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अफसरों की लापरवाही से खत्म हो गए शहर के 138 तालाब
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 19 Apr 2016 01:03 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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साल दर साल नीचे खिसकते भूजल स्तर पर सरकारी अफसर गोष्ठियां और चिंतन तो करते हैं, लेकिन योजनाओं पर काम नहीं किया जाता। अफसरों की लापरवाही से शहर के 138 तालाब खत्म हो गए। यह तालाब राजस्व रिकार्ड और नक्शे पर तो हैं, लेकिन मौके पर यहां ऊंची-ऊंची इमारतें, पार्क और फैक्ट्रियां खड़ी हो गईं।
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अफसरों ने ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए स्रोत ‘जिंदा’ नहीं छोड़े। हालात यही रहे तो डार्क जोन की सूची में शामिल गाजियाबाद में आने वाले वर्षों में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है।
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शहर में ग्राउंड वाटर लेवल औसतन 5 से 6 फीट हर साल नीचे गिर जाता है, लेकिन बीते साल करीब भूजल स्तर करीब 15 फीट नीचे खिसक गया है। इसका कारण पानी का अंधाधुंध दोहन और तालाब, पोखर, झीलों का खत्म होना माना जा रहा है।
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सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी गाजियाबाद को डार्क जोन घोषित कर यहां एक एचपी से ज्यादा बड़े बोरिंग करने पर रोक लगा चुका है। बावजूद इसके चोरी-छिपे धरती की कोख से दिन-रात पानी खींचा जा रहा है। जिला प्रशासन, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर आंखें मूंदे हुए हैं।
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अब गांवों से लाया जा रहा पानी
भूजल प्रदूषित होने और लेवल नीचे चले जाने से नगर निगम के अफसर भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अब साहिबाबाद क्षेत्र के लिए लोनी के गांवों से पानी लाया जा रहा है। निगम ने पूर्व में मोहननगर जोन की कालोनियों के लिए 17 ट्यूबवेल टीला मोड़ पर लगाए थे। अब यहां भी पानी कम हो जाने पर नगर निगम बंथला में ट्यूबवेल लगाएगा।
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इन सरकारी विभागों ने तालाबों पर किया निर्माण
आविप -06, नगर निगम - 01, सीपीडब्ल्यूडी -01, जीडीए-17, यूपीएसआईडीसी-13 और प्राइवेट लोग शहर के 110 तालाबों पर कब्जा कर चुके हैं। जीडीए ने तालाबों पर शास्त्री नगर योजना बसा दी है।