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Faridabad News: सेवा, साहस और समर्पण की प्रतीक बन समाज को प्रेरित कर रहीं महिलाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नवरात्र के पावन अवसर पर जहां एक ओर नौ दिनों तक देवी शक्ति की आराधना पूरे श्रद्धा भाव से की जा रही है, वहीं दूसरी ओर समाज में कई महिलाएं अपने कार्यों, साहस और समर्पण के जरिये नारी शक्ति का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत कर रही हैं। प्रशासन, पुलिस, खेल और सामाजिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहीं ये महिलाएं न केवल अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं, बल्कि चुनौतियों का सामना करते हुए नई मिसाल भी कायम कर रही हैं। इनके प्रयास न केवल समाज को सकारात्मक दिशा दे रहे हैं, बल्कि अन्य महिलाओं और युवाओं को भी आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
शिक्षा प्रशासन में नेतृत्व की मिसाल
जिले में उच्च शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात रीतिका गुप्ता शिक्षा क्षेत्र में सशक्त नेतृत्व का उदाहरण हैं। उन्होंने वर्ष 1997 में राजकीय महिला महाविद्यालय, फरीदाबाद में मनोविज्ञान की सहायक प्रोफेसर के रूप में अपने कॅरिअर की शुरुआत की। अप्रैल 2023 में प्राचार्य पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया और अक्टूबर 2025 में जिला उच्च शिक्षा अधिकारी (डीएचईओ) बनीं। वर्तमान में वह जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी कॉलेजों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं।
कानून व्यवस्था में महिला नेतृत्व
जिले में डीसीपी क्राइम के पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी हिमाद्रि कौशिक भी नारी शक्ति की मजबूत पहचान हैं। 2019 बैच की हरियाणा कैडर की इस अधिकारी ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद पुलिस सेवा में कदम रखा। यमुनानगर और करनाल में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं देने के बाद अब वह फरीदाबाद में अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
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विपरीत परिस्थितियों में हौसले की उड़ान
सेक्टर-78 निवासी किरन कन्नौजिया की कहानी संघर्ष और जज्बे की मिसाल है। वर्ष 2011 में ट्रेन में लूटपाट के दौरान गंभीर हादसे में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया, लेकिन इस कठिन परिस्थिति ने उनके हौसलों को कमजोर नहीं किया। परिवार के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने न केवल खुद को संभाला, बल्कि मैराथन दौड़ में हिस्सा लेकर नई पहचान बनाई। वर्ष 2018 में उन्हें नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र भारत द्वारा महिला परिवर्तन भारत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और पैरालिंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
निस्वार्थ सेवा से समाज को दे रहीं नई दिशा
सेक्टर-4 पटेल नगर की रहने वाली आशा ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। कोरोना काल में आपदा के समय उन्होंने अपने संसाधनों से जरूरतमंदों की सहायता की और एक ऐसा मंच तैयार किया, जिसके माध्यम से लोग स्वेच्छा से सहयोग कर सकें। उन्होंने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले असहाय लोगों और दिव्यांगों की मदद की तथा आज विशेष बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे बच्चों को समझ और संवेदनशीलता के साथ शिक्षित करना जरूरी है, ताकि उनमें आत्मविश्वास विकसित हो सके।
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फरीदाबाद। नवरात्र के पावन अवसर पर जहां एक ओर नौ दिनों तक देवी शक्ति की आराधना पूरे श्रद्धा भाव से की जा रही है, वहीं दूसरी ओर समाज में कई महिलाएं अपने कार्यों, साहस और समर्पण के जरिये नारी शक्ति का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत कर रही हैं। प्रशासन, पुलिस, खेल और सामाजिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहीं ये महिलाएं न केवल अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं, बल्कि चुनौतियों का सामना करते हुए नई मिसाल भी कायम कर रही हैं। इनके प्रयास न केवल समाज को सकारात्मक दिशा दे रहे हैं, बल्कि अन्य महिलाओं और युवाओं को भी आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
शिक्षा प्रशासन में नेतृत्व की मिसाल
जिले में उच्च शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात रीतिका गुप्ता शिक्षा क्षेत्र में सशक्त नेतृत्व का उदाहरण हैं। उन्होंने वर्ष 1997 में राजकीय महिला महाविद्यालय, फरीदाबाद में मनोविज्ञान की सहायक प्रोफेसर के रूप में अपने कॅरिअर की शुरुआत की। अप्रैल 2023 में प्राचार्य पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया और अक्टूबर 2025 में जिला उच्च शिक्षा अधिकारी (डीएचईओ) बनीं। वर्तमान में वह जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी कॉलेजों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं।
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कानून व्यवस्था में महिला नेतृत्व
जिले में डीसीपी क्राइम के पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी हिमाद्रि कौशिक भी नारी शक्ति की मजबूत पहचान हैं। 2019 बैच की हरियाणा कैडर की इस अधिकारी ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद पुलिस सेवा में कदम रखा। यमुनानगर और करनाल में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं देने के बाद अब वह फरीदाबाद में अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
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विपरीत परिस्थितियों में हौसले की उड़ान
सेक्टर-78 निवासी किरन कन्नौजिया की कहानी संघर्ष और जज्बे की मिसाल है। वर्ष 2011 में ट्रेन में लूटपाट के दौरान गंभीर हादसे में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया, लेकिन इस कठिन परिस्थिति ने उनके हौसलों को कमजोर नहीं किया। परिवार के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने न केवल खुद को संभाला, बल्कि मैराथन दौड़ में हिस्सा लेकर नई पहचान बनाई। वर्ष 2018 में उन्हें नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र भारत द्वारा महिला परिवर्तन भारत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और पैरालिंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
निस्वार्थ सेवा से समाज को दे रहीं नई दिशा
सेक्टर-4 पटेल नगर की रहने वाली आशा ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। कोरोना काल में आपदा के समय उन्होंने अपने संसाधनों से जरूरतमंदों की सहायता की और एक ऐसा मंच तैयार किया, जिसके माध्यम से लोग स्वेच्छा से सहयोग कर सकें। उन्होंने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले असहाय लोगों और दिव्यांगों की मदद की तथा आज विशेष बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे बच्चों को समझ और संवेदनशीलता के साथ शिक्षित करना जरूरी है, ताकि उनमें आत्मविश्वास विकसित हो सके।