कपिल मिश्रा का आरोप, सिसोदिया के कहने पर AAP विधायकों ने किया मुझ पर हमला
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विवादों में आए आप से निष्काषित विधायक कपिल मिश्रा को बुधवार को विधानसभा में बेहद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। सदन में बहस के दौरान आप विधायकों ने उन पर हमला कर दिया।
असल में दिल्ली सरकार ने आज जीएसटी पर एक दिन का विशेष अधिवेशन बुलाया था। इस दौरान कपिल मिश्रा ने पांच मिनट के लिए बोलने का समय मांगा था। जैसे ही वो बोलने के लिए खड़े हुए आप विधायकों ने उनका विरोध करना शुरु कर दिया।
इस दौरान कपिल मिश्रा और सदन में मौजूद विधायकों के बीच बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया। हालांकि इसके तुरंत बाद ही कपिल मिश्रा को सदन से बाहर कर दिया गया।
सदन के बाहर निकलने पर कपिल मिश्रा ने बताया कि उन पर आप विधायकों ने लात-जूतों से हमला किया जिससे उनके सीने और शरीर के अन्य अंगों पर भी चोट आई है।
कपिल का आरोप है कि जैसे ही वो बोलने के लिए उठे पांच-सात विधायकों ने उन्हें घेर लिया और उन्हें पीटना शुरु कर दिया।
#WATCH Kapil Mishra marshalled out of Delhi Assembly after a scuffle broke between him and other Aam Aadmi Party MLAs pic.twitter.com/fCprHosxhr
— ANI (@ANI_news) May 31, 2017
रामलीला मैदान में बुलाया विधानसभा का सत्र
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल को पत्र लिखकर रामलीला मैदान में जनता के बीच विधानसभा सत्र बुलाने की मांग रखी थी।
यह सत्र कालेधन, हवाला के सबूतों को जनता के बीच रखने और मुख्यमंत्री केजरीवाल से इस पर जवाब देने के लिए बुलाने को कहा गया है। कपिल ने चिट्ठी के आखिरी में इस प्रस्ताव को 31 मई को बुलाए गए विधानसभा सत्र में रखने के लिए भी समय मांगा था।
कपिल ने चिट्ठी में लिखा कि आपसे निवेदन है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनके मंत्री सतेंद्र जैन के भ्रष्टाचार में, हवाला लेन देन, कालेधन, विदेशी यात्राओं जैसे गंभीर मुद्दों पर विधानसभा के एक विशेष सत्र का आयोजन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि विधानसभा का सत्र जनता के बीच लगना चाहिए। उनका निवेदन है इन गंभीर मुद्दों पर एक विशेष सत्र रामलीला मैदान में बुलाया जाना चाहिए। कपिल ने चिट्ठी में मांग की है कि इसके लिए व्हिप की बाध्यता को भी खत्म किया जाना चाहिए।
वह इन मामलों में जनता के सामने सारे सबूत रखेंगे। उन्हें लगता है कि अगर अरविंद केजरीवाल ईमानदार हैं और सतेंद्र जैन पर भरोसा है तो वह इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लेंगे।
उस समय वोटिंग के दौरान व्हिप की बाध्यता खत्म कर दी जाए। कपिल ने केजरीवाल की किताब स्वराज का जिक्र करते हुए लिखा है कि उस किताब में भी व्हिप की आलोचना की गई है।