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Ghaziabad News: बयान पर अड़िग रही अफसाना अय्यूब को दिलाई मौत की सजा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2024 02:02 AM IST
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Afsana remained firm on her statement and gave death sentence to Ayub
आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। परिवार के चार लोगों के हत्यारे अय्यूब को मौत की सजा मिलने में सबसे अहम भूमिका अफसाना की रही है। कत्ल किए गए चार लोगों में उनके पति अजहरूद्दीन शामिल थे। वह अपने बयान पर अड़िग रहीं। उनका बयान भी ऐसा था जिस पर शुरू में न तो पुलिस यकीन कर रही थी और न ही परिवार के लोग। परिवार के लोग घटना को डकैती बता रहे थे, जिसे पांच-छह बदमाशों ने अंजाम दिया। एफआईआर में भी यही लिखवाया गया था। वह अकेली थीं जिन्होंने कहा था कि ये चारों खून एक ही शख्स ने किए हैं और उसका नाम अय्यूब है।
पुलिस को उनकी बात पर यकीन तब हुआ जब मौका-ए-वारदात पर मिले कमीज के बटन को देखकर उन्होंने कहा, जाइए चेक कर लीजिए, यह बटन अय्यूब की कमीज का है। उसकी कमीज देखिए, एक बटन कम मिलेगा। वह सही निकलीं। अय्यूब की कमीज के दाहिने बाजू का एक बटन गायब था। पुलिस ने अय्यूब को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर कमीज बरामद की। वह खून से सनी थी और जैसा अफसाना ने बताया था, उसका बटन गायब था। बस फिर क्या था, पुलिस को लाइन मिल गई और कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई। अय्यूब ने कुबूल किया कि उसने दस लाख रुपये के लिए परिवार के खून से अपने हाथ रंगने का गुनाह किया है। पुलिस ने 27 सितंबर 2021 को अदालत में अय्यूब के खिलाफ आरोप पत्र पेश कर दिया था।
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अफसाना कोर्ट में भी अपने बयान पर अड़िग रहीं। नतीजा सामने है। अय्यूब को फांसी की सजा सुनाई गई है। अय्यूब ने अपने ताऊ, ताई और दो तहेरे भाइयों की हत्या करने के बाद भाभी अफसाना (अजहरुद्दीन की पत्नी) पर भी गोली चलाई थी। निशाना चूक गया था। वह बच गईं थीं। कुछ लोगों ने तो उनको ही शक के घेरे में ले लिया था। उनका सवाल था कि जब पांच में से चार लोगों की हत्या कर दी गई तो वह कैसे बच गईं? लेकिन, पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी फुटेज चेक किए तो अय्यूब उनमें भागते हुए नजर आया। ये फुटेज कोर्ट के सामने भी रखे गए।
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सोते हुए लोगों की ली जान

जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आदेश त्यागी ने बताया कि लोनी थाना क्षेत्र के टोली मोहल्ले में रहने वाला रहीसुद्दीन कपड़े का कारोबारी थे। उनके छोटे भाई के लड़के अय्यूब ने रहीसुद्दीन से 10 लाख रुपये उधार मांगे थे। रहीसुद्दीन ने उधार देने से इन्कार कर दिया था। इस बात को लेकर अय्यूब रहीसुद्दीन और उसके परिवार से रंजिश मानने लगा था।
28 जून 2021 को अय्यूब अपने ताऊ रहीसुद्दीन के घर पहुंचा और खाना खाने के बाद रात में वहीं सो गया था। रात करीब ढाई से तीन बजे के बीच उसने ताऊ रईसुद्दीन, ताई फातिमा, उनके बेटे अज्जू उर्फ अजहरुद्दीन और इमरान की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद घटनास्थल से फरार हो गया था ।

पूरा परिवार खत्म किया...
कराह उठी मानवता
फैसला सुनाते वक्त न्यायधीश ने की टिप्पणी, अभियुक्त का कृत्य नृशंस प्रकृति का

गाजियाबाद। अपर जिला जज पवन कुमार ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा दोषसिद्ध अय्यूब ने खून के रिश्तों का कत्ल किया है। अभियुक्त का कृत्य अत्यंत नृशंस प्रकृति का है। इसने सोते हुए अपने सगे ताऊ रहीसुद्दीन, सगी ताई फातिमा, तहेरे भाईयों इमरान व अज्जू उर्फ अजहरूद्दीन की हत्या कर पूरे परिवार को बर्बरतापूर्वक एक के बाद एक को समाप्त कर दिया। अभियुक्त के इस कृत्य से मानवता कराह उठी। पारिवारिक व्यवस्था चरमरा गई, सामाजिक व्यवस्था बिखराव के कगार पर पहुंच गई। आपसी रिश्तों में सिर्फ शरीरों का ही नहींं, बल्कि विश्वास और आत्मीयता की भी हत्या हुई थी। ऐसे शैतान के लिए न्याय की समुचित मंशा में, इस प्रकार दण्ड दिया जाना चाहिए जोकि समाज में पनप रहे ऐसे हैवानों के अंदर भय उत्पन्न हो और समाज में न्यायिक व्यवस्था के लिए विश्वास पैदा हो। इसलिए हत्या के दोषी अयूब को तब तक फांसी पर लटकाया जाएगा, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।




मनु स्मृति का श्लोक पढ़ा

मंगलवार को फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मनु स्मृति के श्लोक का हवाला देते हुए कहा कि दण्ड शास्ति प्रजाः सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति... दण्ड सुप्तेषु जागर्ति, दण्ड धर्म विदुर्वधा इस श्लोक के अनुसार विधि द्वारा स्थापित सिद्धांतों को तोड़ने वाले को उचित दंड से दंडित किया जाना न्यायहित व समाजहित में उचित होता है। यह न्यायालय का दायित्व है कि दंड अधिरोपित करते समय, न्याय के लिए आम जनता और समाज की आवाज एवं पीड़ा को महसूस करते हुए समाज के नियमों को तोड़ने वालों को कठोर दंड से दंडित किया जाना चाहिए, जिससे न्याय के उद्देश्य की पूर्ति हो सके।
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