जीबी रोड: जहां कोई वोट मांगने तक नहीं आता
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पूरी दिल्ली बेशक खुद पर असर डालने वाले मसलों पर वोट किया। लेकिन राजधानी के एक तबके का बटन एक बार फिर नाउम्मीदी में ही दबा। किसी भी पार्टी के पास इनके लिए कोई ठोस योजना नहीं है। अपना फर्ज निभाने के लिए यह तबका पोलिंग बूथ तक पहुंचा। बावजूद इसके कि चुनावी महायज्ञ में कोई नेता इनके पास वोट मांगने भी नहीं आया।
बात जीबी रोड की हो रही है। जहां बड़ी तादाद में देश भर की सेक्स वर्कर रहती हैं। दिल्ली के दूसरे इलाकों की तरह यहां के लोगों ने भी पूरे उत्साह से मतदान किया। जीबी रोड के निवासियों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। बड़ी दिक्कत उम्र की आखिरी दहलीज पर पहुंची सेक्स वर्कर्स के साथ है। जिनका गुजारा भी बमुश्किल हो पाता है।
सेक्स वर्कर्स के बीच काम करने वाली भारतीय पतिता उद्धार सभा की उपाध्यक्ष मुन्नी का कहना है कि सालों से वह यहां रह रही हैं। वोट भी कई बार किया है। फिर भी, समाज हमें गंदी नजर से देखता है। देश की सियासत भी हमें तवज्जो नहीं देती। अखबारों से मिलने वाली सूचनाओं से हम अपना मन बनाते हैं।
किन्नरों को भी ज्यादा आस नहीं
दूसरी तरफ किन्नरों को भले ही मतदान का अधिकार मिल गया है, कुछ शहरों की मेयर तक चुनी गईं। बावजूद इसके राजधानी के किन्नरों को सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं है। डीयू से ग्रेजुएट सीता किन्नर कहती हैं कि अच्छी सरकार बने। इसके लिए वोट भी देते हैं। लेकिन सरकारों ने हर बार हमें मायूस किया है।
जीबी रोड बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। करीब 100 कोठों में तीन हजार से ज्यादा सेक्स वर्कर्स हैं। इनमें से 60 फीसदी की उम्र 20-40 के बीच है।
जबकि 40 फीसदी की उम्र 40 साल से ज्यादा है। करीब दो हजार के पास मतदाता पहचान पत्र है। इनमें से करीब 1500 वोट देती हैं। दूसरी ओर दिल्ली में 802 किन्नर मतदाता हैं।