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प्रदेश में आयरन की गोलियां खरीदने का रास्ता साफ
Updated Fri, 27 Apr 2018 05:32 PM IST
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प्रदेश में आयरन की गोलियां खरीदने का रास्ता साफ
गाजियाबाद। किशोर और किशोरियों के साथ गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य रखने के लिए तमाम योजनाएं चलाने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग ने एक साल तक आयरन की गोलियां नहीं दी। गाजियाबाद ही नहीं पूरे प्रदेश का यह हाल रहा। अमर उजाला ने 26 अप्रैल के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। एनएचएम के निदेशक पंकज कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष (डीएम) और सचिव (सीएमओ) को पत्र लिखकर आयरन की गोलियां खरीदने को गाइड लाइन जारी कर दी है।
गाइड लाइन में हर जिले को गोलियां खरीदने की संख्या तक बता दी गई है। गाजियाबाद को आयरन पिंक गोलियां 15 लाख 29 हजार 465 खरीदनी है। यह गोलियां प्राइमरी स्कूलों के बालक-बालिकाओं को दी जाती हैं। इसी तरह आयरन ब्लू गोलियां 10 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को दी जाती हैं। यह गोलियां 16 लाख 10 हजार खरीदी जानी हैं। गर्भवती महिलाओं को दी जानी वाली आयरन रेड गोलियां अलग से खरीदी जानी हैं। आयरन पिंक और ब्लू गोलियां सभी जिलों की स्वास्थ्य समितियों को जनपद स्तर पर उपलब्ध अनकमिटिड अनस्पेंन्ट धनराशि से खरीदी जाएंगी। संख्या से अधिक गोलियां नहीं खरीदी जाएंगी। एनएचएम के जिला समन्वयक अनुराग भारती ने कहा कि पोर्टल पर एजेंसी देखकर आयरन की गोलियां खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी।
एक साल से नहीं खरीदी गई थीं आयरन की गोलियां
जून 2017 के बाद से एक भी आयरन की गोली ही यूपी के किसी जिले में नहीं खरीदी गई थीं। जिसकी वजह से प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में भी आयरन की गोलियां नहीं बांटी जा रही थी। गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियां नहीं मिल रही थीं। खून की कमी की वजह किशोरियां एनीमिया की शिकार हो रही हैं।
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शुक्रवार को ही आयरन की गोलियां खरीदने को गाइड लाइन आई है। अब जिला स्वास्थ्य समिति को ही आयरन की गोलियां खरीदनी हैं। जल्द ही आयरन की गोलियां खरीदने के बाद प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल के बालक -बालिकाओं को बंटवाई जाएंगी- डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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गाजियाबाद। किशोर और किशोरियों के साथ गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य रखने के लिए तमाम योजनाएं चलाने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग ने एक साल तक आयरन की गोलियां नहीं दी। गाजियाबाद ही नहीं पूरे प्रदेश का यह हाल रहा। अमर उजाला ने 26 अप्रैल के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। एनएचएम के निदेशक पंकज कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष (डीएम) और सचिव (सीएमओ) को पत्र लिखकर आयरन की गोलियां खरीदने को गाइड लाइन जारी कर दी है।
गाइड लाइन में हर जिले को गोलियां खरीदने की संख्या तक बता दी गई है। गाजियाबाद को आयरन पिंक गोलियां 15 लाख 29 हजार 465 खरीदनी है। यह गोलियां प्राइमरी स्कूलों के बालक-बालिकाओं को दी जाती हैं। इसी तरह आयरन ब्लू गोलियां 10 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को दी जाती हैं। यह गोलियां 16 लाख 10 हजार खरीदी जानी हैं। गर्भवती महिलाओं को दी जानी वाली आयरन रेड गोलियां अलग से खरीदी जानी हैं। आयरन पिंक और ब्लू गोलियां सभी जिलों की स्वास्थ्य समितियों को जनपद स्तर पर उपलब्ध अनकमिटिड अनस्पेंन्ट धनराशि से खरीदी जाएंगी। संख्या से अधिक गोलियां नहीं खरीदी जाएंगी। एनएचएम के जिला समन्वयक अनुराग भारती ने कहा कि पोर्टल पर एजेंसी देखकर आयरन की गोलियां खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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एक साल से नहीं खरीदी गई थीं आयरन की गोलियां
जून 2017 के बाद से एक भी आयरन की गोली ही यूपी के किसी जिले में नहीं खरीदी गई थीं। जिसकी वजह से प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में भी आयरन की गोलियां नहीं बांटी जा रही थी। गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियां नहीं मिल रही थीं। खून की कमी की वजह किशोरियां एनीमिया की शिकार हो रही हैं।
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शुक्रवार को ही आयरन की गोलियां खरीदने को गाइड लाइन आई है। अब जिला स्वास्थ्य समिति को ही आयरन की गोलियां खरीदनी हैं। जल्द ही आयरन की गोलियां खरीदने के बाद प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल के बालक -बालिकाओं को बंटवाई जाएंगी- डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ