प्रदर्शन में शामिल किसान बोले- मांगे नहीं मानी तो सरकार का तंबू उखाड़ कर जाएंगे
- किसान नेताओं ने कहा, सरकार दिखा रही अड़ियल रवैया, किसानों से समर्थन की बात कर लोगों को भ्रमित करने की हो रही कोशिश
- किसानों की चेतावनी, यूपीए सरकार की तरह आंदोलन को चंद लोगों का विरोध प्रदर्शन समझने की भूल न करे सरकार
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हम किसान हैं। केवल यह एक शब्द ही हमारी परेशानियों को बयान करने के लिए काफी है। जिस भयानक ठंड में सरकार रजाई तानकर 'सो' रही है, और हमारी बातों पर ध्यान नहीं दे रही है, उस भयानक ठंड में हम खेतों में पानी भरते हैं और खेती के तमाम कामकाज करते हैं। अगर सरकार समझती है कि हमारे यहां 'पड़े' रहने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता तो उसे समझ लेना चाहिए, यहां हमारे तंबू गड़ गए हैं। अब हम या तो हमारी मांगे मनवाकर जाएंगे या सरकार का तंबू उखा़ड़कर जाएंगे। यह कहना है किसानों का जो पिछले 26 दिन से दिल्ली के यूपी बॉर्डर पर डटे हुए हैं।
उत्तराखंड के किसान नेता गुरुबचन सिंह ने अमर उजाला से कहा कि आंदोलन के 26 दिन बीत चुके हैं। लेकिन किसानों का जोश कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। सोमवार को ही यूपी बॉर्डर पर लगभग एक हजार नए किसान आए हैं। इनके रहने के लिए तंबू गाड़े जा रहे हैं और रजाई-बिस्तरों की व्यवस्था की जा रही है। यह सब किसानों के सहयोग से चल रहा है।
सरकार किसानों की बात क्यों नहीं मान रही है? इस सवाल पर गुरूबचन सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की ताकत कम करके आंक रही है। उसे लगता है कि किसानों को जल्दी ही झुक जाना पड़ेगा। लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि इन्हीं किसानों ने अंग्रेजी सरकार में नौ महीनों तक आंदोलन चलाया था और उसे अपने कानून वापस लेने को मजबूर कर दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को एक दिन यह कानून वापस लेना पड़ेगा, चाहे इसके लिए जितने भी दिन लग जाएं।
चिंगारी को पहचानें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
श्रावस्ती से किसान आंदोलन में बाग लेने पहुंचे नरेंद्रनाथ गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोग गलत सलाह दे रहे हैं। उन्हें यह बताया जा रहा है कि आंदोलन करने वाले किसान बेहद कम संख्या में हैं। इनके विरोध या समर्थन से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता। लेकिन उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यूपीए सरकार वाली गलती नहीं दुहरानी चाहिए, और इस आंदोलन को कुछ लोगों का विरोध-प्रदर्शन नहीं समझना चाहिए क्योंकि किसानों की स्थिति बहुत खराब है और यह चिंगारी नीचे तक भड़क रही है। सरकार ने स्थिति नहीं संभाली तो मामला बेहद खराब हो सकता है और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
किसानों ने बंद कर दिया गाजियाबाद जाने का रास्ता
सरकार के रूख को देखते हुए किसान सोमवार को और अधिक नाराज हो गए। उन्होंने दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाला रास्ता भी पूरी तरह बंद कर दिया। इससे गाजीपुर बॉर्डर पर अचानक स्थिति बिगड़ गई और भारी जाम लग गया। अधिकारियों के समझाने के बाद भी किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। किसानों का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगे नहीं मानती है तो दिल्ली जाने वाले सभी छोटे-बड़े रास्ते बंद कर दिये जाएंगे।
अनशन पर बैठे किसान
किसान नेताओं ने क्रमिक अनशन का फैसला किया है। इसके तहत हर प्रदर्शन स्थल पर 11 किसान 24 घंटे के लिए अनशन करेंगे। इसके बाद उनके स्थान पर दूसरे किसान अगले 24 घंटे के लिए अनशन करेंगे। मेरठ से आए उदयवीर सिंह भी सोमवार को अनशन कर रहे किसानों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार हमा्री मांगे नहीं मानती है तो यह आंदोलन लगातार चलता रहेगा।