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लोकसभा चुनाव तय करेगा विधायकों का कद
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लोकसभा चुनाव तय करेगा विधायकों का कद
गाजियाबाद। लोकसभा चुनाव को राजनीतिक रूप से बड़े बदलाव के तौर पर देखा रहा है। चुनाव राजनीतिक दलों से लेकर प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य तय करेगा। इसलिए सत्ता पक्ष से लेकर विपक्षी दलों की नजर चुनावों पर टिकी है। सत्ताधारी दल के लिए अपने वर्चस्व को बनाए रखने की चुनौती है तो विपक्ष के सामने अपने वजूद को खड़ा करने की। विधायकों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी सांसद पद के प्रत्याशियों के साथ दांव पर लगी है। उनकी विधान सभा में सांसद प्रत्याशी को कितने वोट मिलते हैं, उसी के आधार पर उनकी भविष्य में राजनीतिक कद तय होगा।
गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में पांच विधान सभा क्षेत्र हैं, जिसमें धौलाना आंशिक क्षेत्र भी शामिल है। धौलाना की सीट बसपा प्रत्याशी असलम चौधरी के पास है। जबकि साहिबाबाद, लोनी, गाजियाबाद शहर और मुरादनगर विधान सभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जनरल वीके सिंह को सभी विधान सभाओं में बढ़ मिली थी। माना जाता है कि लोकसभा के बाद विधान सभा में भाजपा की एक तरफा जीत के चलते ही प्रदेश सरकार में मंत्री के तौर पर विधायक अतुल गर्ग को जगह मिली। अब अगर भाजपा फिर से पुराने परिणामों को दोहराती है तो भविष्य में प्रदेश की राजनीतिक में विधायकों को कद बढ़ेगा।
साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा, लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर, मुरादनगर विधायक अजित पाल त्यागी और राज्य सरकार में खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। अगर इनकी विधान सभा में वोट बैंक छिटकता है तो उसका भविष्य में राजनीतिक रूप से नुकसान हो सकता है। खासकर साहिबाबाद सीट पर बीते चुनावों में वीके सिंह को सबसे अधिक वोट मिले थे। इसके बाद सुनील शर्मा भी बड़े अंतर से चुनाव जीत कर विधायक बने थे, जिसके बाद माना जा रहा था कि सुनील शर्मा को प्रदेश सरकार के मंत्री मंडल में जगह दी जा सकती है, हालांकि मंत्री बनने में अतुल गर्ग मार गए थे। अब सुनील शर्मा पुराने समीकरणों को दोहराते हैं तो भविष्य में बड़ा लाभ उन्हें मिल सकता है।
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उधर, गठबंधन प्रत्याशी सुरेश बंसल या फिर कांग्रेस प्रत्याशी डॉली शर्मा के पक्ष में परिणाम जाते हैं तो गाजियाबाद में राजनीतिक रूप से बड़ा बदलाव होगा। सपा गाजियाबाद की राजनीतिक में अपने आपको खड़ा कर पाएगी जो अभी तक हाशिए पर थी। वहीं, डॉली शर्मा कोई फेरबदल करने में सफल रहती है तो उससे जिले की राजनीतिक में किसी युवा महिला की एंट्री होगा तो वहीं 10 साल के बाद जिले में कांग्रेस फिर से खड़ी हो सकेगी। इसलिए मौजूदा चुनाव पार्टियों से लेकर विधायकों व कई अन्य नेताओं के भविष्य को निर्धारित करने में अहम साबित होने जा रहा है।
लोकसभा व विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिले वोट
विधानसभा 2014 लोकसभा 2017 विधान सभा
लोनी 112666 113088
मुरादनगर 157273 140759
साहिबाबाद 259452 262741
गाजियाबाद 120104 124201
धौलाना आंशिक 108618 बसपा प्रत्याशी की जीत
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गाजियाबाद। लोकसभा चुनाव को राजनीतिक रूप से बड़े बदलाव के तौर पर देखा रहा है। चुनाव राजनीतिक दलों से लेकर प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य तय करेगा। इसलिए सत्ता पक्ष से लेकर विपक्षी दलों की नजर चुनावों पर टिकी है। सत्ताधारी दल के लिए अपने वर्चस्व को बनाए रखने की चुनौती है तो विपक्ष के सामने अपने वजूद को खड़ा करने की। विधायकों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी सांसद पद के प्रत्याशियों के साथ दांव पर लगी है। उनकी विधान सभा में सांसद प्रत्याशी को कितने वोट मिलते हैं, उसी के आधार पर उनकी भविष्य में राजनीतिक कद तय होगा।
गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में पांच विधान सभा क्षेत्र हैं, जिसमें धौलाना आंशिक क्षेत्र भी शामिल है। धौलाना की सीट बसपा प्रत्याशी असलम चौधरी के पास है। जबकि साहिबाबाद, लोनी, गाजियाबाद शहर और मुरादनगर विधान सभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जनरल वीके सिंह को सभी विधान सभाओं में बढ़ मिली थी। माना जाता है कि लोकसभा के बाद विधान सभा में भाजपा की एक तरफा जीत के चलते ही प्रदेश सरकार में मंत्री के तौर पर विधायक अतुल गर्ग को जगह मिली। अब अगर भाजपा फिर से पुराने परिणामों को दोहराती है तो भविष्य में प्रदेश की राजनीतिक में विधायकों को कद बढ़ेगा।
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साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा, लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर, मुरादनगर विधायक अजित पाल त्यागी और राज्य सरकार में खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। अगर इनकी विधान सभा में वोट बैंक छिटकता है तो उसका भविष्य में राजनीतिक रूप से नुकसान हो सकता है। खासकर साहिबाबाद सीट पर बीते चुनावों में वीके सिंह को सबसे अधिक वोट मिले थे। इसके बाद सुनील शर्मा भी बड़े अंतर से चुनाव जीत कर विधायक बने थे, जिसके बाद माना जा रहा था कि सुनील शर्मा को प्रदेश सरकार के मंत्री मंडल में जगह दी जा सकती है, हालांकि मंत्री बनने में अतुल गर्ग मार गए थे। अब सुनील शर्मा पुराने समीकरणों को दोहराते हैं तो भविष्य में बड़ा लाभ उन्हें मिल सकता है।
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उधर, गठबंधन प्रत्याशी सुरेश बंसल या फिर कांग्रेस प्रत्याशी डॉली शर्मा के पक्ष में परिणाम जाते हैं तो गाजियाबाद में राजनीतिक रूप से बड़ा बदलाव होगा। सपा गाजियाबाद की राजनीतिक में अपने आपको खड़ा कर पाएगी जो अभी तक हाशिए पर थी। वहीं, डॉली शर्मा कोई फेरबदल करने में सफल रहती है तो उससे जिले की राजनीतिक में किसी युवा महिला की एंट्री होगा तो वहीं 10 साल के बाद जिले में कांग्रेस फिर से खड़ी हो सकेगी। इसलिए मौजूदा चुनाव पार्टियों से लेकर विधायकों व कई अन्य नेताओं के भविष्य को निर्धारित करने में अहम साबित होने जा रहा है।
लोकसभा व विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिले वोट
विधानसभा 2014 लोकसभा 2017 विधान सभा
लोनी 112666 113088
मुरादनगर 157273 140759
साहिबाबाद 259452 262741
गाजियाबाद 120104 124201
धौलाना आंशिक 108618 बसपा प्रत्याशी की जीत