{"_id":"6ab8308f3efd21e9b3083268","slug":"a-drain-and-road-could-have-been-built-for-seven-lakhs-yet-eight-lakhs-were-spent-on-water-drainage-ghaziabad-news-c-30-1-gbd1037-986913-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: सात लाख में बन जाती नाली-सड़क...पानी निकासी में बहा दिए आठ लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: सात लाख में बन जाती नाली-सड़क...पानी निकासी में बहा दिए आठ लाख
विज्ञापन
रईसपुर सदरपुर रोड पर नाली का निर्माण न होने के कारण जमा पानी। संवाद
गाजियाबाद। रईसपुर में जलभराव दूर करने के नाम पर पानी के साथ सरकारी धन भी बह रहा है। जिस मार्ग पर भराव, मरम्मत और दोनों तरफ नाली बनाने का काम करीब सात लाख रुपये में हो सकता है, वहां नगर निगम 28 फरवरी 2026 से अब तक पानी निकालने में आठ लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। इसके बावजूद जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है और पानी निकासी पर खर्च अब भी जारी है।
रईसपुर गांव के मुख्य रास्ते पर आसपास बनी कॉलोनी के 200 से अधिक घरों का गंदा पानी आकर जमा होता है। लंबे समय से जलभराव के कारण पक्की सड़क टूटकर गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। यह मार्ग रईसपुर के साथ मधुबन-बापूधाम, गोविंदपुरम, बसंत कुंज, फ्रेंड्स कॉलोनी और गुलधर समेत आसपास के इलाकों की करीब 50 हजार आबादी की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है। रास्ता पानी में डूबा होने के कारण लोगों को लंबे वैकल्पिक मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। इससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही है। प्रभावित मार्ग करीब 30 मीटर चौड़ा और 120 मीटर लंबा है। पीडब्ल्यूडी ठेकेदार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत त्यागी के मुताबिक, यह सड़क करीब साढ़े तीन लाख रुपये में बन सकती है।
रास्ते में भराव और दोनों तरफ नाली का निर्माण मिलाकर काम अधिकतम सात लाख रुपये में पूरा किया जा सकता है। उनके मुताबिक इससे कम लागत में भी सड़क और नाली के काम पहले कराए गए हैं। इसके उलट नगर निगम 28 फरवरी से लगातार पानी निकासी पर खर्च कर रहा है। एक ट्रैक्टर, पंपसेट और टैंकर का रोजाना खर्च करीब 2800 रुपये बताया गया है। बारिश के दौरान जलभराव बढ़ने पर दो ट्रैक्टर-पंपसेट लगाने पड़े। करीब दो महीने तक दोनों पंपसेट चलने से खर्च दोगुना हो गया। अब भी एक ट्रैक्टर-पंपसेट लगातार पानी निकाल रहा है।
विज्ञापन
यानी जिस रास्ते का स्थायी समाधान करीब सात लाख रुपये में हो सकता है, वहां अब तक आठ लाख रुपये से अधिक सिर्फ पानी हटाने में खर्च हो चुके हैं।
विज्ञापन
रईसपुर गांव के मुख्य रास्ते पर आसपास बनी कॉलोनी के 200 से अधिक घरों का गंदा पानी आकर जमा होता है। लंबे समय से जलभराव के कारण पक्की सड़क टूटकर गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। यह मार्ग रईसपुर के साथ मधुबन-बापूधाम, गोविंदपुरम, बसंत कुंज, फ्रेंड्स कॉलोनी और गुलधर समेत आसपास के इलाकों की करीब 50 हजार आबादी की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है। रास्ता पानी में डूबा होने के कारण लोगों को लंबे वैकल्पिक मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। इससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही है। प्रभावित मार्ग करीब 30 मीटर चौड़ा और 120 मीटर लंबा है। पीडब्ल्यूडी ठेकेदार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत त्यागी के मुताबिक, यह सड़क करीब साढ़े तीन लाख रुपये में बन सकती है।
विज्ञापन
रास्ते में भराव और दोनों तरफ नाली का निर्माण मिलाकर काम अधिकतम सात लाख रुपये में पूरा किया जा सकता है। उनके मुताबिक इससे कम लागत में भी सड़क और नाली के काम पहले कराए गए हैं। इसके उलट नगर निगम 28 फरवरी से लगातार पानी निकासी पर खर्च कर रहा है। एक ट्रैक्टर, पंपसेट और टैंकर का रोजाना खर्च करीब 2800 रुपये बताया गया है। बारिश के दौरान जलभराव बढ़ने पर दो ट्रैक्टर-पंपसेट लगाने पड़े। करीब दो महीने तक दोनों पंपसेट चलने से खर्च दोगुना हो गया। अब भी एक ट्रैक्टर-पंपसेट लगातार पानी निकाल रहा है।
विज्ञापन
यानी जिस रास्ते का स्थायी समाधान करीब सात लाख रुपये में हो सकता है, वहां अब तक आठ लाख रुपये से अधिक सिर्फ पानी हटाने में खर्च हो चुके हैं।

रईसपुर सदरपुर रोड पर नाली का निर्माण न होने के कारण जमा पानी। संवाद