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धोखाधड़ी में कैशियर को सात साल की कैद
Updated Sun, 01 Jul 2018 05:52 PM IST
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धोखाधड़ी के मामले में कैशियर को सात साल की कैद
गाजियाबाद। एसीजेएम-6 की अदालत ने लोनी स्थित पंजाब नेशनल बैंक में धोखाधड़ी से करोड़ों का गमन करने के अभियुक्त बैंक कैशियर को सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। मजिस्ट्रेट विकास श्रीवास्वत की अदालत ने दोषी अभियुक्त पर एक लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
एपीओ शैली भारद्वाज ने बताया कि लोनी स्थित पीएनबी में पश्चिमांचल विद्युत निगम का चालू खाता था। इस खाते को निगम के अधिशासी अभियंता इंद्रापुरी आपरेट करते थे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 2009 से लेकर सितंबर 2012 तक इस खाते में करीब 56 लाख रुपये विद्युत निगम द्वारा जमा कराए गए थे। बैंक के कैशियर तारा सिंह ने धोखाधड़ी कर रुपयों का गबन कर लिया। हेराफेरी की शिकायत मिलने पर पीएनबी के सीनियर बैंक प्रबंधक बीएस अधिकारी ने तारा सिंह के खिलाफ अक्तूबर 2012 में थाने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच की ओर अभियुक्त को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे डासना जेल भेज दिया गया था। इस मामले में शनिवार को अंतिम सुनवाई हुई। अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर तारा सिंह को धोखाधड़ी और गबन की धाराओं में दोषी करार देते हुए सात साल की कैद और अर्थदंड लगाया।
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गाजियाबाद। एसीजेएम-6 की अदालत ने लोनी स्थित पंजाब नेशनल बैंक में धोखाधड़ी से करोड़ों का गमन करने के अभियुक्त बैंक कैशियर को सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। मजिस्ट्रेट विकास श्रीवास्वत की अदालत ने दोषी अभियुक्त पर एक लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
एपीओ शैली भारद्वाज ने बताया कि लोनी स्थित पीएनबी में पश्चिमांचल विद्युत निगम का चालू खाता था। इस खाते को निगम के अधिशासी अभियंता इंद्रापुरी आपरेट करते थे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 2009 से लेकर सितंबर 2012 तक इस खाते में करीब 56 लाख रुपये विद्युत निगम द्वारा जमा कराए गए थे। बैंक के कैशियर तारा सिंह ने धोखाधड़ी कर रुपयों का गबन कर लिया। हेराफेरी की शिकायत मिलने पर पीएनबी के सीनियर बैंक प्रबंधक बीएस अधिकारी ने तारा सिंह के खिलाफ अक्तूबर 2012 में थाने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच की ओर अभियुक्त को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे डासना जेल भेज दिया गया था। इस मामले में शनिवार को अंतिम सुनवाई हुई। अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर तारा सिंह को धोखाधड़ी और गबन की धाराओं में दोषी करार देते हुए सात साल की कैद और अर्थदंड लगाया।
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