान का नाम सामने आया।
करा ली थी पावर ऑफ अटार्नी
अजयवीर ने मजीद से जमीन की पावर ऑफ अटार्नी (मुख्तारनामा) अपने नाम करा ली थी। वह इसे दिखाकर बिल्डरों से जमीन का सौदा कर रहा था। साथ ही बैनामा दिखाकर भी जमीन बेचने की तैयारी की जा रही थी। अजयवीर की गिरफ्तारी हो जाने के बाद इस जालसाजी में और भी खुलासे हो सकते हैं। बैनामे में बड़ी चालाकी से खसरा संख्या 529 लिखी गई। इस पर आबादी दर्ज है और कई मकान बने हैं। लेकिन, नक्शा सेना की जमीन का लगाया गया। जमीन को खाली बताया गया। इलाके में खाली जमीन सिर्फ सेना की है। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि रिकाॅर्ड देखने से पता न चले कि सेना की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।
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डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल का कहना है कि फिरदौस बिल्डिंग रमते राम रोड की निवासी परवीन खान ने बताया है कि जालसाजी का मास्टरमाइंड अजयवीर है। उसने मजीद के साथ संयुक्त खाता खुलवाया। अर्थला, मोहननगर निवासी मजीद ने 17 अगस्त 2022 को सेना की रायफल रेंज की 18,710 वर्ग गज जमीन का जस्सीपुरा निवासी समीर मलिक के नाम 10.50 करोड़ रुपये में बैनामा किया। रकम का लेनदेन सिर्फ कागजों में हुआ।
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इसके बाद बैनामा दिखाकर कई बिल्डरों से जमीन का सौदा किया। उनसे मिले 4.35 करोड़ संयुक्त खाते में जमा हुए। इस रकम में से 47 लाख उसके खाते में ट्रांसफर किए गए। यह उसका हिस्सा था, क्योंकि इस जालसाजी में उसकी भी भूमिका है। पुलिस पूछताछ में परवीन ने खुद को मुगल वंश के शासन के दौरान सेनापति रहे गाजीउद्दीन का वंशज बताते हुए कहा कि इस जमीन का पट्टा उनके पूर्वजों ने ही जारी किया था। उसने 2016 और 2019 में उप जिलाधिकारी के दफ्तर में प्रार्थना पत्र देकर पट्टे की जमीन को उसके नाम करने की गुहार लगाई थी। जमीन उसके नाम नहीं हो सकी तो उसने अजयवीर के साथ मिलकर इसे बिल्डरों को बेचने की साजिश रची। अजयवीर की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जमीन का बैनामा निरस्त किया जा चुका है।
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28 जून को हुआ था खुलासा
प्रशासन को इस जालसाजी का पता 28 जून को तब लगा जब प्रॉपर्टी डीलर जमीन के दस्तावेज की जांच करने सदर तहसील पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को बताया कि जमीन को बिल्डर खरीदना चाहते हैं, सौदा हो चुका है। इस पर कागजात देखे गए तो पता चला कि जमीन सेना की है। इसके बाद तहसील प्रशासन ने जांच कराकर मजीद खान, समीर मलिक और बैनामे में गवाह ओमपाल और नीरज गर्ग के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। 12 जुलाई को मजीद की गिरफ्तारी होने पर पता चला कि यह खेल वकील अजयवीर ने रचा है। अजयवीर के खातों की जांच से परवीन खान का नाम सामने आया।
करा ली थी पावर ऑफ अटार्नी
अजयवीर ने मजीद से जमीन की पावर ऑफ अटार्नी (मुख्तारनामा) अपने नाम करा ली थी। वह इसे दिखाकर बिल्डरों से जमीन का सौदा कर रहा था। साथ ही बैनामा दिखाकर भी जमीन बेचने की तैयारी की जा रही थी। अजयवीर की गिरफ्तारी हो जाने के बाद इस जालसाजी में और भी खुलासे हो सकते हैं। बैनामे में बड़ी चालाकी से खसरा संख्या 529 लिखी गई। इस पर आबादी दर्ज है और कई मकान बने हैं। लेकिन, नक्शा सेना की जमीन का लगाया गया। जमीन को खाली बताया गया। इलाके में खाली जमीन सिर्फ सेना की है। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि रिकाॅर्ड देखने से पता न चले कि सेना की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।