आम आदमी पार्टी के शुरुआती दिनों से इसके साथ जुड़े रहे नेता एक-एक कर पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। हर इस्तीफे के बाद कारण आता है कि निजी कारणों से इस्तीफा दिया गया और उन्हें मनाने की कोशिश जारी है। लेकिन पार्टी बनने के इतने कम समय में पार्टी के कद्दावर नेताओं में माने जाने वाले लोगों का पार्टी छोड़ जाना आप के लिए चिंताजनक जरूर है। नेता चाहें जो भी कहें लेकिन राजनीतिक गलियारों में नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने का जो कारण बताया जा रहा है वह अलग ही है। पढ़ें क्या हैं वो 5 कारण जिसकी वजह से आम आदमी पार्टी के नेता अपने आप से पार्टी को अलग करते जा रहे हैं।
पार्टी में कुछ लोगों का एकाधिकार- यह किसी से छिपा नहीं है कि दूसरी बार दिल्ली में सरकार बनने के बाद से पार्टी लगातार कुछ लोगों के इशारों पर चल रही है। पार्टी से निकाले गए कई नेता यह बात कह चुके हैं कि केजरीवाल पार्टी में मनमानी कर रहे हैं। पार्टी के बागी नेता कपिल मिश्रा और कुमार विश्वास तो अकसर ही कहते रहे हैं कि जिस पार्टी को कार्यकर्ताओं की आवाज सुनने के लिए बनाया गया था आज वहां सिर्फ केजरीवाल की चलती है। पार्टी के अंदर इस तरह के माहौल से नेता व कार्यकर्ता बहुत खुश नहीं हैं।
3 of 6
kejriwal
- फोटो : अमर उजाला
नेताओं की आपस में नहीं बनती- पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई नेताओं की आपस में नहीं बनती। अक्सर ही एक नेता से लेकर जिम्मेदारी दूसरे को दे दी जाती है जिससे संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। इसके चलते पार्टी के अंदर का माहौल काम करने लायक नहीं रह गया और जिन्हें इन सब बातों से परेशानी होती है वह खुद को पार्टी से अलग कर लेते हैं या निष्क्रिय हो जाते हैं।
4 of 6
vijendra gupta, arvind kejriwal
नेताओं को बिना विश्वास में लिए ही हो रहे फैसले- आम आदमी पार्टी से नेताओं के जाने की एक बड़ी वजह ये है कि चंद लोग मिलकर पार्टी के अहम फैसले ले लेते हैं और पार्टी के प्रमुख नेताओं तक से राय नहीं ली जाती। जैसे किस नेता को कहां से चुनाव लड़वाना है, किसे राज्यसभा भेजना है, पंजाब में चल रही राजनीतिक उठापटक ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सिर्फ केजरीवाल या कुछ और लोग मिलकर फैसले ले लेते हैं। जो पार्टी अलग राजनीति का वादा कर सत्ता में आई थी वह भी अब अन्य पार्टियों की तरह ही हो चुकी है।
5 of 6
aap dharna
- फोटो : Vivek Nigam/Amar Ujala
नेताओं के मत का सम्मान नहीं किया जा रहा- कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी अपने नेताओं की इच्छा का खयाल भी नहीं रखती। जैसा कि आशुतोष और आशीष खेतान के केस में हुआ। आशुतोष सुशील गुप्ता के साथ राज्यसभा नहीं जाना चाहते थे तो उन्हें दरकिनार कर दिया गया। वहीं खेतान नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन पार्टी यहां से किसी पंजाबी को लड़ाना चाहती है। ऐसे ही अन्य फैसलों में भी पार्टी की मनमानी कई बार देखा गया है।