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घर होते बच्चे तो बच जाती पुष्पा की जान

Mon, 12 Mar 2018 12:52 AM IST
Updated Mon, 12 Mar 2018 12:52 AM IST
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घर होते बच्चे तो बच जाती पुष्पा की जान
घर होते बच्चे तो बच जाती पुष्पा की जान
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गाजियाबाद। बेटी रश्मि के जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल हुई मां पुष्पा को कई घंटे देरी से इलाज मिला। करीब तीन घंटे तक वह घायल हालत में घर में अकेली पड़ी तड़पती रही। घटना के वक्त पुष्पा के तीन अन्य बच्चे स्कूल गए थे। करीब साढ़े 12 बजे वह लौटे तो उन्होंने पड़ोसियों के फोन से पिता को घटना की जानकारी दी और तब पिता ने घर पहुंच घायल पुष्पा को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक सिर में चोट लगने से बहुत खून बह चुका था।
पुष्पा के पति सतीश राणा ने बताया कि घटना के वक्त रश्मि की छोटी बहन रूबी राणा समेत तीन छोटे भाई-बहन स्कूल में परीक्षा देने गए थे। घर पर रश्मि और उसकी मां पुष्पा थीं। पुष्पा के पास अपना फोन था, लेकिन जानलेवा हमले के दौरान रश्मि ने मां से फोन भी छीन लिया। हमला कर वह मां को घायल हालत में छोड़कर चली गई। फोन न होने की वजह से पुष्पा किसी को घटना की जानकारी नहीं दे सकी। घटना का पता तब चला जब रूबी और उसके भाई-बहन परीक्षा देकर घर लौटे। मां को लहूलुहान हालत में देख उनके होश उड़ गए। मां ने रूबी को बताया कि रश्मि ने उस पर जानलेवा हमला किया है। रूबी ने पड़ोसी के फोन से अपने पिता सतीश को जानकारी दी, तब करीब आधे घंटे बाद पुष्पा को इलाज मिल पाया।
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बेटी ने ही उजाड़ दिया घर
सतीश राणा का कहना है कि जिस बेटी के होने पर उन्होंने घर में खुशी मनाई थी। उसे नाजों से पाला था, उसी ने घर उजाड़ दिया। घर में सबसे बड़ी होने की वजह से रश्मि को खूब लाड़-प्यार से पाला गया था। उनका कहना है कि पुष्पा भी उसे सबसे ज्यादा प्रेम करती थी। बावजूद इसके रश्मि में न सिर्फ मां का खून किया, बल्कि रिश्तों का भी खून कर दिया।
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एकल परिवारों मेें होती है ऐसी घटनाएं
कम उम्र में सोचने की क्षमता सीमित होती है। कोई भी बच्चा उस चीज की तरफ आकर्षित होता है, जो उसे अच्छा लगता है। कई बार ऐसी अवस्था भी हो जाती है कि वह कुछ चीजों को पाकर खुद से अलग नहीं होने देता। ऐसी चीजों को अगर उससे छीना या दूर किया जाए तो वह कोई भी बड़ा अपराध करने से गुरेज नहीं करता। एकल परिवारों में ऐसी घटनाएं ज्यादा होती हैं। ऐसे बच्चों की समय-समय पर काउंसलिंग की जानी चाहिए। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक
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