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निगम से नहीं मिली एनओसी, विद्युत लाइन बनाने का काम अटका
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निगम से नहीं मिली एनओसी, विद्युत लाइन बनाने का काम अटका
गाजियाबाद। विजयनगर जोन में निर्माणाधीन 220 केवी विद्युत सब-स्टेशन से 132 केवी डीपीएच सब-स्टेशन के बीच बनाई जाने वाली विद्युत लाइन के लिए नगर निगम से एनओसी नहीं मिल रही। पावर कॉरपोरेशन के ट्रांसमिशन विंग ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन बनाने के लिए सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन मांगी है। कई बार पत्राचार के बावजूद निगम ने अभी तक एनओसी नहीं दी है।
पावर कॉरपोरेशन के ट्रांसमिशन विंग के चीफ इंजीनियर आलोक कुमार अग्रवाल ने अब फिर से नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जमीन दिलाए जाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि प्रताप विहार में 220 केवी से 132 केवी डीपीएच सब-स्टेशन के बीच लाइन बनाने के लिए मोनोपोल बनाने की जरूरत है। इसके लिए सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन चिह्नित की गई है। उनका कहना है कि इसके अलावा कोई दूसरा वैकल्पिक रूट नहीं है। इसके लिए नगर निगम से जनवरी 2019 से अनुमति मांगी जा रही है। कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अनुमति नहीं मिल रही है। चीफ इंजीनियर ने कहा है कि अनुमति न मिलने के कारण विद्युत लाइन बनाने में देरी हो रही है। 132 केवी डीपीएच सब-स्टेशन से गाजियाबाद के कलक्ट्रेट, जीडीए, नगर निगम, सरकारी अस्पताल व अन्य सरकारी कार्यालयों को विद्युत आपूर्ति दी जाती है। ऐसे में लाइन न बन पाने की वजह से परेशानी खड़ी हो सकती है।
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गाजियाबाद। विजयनगर जोन में निर्माणाधीन 220 केवी विद्युत सब-स्टेशन से 132 केवी डीपीएच सब-स्टेशन के बीच बनाई जाने वाली विद्युत लाइन के लिए नगर निगम से एनओसी नहीं मिल रही। पावर कॉरपोरेशन के ट्रांसमिशन विंग ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन बनाने के लिए सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन मांगी है। कई बार पत्राचार के बावजूद निगम ने अभी तक एनओसी नहीं दी है।
पावर कॉरपोरेशन के ट्रांसमिशन विंग के चीफ इंजीनियर आलोक कुमार अग्रवाल ने अब फिर से नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जमीन दिलाए जाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि प्रताप विहार में 220 केवी से 132 केवी डीपीएच सब-स्टेशन के बीच लाइन बनाने के लिए मोनोपोल बनाने की जरूरत है। इसके लिए सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन चिह्नित की गई है। उनका कहना है कि इसके अलावा कोई दूसरा वैकल्पिक रूट नहीं है। इसके लिए नगर निगम से जनवरी 2019 से अनुमति मांगी जा रही है। कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अनुमति नहीं मिल रही है। चीफ इंजीनियर ने कहा है कि अनुमति न मिलने के कारण विद्युत लाइन बनाने में देरी हो रही है। 132 केवी डीपीएच सब-स्टेशन से गाजियाबाद के कलक्ट्रेट, जीडीए, नगर निगम, सरकारी अस्पताल व अन्य सरकारी कार्यालयों को विद्युत आपूर्ति दी जाती है। ऐसे में लाइन न बन पाने की वजह से परेशानी खड़ी हो सकती है।
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