फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   for delhi water, supreme court notice to centre

दिल्ली को चाहिए पानी, सु्प्रीम कोर्ट हुआ सख्त

Wed, 26 Feb 2014 04:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 26 Feb 2014 04:43 PM IST
विज्ञापन
for delhi water, supreme court notice to centre

दिल्ली निवासियों को समुचित तौर पर पीने का पानी मुहैया कराने के मद्देनजर यमुना और गंगा नदी में पानी के बहाव को कायम रखने के लिए तंत्र स्थापित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

विज्ञापन


सर्वोच्च अदालत ने इस मसले पर सरकारों को निर्देश जारी करने की गुजारिश पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी जवाब तलब किया है।

चीफ जस्टिस पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अटॉर्नी जनरल और उत्तराखंड सरकार को भी जनहित याचिकाकर्ता कमांडर सुरेश्वर डी सिन्हा के आवेदन पर नोटिस जारी किया। सिन्हा ने जल्द पानी के ट्रीटमेंट प्लान बनाने के लिए अलग आदेश जारी करने की मांग भी की है।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता की अधिवक्ता सिमर सूरी ने तर्क दिया कि यह मामला गंभीरता से विचार किए जाने का है, जिस पर अदालत की ओर से कई मौकों पर निर्देश जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बावजूद दिल्ली निवासियों की पीने के साफ पानी की जरूरत पूरी नहीं हो रही। जबकि दिल्ली देश की राष्ट्रीय राजधानी है और देश भर से लोग यहां बड़ी संख्या में कामकाज के लिए रोजाना आ रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि दिल्ली के निवासियों के पीने के पानी की जरूरत को प्राथमिकता दी जाए।

यह ऐसा समय है, जबकि पड़ोसी राज्यों को साथ देकर इस समस्या से दिल्ली निवासियों को मुक्ति दिलानी चाहिए। अधिवक्ता ने जून, 2013 के उत्तराखंड आपदा का हवाला देते हुए कहा कि अदालत को इस मामले में उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन करने के संबंध में निर्देश जारी करने चाहिए।

यह समिति हिमालय से निकलने वाली नदियों पर बने मौजूदा और प्रस्तावित हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर सघन आकलन करे और भविष्य में आने वाली ऐसी आपदाओं के बारे में बचाव के उपाय सुझाएं। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही जरूरी है कि पानी की बर्बादी के संबंध में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएं। ऐसे में मुनक लिंक चैनल और ओखला, बवाना व द्वारका के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को शुरू कराया जाना चाहिए।


यह इसलिए भी जरूरी है कि न्यूनतम बहाव 352 क्यूसेक यमुना में जारी रहे। इस संबंध में अदालत ने 17 अगस्त, 1999 को आदेश जारी किया था। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए केंद्र समेत तीनों राज्य सरकारों और अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed