कुछ दिनों पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाले की गैस से चाय बनाने वाले एक शख्स का जिक्र किया था तो सोशल मीडिया पर जमकर इस बात का मजाक बनाया गया था। तरह-तरह के चुटकुले भी खूब वायरल हुए थे। इसकी वजह ये थी कि प्रधानमंत्री उस शख्स की पहचान नहीं बता पाए थे। सवाल तो ये भी है कि क्या सच में ऐसा संभव है कि नाले की गैस को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। तो इसका उत्तर है हां। राजधानी से सटे यूपी के एक शहर में ऐसी ही कोशिश जारी है।
दरअसल गाजियाबाद के साहिबाबाद में नाले के किनारे चाय बनाकर अपना गुजारा करने वाले रामू इन दिनों एक बड़ी मुहिम का हिस्सा बने हुए हैं। इन दिनों रामू नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाते हैं। ये गैस उन्हें पीछे बह रहे नाले से मिलती है। रामू का कहना है कि यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा तो हर महीने उनकी अच्छी खासी बचत हो जाएगी।
दरअसल साहिबाबाद के इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज के एक छात्र ने नाले से गैस निकालने की तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत छात्रों ने 200 लीटर के 5 ड्रम नाले में उल्टा करके डाले हैं। इनका काम नाले में बह रही मीथेन गैस को जमा करना है। ड्रम में भरी गैस को पाइप के जरिए जहां चूल्हा लगा हो वहां ले जाया जाता है।
पिंजड़ा कहीं इधर-उधर न हो इसके लिए उसके आसपास पिंजड़ानुमा लोहे के छड़ लगाए जाते हैं। कॉलेज के छात्रों का दावा है कि पीएम मोदी ने हाल ही में उन्हीं का जिक्र किया था। इसका कारण वो बताते हैं कि 2014 में उन्होंने इस तकनीक के जरिए एक चायवाले को गैस की सप्लाई दी थी।
कॉलेज ने बताया कि उस समय नगर निगम ने उनके प्रोजेक्ट को बंद करवा दिया था। अब उन्होंने पीएम मोदी के बयान के बाद अपना प्रोजेक्ट फिर शुरू किया है। इस तकनीक को डेवलप करने वाले अभिषेक वर्मा के अनुसार एक ड्रम वाला ये गैस सिस्टम लगाने में 5 हजार का खर्च आता है और मेंटेनेंस पर खर्च ज्यादा नहीं है।