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पेपर खराब होने पर दसवीं की छात्रा ने आत्मदाह किया

Wed, 21 Feb 2018 10:46 PM IST
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:46 PM IST
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पेपर खराब होने पर दसवीं की छात्रा ने आत्मदाह किया
पेपर खराब होने पर दसवीं की छात्रा ने किया आत्मदाह
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बुलंदशहर।
नरसेना थाना क्षेत्र निवासी दसवीं कक्षा की छात्रा का विज्ञान का पेपर खराब होने पर उसने बुधवार सुबह आत्मदाह कर लिया। पुलिस मामले की जानकारी से इंकार कर रही है। परिजनों ने देर शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर बरवाला निवासी राजेश सिंह सीमा सुरक्षा बल में तैनात हैं। गांव में उनकी पत्नी एक पुत्र व तीन पुत्रियों के साथ रहती हैं। उनकी पुत्री अनु क्षेत्र के ही गणेश स्मारक इंटर कॉलेज में दसवीं कक्षा की छात्रा थी। मंगलवार को अनु विज्ञान का पेपर देने के लिए गई थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि पेपर खराब हो जाने के कारण अनु तनाव में थी। बुधवार सुबह अनु की मां अपने बेटे व बड़ी बेटी के साथ घेर पर पशुओं को चारा डालने गई थी। इसी दौरान अनु ने कमरा बंद कर मिट्टी का तेल अपने ऊपर उड़ेल कर आत्मदाह कर लिया। घर से धुआं उठता हुआ देख ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। काफी देर बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक छात्रा की मौत हो चुकी थी। छात्रा की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। देर शाम छात्रा का बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया गया। सीओ अन्विता उपाध्याय ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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फेल होने का डर ले गया अनु की जान

पेपर खराब होने के बाद आत्मदाह करने वाली छात्रा अनु काफी होनहार और संस्कारवान थी। ग्रामीणों के अनुसार पेपर खराब होने के बाद परिजनों ने भी उसे काफी समझाया था, लेकिन फेल होने का डर उसकी जान ले गया।
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मंगलवार को विज्ञान का पेपर खराब हो जाने के बाद दसवीं की छात्रा अनु ने बुधवार सुबह आत्मदाह कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। ग्रामीणों ने बताया कि छात्रा पेपर देने के बाद सीधे घर पहुंची। इस दौरान वह काफी तनाव में थी। परिजनों के पूछने पर उसने पेपर खराब होने की बात कही थी। उसके परिजनों ने उसे काफी समझाया-बुझाया था, लेकिन वह फेल होने के डर से बुरी तरह टूट चुकी थी। ग्रामीणों ने बताया कि 16 वर्षीय अनु काफी होनहार थी। गांव में भी उसका व्यवहार सभी से प्रिय था। बुजुर्गों का आदर करती थी। वह पेपर खराब हो जाने के बाद इस तरह अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेगी, यह किसी ने नहीं सोचा था।

मनोवैज्ञानिक डा. संध्या द्विवेदी ने कहा कि पेपर खराब हो जाने से बच्चे तनाव में होते हैं। बच्चों का डर उनसे बातचीत कर और उन्हें आगे बढ़ने की सलाह देकर दूर किया जा सकता है। परीक्षा के दौरान अभिभावकों को चाहिए कि वह पूरी तरह से बच्चों की मनोस्थिति को समझें। आज के माहौल में बच्चों पर प्रेशर बिल्कुल नहीं डालना चाहिए। इस तरह के मामलों में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो अंतर्मुखी होते हैं। किसी से कुछ नहीं कहते, ऐसे बच्चों पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
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