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बुलंदशहर में भी था बलराज का खौफ, डर से पीड़ित ने मांगी थी इच्छा मृत्यु

Mon, 23 Apr 2018 11:20 PM IST
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:20 PM IST
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बुलंदशहर में भी था बलराज का खौफ, डर से पीड़ित ने मांगी थी इच्छा मृत्यु
बुलंदशहर में भी था बलराज का खौफ, डर से पीड़ित ने मांगी थी इच्छा मृत्यु
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- बलराज ने 2014 में कर दी थी युवक लाला उर्फ विपिन की हत्या
- बेटे की हत्या के चश्मदीद गवाह पिता को मिल रही थी धमकियां
- सीएम, पीएम, डीएम को भेजा था पत्र, चार वर्ष से नहीं हो सकी गवाही
- पुलिस अधिकारियों ने एनकाउंटर के बाद इकलौते गवाह को फोन पर दी जानकारी
विकास वत्स
बुलंदशहर।
साहब, पुलिस बलराज का नहीं मारती तो एक दिन वह मुझे जरूर मार देता। यह कहना है बेटे की हत्या के बाद जिंदा बचे एक मात्र गवाह जयपाल सिंह का। साल 2014 में बलराज भाटी ने ही उनके बेटे विपिन उर्फ लाला की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। चार साल से इस मामले में गवाही न हो पाने पर जयपाल ने बीते सितंबर माह में मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, डीएम को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी थी। आतंक का पर्याय बन चुके बलराज भाटी का एनकाउंटर में अंत होने की सूचना मिली तो बेटे की हत्या का दर्द कुछ कम हो गया।
यूपी, हरियाणा व दिल्ली पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके गांव ढूंसरी, बुलंदशहर निवासी अपराधी बलराज भाटी का अंत सोमवार को यूपी एसटीएफ और हरियाणा पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में हो गया। बलराज ने 18 अप्रैल 2014 की सुबह बुलंदशहर की यमुनापुरम कालोनी के निकट ढूंसरी निवासी विपिन उर्फ लाला की हत्या कर दी थी। मृतक के पिता जयपाल ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी बलराज भाटी, श्यामपाल, बच्चू चंद्रपकाश व जीतपाल सहित अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था। विपिन की हत्या के एकमात्र चश्मदीद गवाह उसके पिता जयपाल(80) के मुताबिक आरोपीगण लगातार उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। चार वर्षों से उसकी गवाही भी लटकी हुई है। इसके बाद जयपाल ने सितंबर 2017 में इच्छामृत्यु की मांग की थी। उनका कहना था कि उनकी गवाही नहीं कराई जा रही तो उसकी इच्छामृत्यु की मांग को स्वीकार किया जाए। जयपाल ने फोन पर वार्ता के दौरान कहा कि उनके बेटे की हत्या करने वाले मुख्य आरोपी को मौत देकर ऊपर वाले ने उनके साथ न्याय किया है। फोन पर हुई बातचीत में जयपाल ने बताया कि दोपहर करीब एक-डेढ़ बजे पुलिस अधिकारियों ने ही उन्हें फोन कर बलराज को एनकाउंटर में ढेर करने की सूचना दी थी।
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विपिन को लगीं थीं तीन दर्जन से अधिक गोली
जयपाल ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर उनके पुत्र विपिन के शरीर में तीन दर्जन से अधिक गोलियां लगने के घाव थे। बदमाशों ने उनके बेटे पर तब तक गोलियां बरसाईं थीं, जब तक कि उसने दम नहीं तोड़ दिया। जयपाल ने बताया कि हत्या से करीब ढाई-तीन वर्ष पूर्व भी विपिन पर जानलेवा हमला किया गया था। जिसमें उसे कंधे में गोली लगी थी। उपचार के बाद वह गांव छोड़कर बुलंदशहर में रहने लगा था।
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विपिन भी था हत्या के केस का वादी
गांव ढूंसरी निवासी पप्पू उर्फ कटार और बलराज के बीच वर्ष 2004 में दुश्मनी का बीज एक पोखर के विवाद को लेकर पनपा था। इसके बाद बलराज ने कुछ वर्षों बाद ही पप्पू की हत्या कर दी थी। पप्पू की हत्या में वादी उसके सगे भाई गुलाब की हत्या भी बलराज गैंग ने पुलिस प्रोटेक्शन में गांव लौटते वक्त कर दी थी। घटना में गुलाब के गनर को भी गोली लगी थी। मामले में गुलाब के खानदानी विपिन उर्फ लाला ने गुलाब की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। गुलाब की हत्या में वादी बनना ही विपिन की हत्या का कारण बना था।
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राकेश और पवन से भी खतरा
जयपाल का कहना है कि बलराज का अंत तो हो गया, लेकिन उसके करीबी गुर्गे राकेश और पवन से उन्हें जान का खतरा है। ये दोनों अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
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