CNG फिटनेस घोटाला: शीला समेत बड़े नाम गायब
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बहुचर्चित सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले में दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने गुरुवार को दो पूर्व आईएएस अधिकारियों सहित परिवहन विभाग के नौ अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर दिया।
आरोप पत्र में फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्व मंत्री अरविंद सिंह लवली व हारुण यूसुफ का नाम शामिल नहीं है। शिकायतकर्ता ने अदालत में दायर शिकायत में इनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। लेकिन एसीबी ने दर्ज प्राथमिकी में इनका नाम शामिल नहीं किया।
तीस हजारी अदालत स्थित विशेष जज पूनम चौधरी की अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया है। आरोप पत्र में परिवहन विभाग के पूर्व कमिश्नर आरके वर्मा, चंद्र मोहन, बुराड़ी के वाहन जांच यूनिट के पूर्व उपायुक्त जोगेंद्र शर्मा, ट्रांसपोर्ट अधिकारी एमए उस्मानी, वीके गुप्ता और अशोक गुप्ता, ईएसपी इंडिया के भारतीय डायरेक्टर नितिन मनावत, सहयोगी कंपनी टिंब्रो इंडिया के सीईओ पूरन चंद्र टमटा को आरोपी बनाया गया है।
इन सभी पर 100 करोड़ के घोटाले के आरोप
इन सभी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज बनाने, उनका प्रयोग के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने का आग्रह किया गया है।
इन सभी पर व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस के नाम पर 100 करोड़ से अधिक घोटाले का आरोप है। मामले में वर्ष 2013 में एसीबी ने मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारियां की थी।
गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विवेक गर्ग ने वर्ष 2011 में दी शिकायत में आरोप लगाया था कि वर्ष 2002 में ईएसपी इंडिया नामक कंपनी को ट्रांसपोर्ट विभाग ने बिना टेंडर जारी किए ही व्यावसायिक वाहनों के लेन टेस्ट से संबधित फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की इजाजत दे दी थी।
क्यों शामिल नहीं हुए बड़े नेताओं के नाम
कंपनी की तरफ से टेस्ट भी नहीं किए जा रहे थे। गर्ग ने अपनी शिकायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित पूर्व ट्रांसपोर्ट मंत्री अरविंदर सिंह लवली, पूर्व ट्रांसपोर्ट कमिश्नर आरके वर्मा और ईएसपी इंडिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
एसीबी ने जांच के दौरान बुराड़ी के वाहन जांच यूनिट के उपायुक्त जोगेंद्र शर्मा, ट्रांसपोर्ट अधिकारी एमए उस्मानी, वीके गुप्ता और अशोक गुप्ता समेत अन्य को गिरफ्तार कर लिया था।
शिकायतकर्ता विवेक गर्ग ने कहा कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व अन्य को बचाया गया है। उन्होंने कहा कि मैने पूरे साक्ष्यों सहित अदालत में याचिका दायर की थी और अदालत के निर्देश पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार की गई शिकायत के आधार पर प्राथमिकी में पूरे तथ्य लेने होते हैं लेकिन एसीबी ने दबाव में प्राथमिकी में शीला दीक्षित, अरविंद सिंह लवली व हारुण यूसुफ का नाम शामिल नहीं किया। इतना ही नहीं उनसे अब तक पूछताछ भी नहीं की गई। ऐसे में वे पुन: जल्द ही इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने के लिए अदालत में दस्तक देंगे।