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एओए ने की गाजियाबाद व नोएडा में संयुक्त कमिश्नरी की मांग
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एओए ने की गाजियाबाद व नोएडा में संयुक्त कमिश्नरी की मांग
साहिबाबाद। फेडरेशन ऑफ एओए ने गाजियाबाद और नोएडा में संयुक्त कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके लिए एओए अध्यक्ष ने सीएम व पुलिस निदेशक समेत गाजियाबाद व नोएडा के सभी विधायकों को पत्र भेजा है।
एओए अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि नोएडा व गाजियाबाद में संयुक्त पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू हो जाने से लोगों को अपनी समस्याओं के निपटारे के लिए मेरठ की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके साथ ही आम जनता को बढ़ते क्राइम से मुक्ति मिल सकेगी। पुलिस कमिश्नरी होने के साथ ही जिले में पुलिस संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे क्राइम पर लगाम कसी जा सके। यही नहीं कई समस्याएं मसलन अतिक्रमण लगने व हटाने एवं ट्रैफिक, जैसी समस्याओं से निजात दिलाने के लिए स्थानीय विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकेंगे। गाजियाबाद में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक की है जिसका कारण सड़कों पर अतिक्रमण है। कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम, जीडीए व पुलिस प्रशासन सब एक दूसरे के पाले में जिम्मेदारी डालती रहती है। जबकि कमिश्नरी में यह समस्या नहीं आ सकेगी और लोगों को सबसे बड़ी समस्या से निजात मिल सकेगा। कमिश्नरी व्यवस्था देश के 15 राज्यों के 70 शहरों में लागू है। आलोक कुमार ने बताया कि 19 शहर तो ऐसे हैं, जहां कमिश्नरी व्यवस्था लागू की गई है, उनकी जनसंख्या 20 लाख के करीब है जबकि गाजियाबाद की जनसंख्या 24 लाख से अधिक है। नोएडा की जनसंख्या जोड़ दें तो लगभग आधे करोड़ की आबादी हो जाएगी। ऐसे में संयुक्त पुलिस कमिश्नरी से गाजियाबाद और नोएडा दोनों शहरों में विकास की राह आसान हो सकेगी।
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साहिबाबाद। फेडरेशन ऑफ एओए ने गाजियाबाद और नोएडा में संयुक्त कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके लिए एओए अध्यक्ष ने सीएम व पुलिस निदेशक समेत गाजियाबाद व नोएडा के सभी विधायकों को पत्र भेजा है।
एओए अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि नोएडा व गाजियाबाद में संयुक्त पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू हो जाने से लोगों को अपनी समस्याओं के निपटारे के लिए मेरठ की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके साथ ही आम जनता को बढ़ते क्राइम से मुक्ति मिल सकेगी। पुलिस कमिश्नरी होने के साथ ही जिले में पुलिस संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे क्राइम पर लगाम कसी जा सके। यही नहीं कई समस्याएं मसलन अतिक्रमण लगने व हटाने एवं ट्रैफिक, जैसी समस्याओं से निजात दिलाने के लिए स्थानीय विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकेंगे। गाजियाबाद में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक की है जिसका कारण सड़कों पर अतिक्रमण है। कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम, जीडीए व पुलिस प्रशासन सब एक दूसरे के पाले में जिम्मेदारी डालती रहती है। जबकि कमिश्नरी में यह समस्या नहीं आ सकेगी और लोगों को सबसे बड़ी समस्या से निजात मिल सकेगा। कमिश्नरी व्यवस्था देश के 15 राज्यों के 70 शहरों में लागू है। आलोक कुमार ने बताया कि 19 शहर तो ऐसे हैं, जहां कमिश्नरी व्यवस्था लागू की गई है, उनकी जनसंख्या 20 लाख के करीब है जबकि गाजियाबाद की जनसंख्या 24 लाख से अधिक है। नोएडा की जनसंख्या जोड़ दें तो लगभग आधे करोड़ की आबादी हो जाएगी। ऐसे में संयुक्त पुलिस कमिश्नरी से गाजियाबाद और नोएडा दोनों शहरों में विकास की राह आसान हो सकेगी।
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