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अब बाहर का प्रदूषण घर में सेहत नहीं करेगा खराब, ये है रिसर्च
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 23 Sep 2018 05:07 AM IST
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Healthcare Technology
अब बाहर का प्रदूषण घर के अंदर सेहत खराब नहीं करेगा। आईआईटी दिल्ली की स्टार्टअप कंपनी ने नैनो फिल्टर पॉल्यूशन नेट तैयार की है। आईआईटी की रिसर्च टीम का दावा है कि यह नेट खिड़की या दरवाजे खुले होने पर 95 फीसदी तक पीएम 2.5 जैसे बारीक कणों को घर के अंदर नहीं आने देगी। दीवाली तक ग्राहक 100 रुपये स्कवायर फीट की दर पर ऑनलाइन मंगवा सकते हैं।
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आईआईटी दिल्ली कैंपस में शनिवार को निदेशक वी रामगोपाल राव की अध्यक्षता में मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने दूसरे इंडस्ट्री डे का उद्घाटन किया। इस मौके पर सौ से अधिक रिसर्च व स्टार्टअप कंपनी की रिसर्च को पेश किया गया। पांच थीम पर आधारित इंडस्ट्री डे में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सस्ती तकनीक को पेश किया गया है। इसके अलावा तकनीक पर आधारित कई अन्य रिसर्च भी रखी गई थीं।
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नैनो फिल्टर डॉट कॉम स्टार्टअप कंपनी व पूर्व आईआईटीयन प्रतीक व जतिन के मुताबिक, दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो चुका है। प्रदूषण के चलते लोग कई प्रकार की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसी के चलते पहले नाक पर चिपकाने वाले नैनो फिल्टर और अब नैनो फिल्टर पॉल्यूशन नेट तैयार की गई है। आईआईटी के टेक्सटाइल विभाग के प्रो. अश्विनी अग्रवाल व प्रो. मंजीत संजाल की अध्यक्षता में यह रिसर्च तैयार हुई है। नेट को तैयार करने में बेस फैब्रिक कोटिंग के साथ नैनो फाइबर का प्रयोग किया गया है। आईआईटी ने रिसर्च पेटेंट करवा ली है।
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पैडमैन की तर्ज पर स्टेंड एंड पी से टायलेट की बंदिश दूर
आईआईटी दिल्ली ने महिलाओं की घर से बाहर टायलेट करने की बड़ी दिक्कत दूर कर दी है। छात्रों ने स्टेंड एंड पी नाम की एक डिवाइस तैयार की है। टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के बीटेक छात्र अर्चित अग्रवाल व हेरी ने 18 बार डिजाइन में बदलाव किया। तीन महीने देशभर में डिजाइन पर रिसर्च हुई। स्टेंड एंड पी को आईआईटी ने पेटेंट करवा लिया है। अर्चित के मुताबिक, महिलाओं को घर से बाहर शौचालय की दिक्कत होती है। पब्लिक टायलेट प्रयोग करने से गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। इस दिक्कत को समझते हुए डिवाइस बनाई गई है। इसमें महिलाएं कभी भी खड़े होकर टायलेट कर सकती हैं।
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रेसिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल मेलबर्न में दौड़ेगा
आईआईटी के छात्रों द्वारा डिजाइन रेसिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल दिसंबर में मेलबर्न में आयोजित होने वाले फार्मूला स्टूडेंट में दौड़ेगा। शून्य से 100 कि मी की गति यह महज चार सेकेंड में पकड़ लेगा। साहिल सिंह व प्रखन महुबिया टीम हैड और हार्दिक, दीपांशु, शुभव, नीरज, लोकेश, सोनू, परिमेय, दीवांशु व मोहुल सदस्य हैं। सदस्यों ने बताया कि रेसिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल आईआईटी का तीसरा इलेक्ट्रिकल व्हीकल है।
इसमें फाइबर मिश्रित कपड़े का प्रयोग हुआ है। इसे केमिकल डालकर सख्त किया गया है। इसमें फ्रंट और रियर विंग लगे हैं, जो कि हवा के प्रेशर को नीचे की ओर धकेलते हैं। इससे गाड़ी की गति बढ़ती है। सेल्फ डिजाइन बैटरी बॉक्स, प्लैनेटरी गियर बॉक्स, आरपीएम (स्पीड, कम या ज्यादा करना) लिथियम बैटरी, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की तकनीक व डिजाइन टीम ने तैयार किया है। रेसिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल में ईंजन 98 केएमपीएच का है।
आईआईटी का स्मार्ट इलेक्ट्रिकल स्कूटर
देश में पहली बार आईआईटी स्मार्ट इलेक्ट्रिकल स्कूटर लेकर आ रहा है, जिसकी बैटरी, डिजाइन, इंजन तक आईआईटी लैब में तैयार हुआ है। स्कूटर की खास बात यह है कि एक बार बैटरी चार्ज होने के बाद 80 किलोमीटर दूरी तय करेगा। इसी महीने आईआईटी दिल्ली में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर छात्र इसका प्रयोग करेंगे। उसके बाद शहरों में किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा। आईआईटी की यह रिसर्च प्रदूषण कम करने में सहयोग देगी।
इसमें फाइबर मिश्रित कपड़े का प्रयोग हुआ है। इसे केमिकल डालकर सख्त किया गया है। इसमें फ्रंट और रियर विंग लगे हैं, जो कि हवा के प्रेशर को नीचे की ओर धकेलते हैं। इससे गाड़ी की गति बढ़ती है। सेल्फ डिजाइन बैटरी बॉक्स, प्लैनेटरी गियर बॉक्स, आरपीएम (स्पीड, कम या ज्यादा करना) लिथियम बैटरी, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की तकनीक व डिजाइन टीम ने तैयार किया है। रेसिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल में ईंजन 98 केएमपीएच का है।
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