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गाजीपुर बाॅर्डर: सिहरन बढ़ने के साथ बढ़े बुखार, नजला और खांसी के मरीज, लेकिन हार नहीं मान रहे किसान
Tue, 15 Dec 2020 12:34 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 15 Dec 2020 12:34 AM IST
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डॉक्टरों से दवाई लेते किसान
- फोटो : amar ujala
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राजधानी में लगातार पारा गिरने के साथ ही सिहरन भी बढ़ गई है। ठंड बढ़ने के साथ ही आंदोलनकारी किसानों में सर्दी, बुखार, जुकाम और खांसी की शिकायत भी बढ़ गई है। एनजीओ, सरकार और गुरुद्वारों की ओर से बॉर्डर पर करीब सात से आठ मेडिकल कैंप लगे हुए हैं। पिछले दो दिनों से इन कैंप में अचानक मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो गया है।
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डॉक्टरों के मुताबिक हर कैंप में रोजाना अब 40 से 50 मरीज आ रहे हैं। सभी सर्दी के शिकार हैं। किसानों का कहना है कि सूरज ढलते ही यहां ठंड बढ़ जाती है। ऐसे में बिना अलाव और रजाई, गद्दों या कंबल के गुजारा नहीं हो पा रहा है।
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सरकारी एंबुलेंस-108 पर मौजूद डॉक्टर परवेज आलम और डॉक्टर विपिन ने बताया कि रविवार और सोमवार को अचानक मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। ठंड की वजह से या तो किसानों को बुखार हो गया है या उनको सर्दी खांसी है। ऐसे में उनको दवाई देने के साथ ही ठंड से बचने की सलाह भी दी जा रही है।
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एनजीओ की ओर से लगाए गए कैंप में मौजूद डॉक्टर शोभित ने बताया कि हवा चलने की वजह ज्यादा परेशानी हो रही है। ऐसे समय में लोगों को अपने घरों में ही रहना चाहिए, वहां किसान सड़कों पर बैठे हैं। एक अन्य मेडिकल कैंप में मौजूद डॉक्टर सुनील ने बताया कि सरकार को यहां भी कोविड टेस्ट कराने की सुविधा देना चाहिए। यदि भीड़ में किसानों को कोविड हुआ तो परेशानी बढ़ सकती है।
किसानों को ठंड से बचाने के लिए बादाम और मैथी के लड्डू...
दिल्ली-एनसीआर में अचानक बढ़ी ठंड के साथ ही किसानों को ठंड से बचाने के लिए बादाम, मगज, मैथी और तिल के लड्डू बांटे जा रहे हैं। लंगर सेवक ने बताया कि उनका जत्था नांदेड़, महाराष्ट्र से आया है। ठंड बढ़ी तो फौरन लंगर के सेवकों ने बादाम और अन्य मेवों से बने लड्डू बनाकर किसानों को बांटना शुरू कर दिया है। इसके अलावा किसानों की जरूरत का हर सामान उनको मुहैया करवाया जा रहा है।
सुबह से शाम तक जलेबी,पकौड़ी चाय, मैगी की रहती व्यवस्था...
गाजीपुर बॉर्डर पर धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने के साथ ही वहां लंगरों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में गाजीपुर में 20 से अधिक लंगर चल रहे हैं। यहां सुबह से लेकर शाम तक जलेबी, चाय, मैगी और खाने पीने के ज्यादातर सामान की व्यवस्था रहती है। ट्रैक्टर ट्राली और महिंद्रा पिकअप गाड़ी में सेवादार खीर, केले, संतरे, सेब और अन्य फल बांटते रहते हैं। इसके अलावा हर लंगर के बाहर चाय-बिस्कुट और खाने-पीने के अन्य सामान की व्यवस्था रहती है।
किसानों ने ट्रैक्टर पर ही लगा दी डीटीएच की डिश और सोलर पैनल...
बॉर्डर पर कई किसानों ने अपने ट्रैक्टर की ट्राली पर सोलर पैनल के अलावा मोबाइल चार्जिंग के प्वाइंट भी बनाए हुए हैं। पीलीभीत, पूरनपुर से आए जगजीत सिंह ने तो ट्रैक्टर पर अपने को अपडेट रखने के लिए डीटीएच डिश भी लगा दी है। किसान अपने ट्रैक्टर में लगी बैटरी की मदद से इंवर्टर से टीवी चला लेते हैं। सोलर पैनल से भी बैटरी चार्ज कर म्यूजिक का आनंद लिया जाता है।
बॉर्डर पर साफ-सफाई का भी रखा जा रहा ख्याल...
आंदोलन के दौरान वहां मौजूद किसान साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। भीड़ अधिक होने की वजह से खाने के पत्तल, दोने, चाय के कप व पानी की खाली बोतलों को उठाने के लिए किसान सेवक समय-समय पर झाड़ू लगाकर वहां से कूड़ा उठाते रहते हैं। हालांकि बॉर्डर पर प्रशासन की ओर से सफाई कर्मी भी तैनात किए गए हैं, लेकिन किसान अपने-अपने जत्थों के पास साफ सफाई का पूरा ध्यान रख रहे हैं।
अलग-अलग जगहों से आए सिख नौजवान किसान गदका कर लोगों का दिल बहला रहे...
गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध जहां धरना-प्रदर्शन जारी है, वहीं यहां मौजूद सिख नौजवान किसान गदका कर लोगों का दिल भी बहला रहे हैं। नौजवान किसानों का कहना था कि यह भी उनके विरोध का एक तरीका है। गदका के दौरान कुछ बच्चे लाठी व गोला चलाते हुए नजर आए। बच्चे अपने पूरे परिवार के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे थे। बच्चों की माताएं लंगर बनाने में अपनी सेवाएं दे रही थीं।