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Ghaziabad News: 6.30 करोड़ रुपये के घोटाले में छह न्यायाधीशों समेत 71 कर्मचारियों के खिलाफ दाखिल हुआ था आरोपपत्र
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कचहरी नजारत घोटाला : गवाह से बचाव पक्ष ने की जिरह
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। कचहरी के बहुचर्चित नजारत घोटाले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में गवाह सुभाष कुमार के बयान पर बचाव पक्ष ने जिरह की। गवाह के अदालत में उपस्थित होने पर उसके बयान से जुड़े बिंदुओं पर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने सवाल किए। जिरह पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए आठ सितंबर की तारीख तय की है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार करीब 6.30 करोड़ रुपये के नजारत घोटाले का खुलासा फरवरी 2008 में हुआ था। उस समय विशेष सीबीआई कोर्ट की तत्कालीन न्यायाधीश रमा जैन ने खुद वादी बनकर नाजिर आशुतोष अस्थाना समेत 63 आरोपियों के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ गई थी।
पूर्व बार अध्यक्ष नाहर सिंह यादव की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने जुलाई 2010 में छह न्यायाधीशों समेत 71 कर्मचारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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सीबीआई के आरोप के मुताबिक मामले में आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने समेत भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। घोटाले में कचहरी की नजारत से संबंधित धनराशि में अनियमितता सामने आने का आरोप है।
मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल नाजिर आशुतोष अस्थाना की डासना जेल में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी है। वर्तमान में मामले में गवाहों के बयान और बचाव पक्ष की जिरह की प्रक्रिया चल रही है।
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। कचहरी के बहुचर्चित नजारत घोटाले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में गवाह सुभाष कुमार के बयान पर बचाव पक्ष ने जिरह की। गवाह के अदालत में उपस्थित होने पर उसके बयान से जुड़े बिंदुओं पर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने सवाल किए। जिरह पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए आठ सितंबर की तारीख तय की है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार करीब 6.30 करोड़ रुपये के नजारत घोटाले का खुलासा फरवरी 2008 में हुआ था। उस समय विशेष सीबीआई कोर्ट की तत्कालीन न्यायाधीश रमा जैन ने खुद वादी बनकर नाजिर आशुतोष अस्थाना समेत 63 आरोपियों के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ गई थी।
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पूर्व बार अध्यक्ष नाहर सिंह यादव की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने जुलाई 2010 में छह न्यायाधीशों समेत 71 कर्मचारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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सीबीआई के आरोप के मुताबिक मामले में आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने समेत भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। घोटाले में कचहरी की नजारत से संबंधित धनराशि में अनियमितता सामने आने का आरोप है।
मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल नाजिर आशुतोष अस्थाना की डासना जेल में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी है। वर्तमान में मामले में गवाहों के बयान और बचाव पक्ष की जिरह की प्रक्रिया चल रही है।