आपके फेंके हुए खाने को मजबूर है कोई, लंगर सेवादारों की अपील- 'न करें इस रोटी का अपमान'
- लंगर सेवादार बार-बार कर रहे अपील- जितना खा सकें उतना ही लें,
- भोजन बर्बाद न हो, इसका पूरा रखते हैं ख्याल, लेकिन लोगों की नासमझी से खराब हो जाती हैं रोटियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूरे देश का किसान जिस रोटी के लिए आज सड़कों पर है, कुछ लोगों की नासमझी के कारण किसानों के आंदोलन में उसी रोटी का 'अपमान' हो रहा है। आंदोलन में आने वालों की भूख मिटाने के लिए दिन-रात 'गुरु का लंगर' चल रहा है। लेकिन कुछ लोग गुरु का लंगर छकते समय ज्यादा मात्रा में रोटियां ले लेते हैं और न खा सकने पर उसे फेंक देते हैं। धरना स्थल के आसपास की झुग्गियों में रहने वाले मजदूरों के बच्चे इन रोटियों को उठा लेते हैं जिसे वे बाद में अपने परिवार वालों के साथ खाते हैं। सड़कों से रोटियां उठाते बच्चों की तस्वीरें किसी भी संवेदनशील इंसान को परेशान कर सकती हैं।
एक लंगर के सेवादार ने बताया कि भोजन में रोटी का अपमान न हो, इसके लिए वे पूरी कोशिश करते हैं। बिना मांगे वे किसी को भी रोटी नहीं देते हैं। उतनी ही रोटियां परोसी जाती हैं जितना कि वह मांगता है। लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग नासमझी में ज्यादा रोटी ले लेते हैं, जिसे न खा पाने या पसंद न आने पर फेंक देते हैं। यह रोटी का ही नहीं, लंगर की पवित्र धार्मिक भावना का भी अपमान है। लोगों को इससे बचना चाहिए और उतना ही भोजन प्रसाद लेना चाहिए जितना कि उन्हें आवश्यकता हो।
सेवादार के मुताबिक लंगरों में झुग्गियों के बच्चों को भी भोजन दिया जा रहा है और प्रतिदिन भारी संख्या में बच्चे या महिलाएं आकर भोजन ग्रहण करती हैं। लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों के लिए वे आसपास पड़ी रोटियों को भी उठा लेते हैं।
केवल एक लंगर में बन रही पांच हजार से ज्यादा रोटियां
किसानों के लिए लंगर में रोटी बना रहे सेवादार सुखप्रीत सिंह ने अमर उजाला को बताया कि अकेले उनके लंगर में रोजाना पांच हजार के आसपास रोटियां बन रही हैं। रोटी मशीनों से बनाई जाती हैं। इसके लिए बारी-बारी से सेवादारों की ड्यूटी लगाई जा रही है। स्वेच्छा से सेवा करने वाले सेवादार भी आकर रोटी बनाने में मदद कर रहे हैं।
गाजियाबाद-दिल्ली के यूपी बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान दिन-रात डटे हुए हैं। इनकी भूख मिटाने के लिए यहां दर्जनों लंगर दिन-रात लोगों की सेवा कर रहे हैं। कई बार पड़ोसी गांवों से किसान तैयार भोजन लेकर भी यहां आ जाते हैं और लोगों को खिलाते हैं। इसमें सबसे ज्यादा बिरयानी, चावल-कढ़ी, चावल-राजमा, मीठा चावल या नाश्ते की चीजें शामिल होती हैं।
10 सफाई कर्मचारी भी ड्यूटी पर
गाजियाबाद नगर निगम की तरफ से यूपी बॉर्डर पर गंदगी को उठाने के लिए 10 सफाई कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। रात के समय भी यहां तीन सफाई कर्मी तैनात रहते हैं। नगर निगम की गा़ड़ी दिन में न्यूनतम दो बार और आवश्यकता पड़ने पर बुलाने पर आ जाती है और प्रतिदिन यहां का कूड़ा हटा दिया जाता है।