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चार सौ मरीजों को करा चुके हैं कवारन्टीन
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चार सौ मरीजों को करा चुके हैं कोरेंटीन माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण की चपेट में आने से हर कोई सशंकित हो रहा है, लोग बचाव भी कर रहे हैं। इसके बावजूद कहीं न कहीं लोग संक्रमण की चपेट में आ जाते हें तो ऐसे मरीजों की देखभाल करने और उनके परिजनों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी दिन-रात लगे हैं। कोई आइसोलेशन में भर्ती मरीजों की सेवा में लगा है तो कोई रात में संदिग्ध लोगों को सुरक्षित कोरेंटीन सेंटर तक पहुंचाने में व्यस्त है। 400 मरीजों को कोरेंटीन करा चुके हैं संजय, कई मरीज हो चुके हैं पाजिटिव टीबी विभाग में सीनियर लैब सुपरवाइजर संजय यादव मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद से नींद भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। दस दिन के भीतर वह शहर के अलग अलग क्षेत्रों से कोरोना के पचास संदिग्ध मरीजाें को एंबुलेंस में घर से लाकर एमएमजी, संयुक्त अस्पताल, संतोष अस्पताल और सुंदरदीप अस्पताल में भर्ती करवा चुके है। मार्च के आरंभ में कोरोना के मरीजों की संख्या बहुत कम थी लेकिन जैसे ही कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या पांच और संदिग्धों की संख्या सौ पर पहुंची तो 20 मार्च को संजय यादव को टीबी विभाग से मलेरिया विभाग में बनाई गई रैपिड रेस्पांस टीम से अटैच कर दिया गया। सबसे पहले उनकी डयूटी शालीमार गार्डन के पॉजिटिव मरीज को अस्पताल लाने के लिए लगाई गई। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अलावा जीडीए की टीमों के साथ समन्वय बनाते हुए संजय यादव मरीज के साथ ही उसके संपर्क में आए लोगों को भी एमएमजी ले आए। इतना ही नहीं उसके बाद सीज फायर कंपनी में कार्यरत महिला एवं उसके पति के आते ही खलबली मच गई। इनके संपर्क में आए सभी को संजय यादव द्वारा ही आइसाेलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया है। संजय बताते हैं कि उनके पास आठ एंबुलेंस हैं जो दिन-रात दौड़ रहीं हैं। जमात में भाग लेकर लौटे 276 लोगों को शहर के चार अस्पतालों में अलग-अलग जगह आइसोलेट किया जा चुका है। राजनगर एक्सटेंशन निवासी संजय मरीजों को लाने और ले जाने में पूरी सावधानी बरतते है। जरूरत पड़ने पर पीपीई किट का इस्तेमाल करते हैं। खुद सीएमओ एन के गुप्ता का कहना है कि संजय यादव के रहते उन्हे कोई टेंशन नहीं हैं। दरअसल जो मरीज अस्पताल आने के नाम पर विरोध करता है उसे पुलिस के सहयोग से संजय यादव आसानी से आइसोलेट करवा रहे हैं। जीवन में पहली बार हासिल हो रहा है इस तरह का अनुभव - अब तक 45 से अधिक मरीजों का आइसोलेशन में देखभाल कर चुकी हैं कुसुम लता कोरोना महामारी है, लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस महामारी के बीच भी यहां आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं दें। अपने कर्तव्य का पालन करना प्रत्येक प्राणी का धर्म है। यह कहना है एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में कार्यरत स्टाफ नर्स कुसुमलता का। उनका कहना है कि हमारी जिम्मेदारी है कि बीमारों की देखभाल करें। किसी भी महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग को तो अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। यदि हम नहीं तो फिर बीमारों की देखभाल कौन करेगा। कुसुम लता जिला एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों का उसी तरह से इलाज कर रही हैं, जिस तरह से सामान्य मरीजों का उपचार करती हैं। कुसुम का कहना है कि जीवन में इस तरह के अवसर कभी-कभी आते हैं। उनका कहना है कि कोरोना का संक्रमण बहुत दिन नहीं चलेगा, लेकिन यह जीवन में एक यादगार पल के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 45 लोगों की देखभाल कर चुकी हैं। -----------------