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गांव की दो महिलाओं ने उठाया बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा, टीचरों की कमी से बच्चों की पढ़ाई हो रही थी प्रभावित
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Two women of the village took up the responsibility of teaching the children, due to the lack of teachers, the education of the children was affected.
बल्लभगढ़। बल्लभगढ़ स्थित सात प्राइमरी स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते विद्यार्थी को पढ़ाई कराने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। इस समस्या से कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है लेकिन अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की गई। कोई समाधान नहीं होने पर शाहपुर गांव में दो महिलाएं बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आई हैं।
बल्लभगढ़ स्थित गांव शाहपुर खुर्द की गेस्ट टीचर रणबीर रावत ने कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया कि स्कूल में अध्यापकों की काफी कमी है। जिसकी वजह से 118 विद्यार्थी को शिक्षा देने में परेशानी होती है। इस समस्या को लेकर उन्होंने विधायक नयनपाल रावत और एसडीएम बल्लभगढ़ त्रिलोकचंद को भी बताया। दोनों ने शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी मुनेश चौधरी से अध्यापकों की नियुक्ति करने को कहा। उसके बावजूद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थी के भविष्य के बारे में सोचते हुए गांव निवासी पुष्पा को स्कूल में आकर पढ़ाने के लिए जागरूक किया। पुष्पा के आने से बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल में एक बाबू की भी नियुक्त की गई थी। वह भी बीच में बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करता था लेकिन एक अधिकारी ने उसे अपने ऑफिस में बुला लिया। गांव की एक और महिला राज भी बच्चों को पढ़ाने के लिए आती है। दोनों के कार्य का गांववासी काफी तारीफ करते हैं।
पहली सैलरी से स्कूल में दान किए पंखे
बल्लभगढ़। नौकरी की पहली सैलरी से एक महिला ने गांव मुजेसर के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंखे दान किए हैं। सेक्टर-64 की रहने वाली प्रगति दीक्षित को नोएडा में एक कंपनी में ट्रांसलेटर की जॉब मिली है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले ही उनको नौकरी मिली थी। जब पहली सैलरी मिली तो इसमें कुछ पैसे से गांव मुजेसर स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पांच पंखे दान किए हैं। जिले के सरकारी स्कूलों में कई खामियां रहती हैं, इसलिए उनके मन में यह ख्याल आया कि वह कुछ मदद कर सकें। प्रगति ने बताया कि उनके पिता अजय दीक्षित भी इस स्कूल में चार साल तक प्रिंसिपल रहे चुके हैं। पिता ने रिटायरमेंट के दौरान पांच पंखे दान किए गए थे। स्कूल के एसएस मास्टर ललित भारद्वाज प्रगति के कार्यों की सराहना की है।
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बल्लभगढ़ स्थित गांव शाहपुर खुर्द की गेस्ट टीचर रणबीर रावत ने कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया कि स्कूल में अध्यापकों की काफी कमी है। जिसकी वजह से 118 विद्यार्थी को शिक्षा देने में परेशानी होती है। इस समस्या को लेकर उन्होंने विधायक नयनपाल रावत और एसडीएम बल्लभगढ़ त्रिलोकचंद को भी बताया। दोनों ने शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी मुनेश चौधरी से अध्यापकों की नियुक्ति करने को कहा। उसके बावजूद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थी के भविष्य के बारे में सोचते हुए गांव निवासी पुष्पा को स्कूल में आकर पढ़ाने के लिए जागरूक किया। पुष्पा के आने से बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल में एक बाबू की भी नियुक्त की गई थी। वह भी बीच में बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करता था लेकिन एक अधिकारी ने उसे अपने ऑफिस में बुला लिया। गांव की एक और महिला राज भी बच्चों को पढ़ाने के लिए आती है। दोनों के कार्य का गांववासी काफी तारीफ करते हैं।
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पहली सैलरी से स्कूल में दान किए पंखे
बल्लभगढ़। नौकरी की पहली सैलरी से एक महिला ने गांव मुजेसर के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंखे दान किए हैं। सेक्टर-64 की रहने वाली प्रगति दीक्षित को नोएडा में एक कंपनी में ट्रांसलेटर की जॉब मिली है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले ही उनको नौकरी मिली थी। जब पहली सैलरी मिली तो इसमें कुछ पैसे से गांव मुजेसर स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पांच पंखे दान किए हैं। जिले के सरकारी स्कूलों में कई खामियां रहती हैं, इसलिए उनके मन में यह ख्याल आया कि वह कुछ मदद कर सकें। प्रगति ने बताया कि उनके पिता अजय दीक्षित भी इस स्कूल में चार साल तक प्रिंसिपल रहे चुके हैं। पिता ने रिटायरमेंट के दौरान पांच पंखे दान किए गए थे। स्कूल के एसएस मास्टर ललित भारद्वाज प्रगति के कार्यों की सराहना की है।
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