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Ghaziabad News: थैलेसीमिया के 200 मरीजों को मिल रहा है निशुल्क खून

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 08 May 2024 03:49 AM IST
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200 thalassemia patients are getting free blood
गाजियाबाद। थैलेसीमिया के 200 मरीजों को निशुल्क रक्त एमएमजी अस्पताल के ब्लड बैंक से दिया जा रहा है। यह सभी मरीज ब्लड बैंक में पंजीकृत हैं। जिले में मरीजों की जांच और इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को थैलेसीमिया के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष आठ मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि थैलेसीमिया के मरीजों के लिए निशुल्क खून की व्यवस्था है। अगर कोई संदिग्ध मरीज मिलता है तो उसे जांच के लिए दिल्ली रेफर कर दिया जाता है।
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फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जो बच्चों को मां-बाप से मिलती है। बीमारी से ग्रसित बच्चे में हीमोग्लोबिन प्रोटीन नहीं बनने से खून की कमी होने लगती है। इस कारण से लाल रुधिर कणिकाएं नष्ट होने लगती हैं, नई कणिकाएं नहीं बनने से शरीर में खून की कमी होने लगती है। जिससे दूसरी बीमारियां होने का भी खतरा हो जाता है। शादी से पहले लड़के और लड़की के स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट का मिलान किया जाना चाहिए। अगर माता और पिता में थैलेसीमिया होगा तभी बच्चों में यह बीमारी मुख्य रूप से उभरेगी। यदि माता या पिता में किसी एक में बीमारी होगी तो बच्चों में थैलीसीमिया होने के लक्षण कम होते हैं। थैलेसीमिया माइनर में कोई विशेष परेशानी नहीं होती है, सिर्फ खून की सामान्य कमी यानी एनिमिक होते हैं। कई बार उन्हें दवाओं की भी जरूरत नहीं होती है। जबकि थैलेसीमिया मेजर के 90 प्रतिशत मामलों में बच्चे युवावस्था तक भी नहीं पहुंच पाते। उन्हें हर 15 दिन या एक महीने में रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, इससे कई बार उनमें आयरन की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, बाद में उसे भी निकालना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि शादी से पहले चिकित्सकीय जांच का मिलान जरूर किया जाए।
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थैलेसीमिया के लक्षण

जन्म के छह महीने बाद ही बच्चे के नाखून और जीभ में पीलेपन की शिकायत होती है। इसका असर उसके विकास पर होता है। इससे सांस लेने में तकलीफ, थकान, पेट की सूजन, गाढ़ा मूत्र जैसी शिकायतें सामान्य लक्षण हैं।
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इस तरह से मिलती है राहत

सामान्य तौर पर इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को विटामिन, आयरन की गोलियों के साथ ही पौष्टिक आहार दिया जाता है।
बीमारी बढ़ने पर खून बदलने, बोनमैरो ट्रांसप्लांट और पित्ताशय की थैली तक निकालनी पड़ सकती है।
बीमारी से बचाव के लिए जरुरी है कि कम वसा का भोजन और हरी पत्तेदारी सब्जियों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।
मांसाहारियों के लिए मछली खाना अच्छा रहता है।
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