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कैसे भरेगी ये खाई: हरियाणा के इस जिले में एक हजार छोरों पर 896 छोरियां, अधिकारी बता रहे कोरोना काल का साया

Thu, 08 Dec 2022 03:35 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 08 Dec 2022 03:35 PM IST
सार

वर्ष 2014 में प्रदेश का लिंगानुपात 898 रहा। यह आंकड़े इतने चिंताजनक रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2015 में हरियाणा की धरती से बेटी बचाओ का संदेश देते हुए एक विशेष अभियान शुरू करना पड़ा।

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Worrying figures of sex ratio in Faridabad 896 girls on one thousand boys
लिंगानुपात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्थ्य विभाग की लगातार सक्रियता के बावजूद जिले में लिंगानुपात के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। इस वर्ष नवंबर तक फरीदाबाद जिले में कुल 38132 नवजात में 18029 बेटियों ने जन्म लिया। ऐसे में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 896 है। यह बीते सात वर्षों में न्यूनतम स्तर का लिंगानुपात दर्ज किया गया है। इससे पहले वर्ष 2016 में जिले में 896 लिंगानुपात दर्ज किया गया था।

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इस वर्ष के आंकड़ों को अधिकारी कोरोना काल का साया बता रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष जिला स्वास्थ्य विभाग ने न केवल स्थानीय स्तर पर सक्रियता दिखाई बल्कि दिल्ली-यूपी जैसे सीमांत क्षेत्रों में भी रेड जारी रखी। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि लिंगानुपात की यह खाई भरने में कई साल का समय लग सकता है। पूरे प्रदेश में लिंगानुपात के लिहाज से जिला 17वें स्थान पर है। प्रदेश का ऑवर ऑल लिंगानुपात 915 है।

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वर्ष 2014 में प्रदेश का लिंगानुपात 898 रहा। यह आंकड़े इतने चिंताजनक रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2015 में हरियाणा की धरती से बेटी बचाओ का संदेश देते हुए एक विशेष अभियान शुरू करना पड़ा। यह चिंताजनक आंकड़े अभियान के सात वर्ष बाद भी जिले में देखने को मिल रहे हैं। लिंगानुपात के इस अंतर को आंकड़ों के लिहाज से समझने पर पता चलता है कि वर्ष 2020 के बाद जिले की स्थिति बिगड़ी है। कोरोना काल में यह स्थिति बदतर हुई है। वर्ष 2020 में जिले का लिंगानुपात 912 रहा। इसके अगले वर्ष 2021 में यह दर घटकर 893 रह गई। इस वर्ष भी लिंगानुपात में खास सुधार नहीं हो सका। स्वास्थ्य विभाग ने आंकड़ों को समझते हुए अपनी सक्रियता बढ़ाई है बावजूद इसके धरातल पर अंतर दिखने में काफी समय लगेगा।

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खतरे को पहले ही भांप चुका था जिला प्रशासन, फिर भी बिगड़े हालात
वर्ष 2020 में बल्लभगढ़ के कई गांवों में बेटियों की संख्या कम रही। ऐसे गांवों की पहचान कर जोरशोर से जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की गई। ऐसे दस गांव हैं, जहां लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले चिंताजनक रही। इसमें इम्मामुद्दीनपुर और लडोली गांव में स्थिति काफी गंभीर रही। यहां एक हजार लड़कों पर मात्र 523 लड़कियों ने ही जन्म लिया। इसी तरह साहुपुरा कला, जुन्हैड़ा, नरियाला, लढ़ौली, घरौडा, सोहना रोड, फतेहपुर चंदीला, खेरूदत्त कॉलोनी, पहलादपुर व बदरपुर सैद में बेटियों की संख्या काफी कम रही।

वर्ष - लिंगानुपात आंकड़े प्रदेश - जिला
2016 - 900- 896

2017 - 914- 901
2018 - 923- 912

2019 - 923-913
2020 - 922-912

2021 - 920-893
2022 - 915- 896 (नवंबर)

 

छापेमारी में पकड़े जा रहे भ्रूण लिंग जांच के मामले

बीते कुछ माह से स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता देखने को मिल रही है। इसके तहत भ्रूण लिंग जांच में शामिल गिरोह का पर्दाफाश करने में मदद मिल रही है। विभाग ने नवंबर के आखिरी सप्ताह में कार्रवाई करते हुए चार लोगों को रंगे हाथ पकड़ा। इससे पहले इस वर्ष जुलाई में यूपी के शामली में एक गिरोह का भंडाफोड़ किया। इसमें शामली के मुख्य मेडिकल सुपरिटेंडेंट भी शामिल मिले। इसके बाद सितंबर में यूपी के सिकंदराबाद में ऐसे ही मामले का भंडाफोड़ किया गया। इसके बाद हरियाणा के सोनीपत में भी ऐसे ही मामले की पोल खोल हुई।

जिले का लिंगानुपात बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम अपने प्रयासों में जुटी हुई है। शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली-यूपी में भी छापेमारी की जा रही है। जिले में बेटियों की रक्षा के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।
- डॉ. विनय गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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