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Ghaziabad News: सरकारी में 11 व निजी अस्पतालों में 39 बच्चों का हुआ जन्म

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jan 2024 03:30 AM IST
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11 children were born in government and 39 in private hospitals.
गाजियाबाद। अयोध्या में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर सरकारी अस्पतालों में 19 बच्चों ने जन्म लिए। इनमें से 11 लड़के और 8 लड़कियां है। निजी अस्पतालों में 39 लड़के और 22 कन्याओं का जन्म हुआ। अधिकांश माताओं ने शिशुओं का नाम राम और सीता रखा है। इनमें 11 महिलाओं ने पहले ही 22 जनवरी को प्रसव का समय लिया था। पहले से समय लेने वाली सिर्फ चार महिलाओं का सिजेरियन हुआ, जबकि आठ का प्रसव सामान्य हुआ। छह मुस्लिम महिलाओं ने लड़कों और सात ने लड़कियों को जन्म दिया। लड़कों का नाम मोहम्मद और लड़कियों का नाम आयशा, आयत और फातिमा रखा है।
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जिला महिला अस्पताल में सोमवार को 11 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें पांच लड़के और छह लड़किया हैं। लोनी संयुक्त अस्पताल में आठ बच्चों ने जन्म लिया। इनमें पांच लड़के और तीन लड़कियां हैं। डासना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो लड़के और एक लड़की पैदा हुई। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुमाता तालिब ने बताया कि सोमवार को होने वाले अधिकांश प्रसव सामान्य थे। केवल चार प्रसव सिजेरियन कराए गए। उन्होंने बताया कि 22 जनवरी को प्रसव के लिए अभिभावक लगातार डॉक्टरों से संपर्क कर रहे थे। जिन गर्भवती महिला के प्रसव में ज्यादा समय था उनका प्रसव नहीं कराया गया। जिनकी तारीख पास थी और उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी, उनका प्रसव कराया गया। महिला अस्पताल में साहिबाबाद निवासी सपना ने लड़की को जन्म दिया। विजयनगर की सोनिया, खोड़ी की ज्योति, कैला भट्ठा की नुशरत जहां, इंदिरापुरम निवासी अंजली व अर्थला निवासी अंकिता पांडेय ने बेटी को जन्म दिया। जबकि कैलाभट्ठा निवासी साहिबा ने बेटे को जन्म दिया। मोदीनगर निवासी अंशु, संजय नगर निवासी सोना, कृष्णानगर निवासी अनुराधा सहित अन्य महिलाओं ने बेटे को जन्म दिया।
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यशोदा अस्पताल में सोमवार को छह बच्चों का जन्म हुआ। यशोदा अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संगीता गोयल ने बताया कि प्रयास किया गया कि सभी का सामान्य प्रसव हो। गाजियाबाद गायनी सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. ऋतु जैन ने बताया कि पिछले लगभग एक महीने से डॉक्टरों के गर्भवती और उनके परिजन संपर्क कर रहे थे कि प्रसव तिथि 22 जनवरी हाे, जिससे कि एक संतान को लेकर एक यादगार रहे। सबसे सकारात्मक पहलू यह था कि किसी भी दंपति को किसी तरह की परेशानी नहीं थी कि उन्होंने बेटी को जन्म दिया है या बेटे को।
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बेटी चाहती थीं, बेटा पैदा हुआ
निजी अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना जिंदल ने बताया कि उनके यहां भी एक बच्चे की पहले से प्लानिंग प्रसव कराया गया। सिहानी निवासी अक्षिका का यह यह दूसरा बच्चा है। वह दूसरा बच्चा बेटी चाहते थे, लेकिन उन्हें बेटा हुआ है। उनका पहले भी एक बेटा है। डॉ. रचना ने बताया कि अक्षिका को तीन दिन से हल्का दर्द था, उनकी इच्छा थी कि 22 जनवरी को ही उनके यहां नए बच्चे का आगमन हो, इसलिए प्रयास करके सोमवार को उनका सामान्य प्रसव करवाया गया। बेटे के जन्म से दंपती और पूरा परिवार खुश है।
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