केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 10 दिनों से सड़क पर उतरे किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ सरकार की पांचवें दौर की वार्ता जारी है। दिल्ली के विज्ञान भवन में ये बातचीत दोपहर 2 बजे शुरू हुई। बैठक शुरू होने के बाद किसान नेताओं ने सरकार से बिंदुवार लिखित जवाब मांगा। किसान नेताओं का कहना है कि हमने पिछली बैठक में जो बातें रखी थीं सरकार उनका बिंदुवार लिखित रूप में जवाब दे, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया।
तस्वीरेंः किसानों ने एक बार फिर नहीं खाया सरकार का खाना, खुद मंगवाई अपनी 'दाल-रोटी'
चर्चा के बीच हुए लंच ब्रेक के दौरान किसानों ने एक बार फिर सरकार द्वारा दिए गए लंच और चाय को स्वीकार नहीं किया। किसानों ने लंच के दौरान अपने साथ लाया खाना ही खाया। इससे पहले भी तीन दिसंबर को हुई बैठक में किसानों ने सरकारी खाना खाने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले किसान आंदोलन को लेकर चर्चा के लिए आज सुबह पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी के घर पर बैठक हुई जो करीब दो घंटे तक चली। इसमें गृहमंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।
भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) नेता एचएस लखोवाल का कहना है कि सरकार के सामने किसान संगठनों के 40 नेताओं ने बैठक के दौरान तीनों कृषि कानून की खामियों पर बिंदुवार अपनी बात रखी है। केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्र सरकार ने भी माना है कि किसानों की कई मांगों पर विचार किया जाएगा। हमनें सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है। किसान संगठन राजेवाल गुट के नेता का कहना है कि सरकार का संशोधन का प्रस्ताव मंजूर नहीं होगा। केंद्र सरकार को तीनों कानूनों को वापस लेना पड़ेगा।
बता दें कि प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली से लगी सीमाओं पर डटे हैं और सरकार से नये कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनमें से ज्यादातर किसान पंजाब से हैं। इससे पहले शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर हुई बैठक के बाद किसान नेता हरिंदर पाल लखोवाल ने कहा था कि हमने सरकार से कल (गुरुवार को) बात की है। हमने साफ कहा है कि तीनों कानून वापस ले। सरकार बिजली कानून और पराली जलाने को लेकर जुर्माना पर मानती दिख रही है। लेकिन हम सभी किसानों को बोलते हैं कि वो यहां आएं, लड़ाई आर-पार की है हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसानों ने 8 दिसंबर (मंगलवार) को पूरे भारत में बंद का आह्वान किया है।