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अवैध निर्माण पर नपेंगे जीडीए के पांच अधिकारी
Updated Mon, 16 Apr 2018 05:36 PM IST
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अवैध निर्माण पर नपेंगे जीडीए के पांच अधिकारी
गाजियाबाद। अवैध निर्माण और करीब 800 आवंटियों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट न देने के मामले में जीडीए ने गुलमोहर ग्रीन सोसायटी से जुड़े बिल्डर विजय जिंदल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। वहीं, अवैध निर्माण पर बिल्डर के खिलाफ ठोस कार्रवाई न करने पर जीडीए से जुड़े रहे पांच अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है, जिनमें पूर्व अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा और पूर्व अधिशासी अभियंता वीकेएस सोनकर भी शामिल हैं।
डीएम एवं जीडीए वीसी रितु माहेश्वरी का कहना है कि बिल्डर ने बिना नक्शा पास कराए दो टावर खड़े करा दिए। वर्ष 2011 में बिल्डर से कंपाउंडिंग शुल्क जमा कराया गया, जिसके बाद बिल्डर को नक्शा पास कराना होता है। 2015 में फिर से जांच की गई, तो अवैध निर्माण और बढ़ा पाया गया और नक्शा भी पास नहीं मिला। तब नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन फिर से कंपाउंडिंग शुल्क जमा करा लिया गया। इसके बाद भी अवैध निर्माण जारी रहा। इस मामले में जीडीए से जुड़े पूर्व अपर सचिव, अधिशासी अभियंता से लेकर जूनियर इंजीनियरों तक की भूमिका रही। इसलिए जीडीए वीसी ने जांच के बाद शासन से सिफारिश की है कि संबंधित प्रकरण में तत्काल नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। क्योंकि अवैध निर्माण को रोकने का दायित्व इन्हीं अधिकारियों का था, जिसका निर्वाह नहीं किया गया।
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गाजियाबाद। अवैध निर्माण और करीब 800 आवंटियों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट न देने के मामले में जीडीए ने गुलमोहर ग्रीन सोसायटी से जुड़े बिल्डर विजय जिंदल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। वहीं, अवैध निर्माण पर बिल्डर के खिलाफ ठोस कार्रवाई न करने पर जीडीए से जुड़े रहे पांच अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है, जिनमें पूर्व अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा और पूर्व अधिशासी अभियंता वीकेएस सोनकर भी शामिल हैं।
डीएम एवं जीडीए वीसी रितु माहेश्वरी का कहना है कि बिल्डर ने बिना नक्शा पास कराए दो टावर खड़े करा दिए। वर्ष 2011 में बिल्डर से कंपाउंडिंग शुल्क जमा कराया गया, जिसके बाद बिल्डर को नक्शा पास कराना होता है। 2015 में फिर से जांच की गई, तो अवैध निर्माण और बढ़ा पाया गया और नक्शा भी पास नहीं मिला। तब नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन फिर से कंपाउंडिंग शुल्क जमा करा लिया गया। इसके बाद भी अवैध निर्माण जारी रहा। इस मामले में जीडीए से जुड़े पूर्व अपर सचिव, अधिशासी अभियंता से लेकर जूनियर इंजीनियरों तक की भूमिका रही। इसलिए जीडीए वीसी ने जांच के बाद शासन से सिफारिश की है कि संबंधित प्रकरण में तत्काल नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। क्योंकि अवैध निर्माण को रोकने का दायित्व इन्हीं अधिकारियों का था, जिसका निर्वाह नहीं किया गया।
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